देहरादून: उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश की राह पर कदम बढ़ाने जा रहा है उत्तराखंड मे भी अपात्र राशनकार्डधारकों पर सरकार शिकंजा कसने की तैयारी मे है। और अगर 1 जून तक अगर अपात्र कार्ड धारकों ने राशन कार्ड सरेंडर नहीं किए तो मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा। सख्ती बरतने के इस अभियान में अब सिर्फ 13 दिन शेष रह गए हैं। यानि अपात्र राशन कार्ड धारक या तो 1 जून तक अपना राशन कार्ड सरेंडर कर दें वरना कार्रवाई होनी तय मानी जा रही है। आपको बता दें उत्तराखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान (एनएफएसए) में 1.84 लाख से अधिक अंत्योदय और तकरीबन 12 लाख प्राथमिक परिवार राशनकार्डधारक हैं। इन राशनकार्डों में दर्ज 61.94 लाख यूनिट वर्तमान में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत निश्शुल्क मिल रहे खाद्यान्न का लाभ उठा रही हैं।

खाद्य विभाग के मुताबिक एनएफएसए के अंतर्गत बड़ी संख्या में ऐसे भी परिवार हैं, जो अब पात्रता के दायरे से बाहर हो चुके हैं। और विभाग को ऐसे आवेदन बड़ी संख्या में मिल रहे हैं जो एनएफएसए के अंतर्गत राशनकार्ड बनाना चाहते हैं और पात्रता की शर्तें भी पूरी कर रहे हैं। इसके बावजूद विभाग नए राशनकार्ड नहीं बना पा रहा है। खाद्य मंत्री रेखा आर्य का कहना है की जीतने अपात्र लोग कार्ड सरेंडर करेंगे तो उतने ही पात्र लोगों के नए कार्ड बनाए जाएंगे। एक तरफ जहां अपात्र लोग खुद कार्रवाई से बचने के लिए अपना राशन कार्ड सरेंडर करा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कई राशन डीलर अभी भी अपात्र लोगों को राशन डीलर राशन वितरित कर रहे हैं। राशन डीलरों का कहना है की उनके लिए पात्र और अपात्र व्यक्ति का चुनाव करना बहुत ही मुश्किल है। वहीं बीजेपी का कहना है की अपात्र धारकों के खिलाफ निश्चित तौर पर कार्रवाई होनी चाहिए जो गरीबों का हक़ मार रहे हैं।
लेकिन सवाल ये उठता है की जब ये राशन कार्ड अलोट किए गए तब पात्र और अपात्र लोगों की पहचान क्यों नहीं की गई ? कुछ लोगों का मानना है की राशन कार्ड बनाते वक़्त नियम बताने चाहिये थे अब कार्रवाई का क्या मतलब ? क्या कार्ड बनाने के नियम पहले ही सख्ती से लागू नहीं किए जाने चाहियेँ थे ? क्या अपात्रों से वसूली करना उनपर मुकदमा करना ही एक मात्र उपाय है ? इस पूरे मामले पर कांग्रेस का कहना है की क्या अपात्र कार्ड बनाने वाले के खिलाफ भी FIR होगी ?कांग्रेस का कहना है की सरकार को गलत कार्ड बनाने वाले अधिकारी को सजा देनी चाहिए तब जाकर लगेगा की हाँ सरकार ने कुछ कारवाई की। अब देखने वाली बात ये होगी की 1 जून से पहले सरकार कुछ और आदेश निकलती है या फिर कार्ड धारकों पर कार्रवाई करके उनसे रिकवरी होनी निश्चित है।