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चमत्कार! मालिक की मौत के बाद थाने से खुद गायब हो जाती थी रॉयल एनफील्ड बुलट, लोगों ने मंदिर बनाकर पूजना शुरू कर दिया…

जयपुर: अहमदाबाद से जोधपुर जाते समय रास्ते में एक जगह है, चोटिला धाम। ये जगह राजस्थान के पाली शहर से करीब 20 किलोमीटर दूरी पर स्थित है और जोधपुर से तकरीबन 50 किलोमीटर पहले पड़ती है। यहां हाई-वे के किनारे खड़ी गाड़ियों का रेला दूर से ही आपका ध्यान खींचने लगता है। नजदीक जाने पर पता चलता है कि यहां एक मंदिर है जहां हर कोई माथा टेककर आगे बढ़ता है। यहां श्रद्धालुओं में बसों-ट्रकों के ड्राइवरों से लेकर बाइक सवार और लग्जरी गाड़ियों के मालिक तक शामिल होते हैं। लेकिन ये कोई सामान्य मंदिर नहीं है। क्योंकि यहां किसी देवता की जगह एक मोटरसाइकिल की पूजा होती है, Royal Enfield-350 की। इस बुलट का नंबर है RNZ-7773।

ये रॉयल एनफील्ड बुलट चोटिला गांव के ठाकुर जोग सिंह राठौड़ के पुत्र ओम सिंह राठौड़ की हुआ करती थी। वर्ष 1988 में ओम सिंह पाली जिले में ही स्थित अपने ससुराल से अपने घर आ रहे थे और रास्ते में हुई एक दुर्घटना में उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। सामान्य प्रक्रिया के तहत पुलिस ने इस बुलेट को थाने में लाकर खड़ा कर दिया। वहीं, दूसरी तरफ परिवार ने ओम सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया। लेकिन अगली सुबह सभी को चौंकाने वाली थी।

कहा जाता है कि बुलेट थाने से गायब थी। पुलिस ने परिवार से पूछताछ की तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर कर दी। पड़ताल करने पर पता चला कि बुलेट उसी पेड़ के नीच पहुंच गई जहां ओम सिंह का एक्सीडेंट हुआ। पुलिस ने इसे किसी मसखरे की हरकत मानते हुए बुलेट को वापिस थाने पहुंचा दिया और इस बार उसे चेन से बांध दिया। लेकिन अगले दिन सभी हतप्रभ रह गए जब बुलेट फिर गायब मिली। थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों के मुताबिक चेन टूटी हुई थी और बुलेट वापिस उसी पेड़ के नीचे खड़ी मिली। आखिरकार ओम सिंह राठौड़ की इच्छा मानते हुए उस बुलेट को वहीं जाकर खड़ा कर दिया गया।

लेकिन इसके बाद ये अविश्वसनीय घटनाएं खत्म होने की बजाय, बढ़ती चली गई। स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस जगह ओम सिंह राठौड़ की मौत हुई, उस जगह अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती थीं। लेकिन ओम सिंह की मौत के बाद वहां होने वाली दुर्घटनाओं में आश्चर्यजनक ढंग से कमी आ गई। कहा तो ये तक जाता है कि यदि उस क्षेत्र में कोई दुर्घटना हो भी जाती तो ओम सिंह राठौड़ की रूह वहां मदद के लिए पहुंच जाती। और ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि कई बार हुआ।

धीरे-धीरे ओम सिंह राठौड़ में लोगों की श्रद्धा भी बढ़ती गई और चोटिला धाम की लोकप्रियता भी। चूंकि राजस्थान में राजपूत नवयुवकों को सम्मान में ‘बना’ कहकर संबोधित किया जाता है। इसलिए दिवगंत ओम सिंह राठौड़ भी श्रद्धालुओं के बीच ‘ओम बना’ नाम से प्रसिद्ध हो गए। न सिर्फ राजस्थान बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालु चोटिला धाम आते हैं और मनौती मांगते हैं। कुछ सालों पहले हाईवे को चौड़ा करते समय ओम बना की बुलेट को पीछे खिसकाना पड़ा था। लेकिन इससे पहले प्रशासन ने बकायदा मंदिर में सेवा-पूजा करवाई थी जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुगढ़ इकठ्ठा हुए थे।

दिलचस्प बात ये है कि राजस्थान में ओम बना के श्रद्धालु अपनी गाड़ियों पर ओम बना का नाम तो लिखवाते ही हैं, लेकिन साथ ही अपनी गाड़ियों के लिए  7773 रजिस्ट्रेशन लेने में भी भारी दिलचस्पी दिखाते हैं। आरटीओ भी इस बात को बखूबी समझता है। इसलिए इस नंबर के लिए बकायदा बोली का आयोजन होता है जो कई बार लाखों-लाख रुपए तक पहुंच जाती है।

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Author: nirbhiknazar

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