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ज़रा सी चूक और काल बन गया बोतल का दूध, चली गई मासूम की जान…

बदायूं : जरा सी चूक से एक साल की मासूम की जान चली गई। बोतल का दूध उसके लिए काल बन गया।मासूम के साथ ऐसा हादसा हुआ जिसकी टीस जिंदगी भर मां को सताएगी।अब आप के मन में सवाल कौंध रहा होगा कि आखिर ऐसी कौन सी चूक हुई जिसने मासूम की जान ले ली।आइए बताते है आपको वो घटना जिसने मां से छीन लिया उसके कलेजा का टुकड़ा। घटना बदायूं के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के भगवतीपुर के मजरा मड़ैया की है।जहां रहने वाले धर्मेंद्र और उसकी पत्नी गोदावरी अपने पांच बच्चों के साथ रहती है।गोदावरी के सबसे छोटा बेटा कमल था।जिसकी उम्र एक साल थी।आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार में धर्मेंद्र और गोदावरी दोनों बटाई पर खेत लेकर काम करते है।वह कमल सहित सभी बच्चों को घर पर छोड़कर काम पर चली गई।इसके साथ ही कमल को दूध पिलाने की जिम्मेदारी अपने दूसरे बेटे को सौंप गई।जिसके लिए वह उसे बोतल में दूध बनाकर दे गई।

घर वापस लौटी तो उड़े होश, बेसुध मिला कमल

जब वह पति के साथ काम से वापस घर लौटी तो उसके होश उड़ गए।उसे कमल बेसुध पड़ा मिला।दूसरे बेटे से दूध पिलाने के बारे में पूछा ताे उसने बताया कि उसने उसे बोतल से दूध पिला दिया था।चूकि दूसरे नंबर का बेटा ही कमल को हमेशा बोतल से दूध पिलाता था।इसके बाद वह तुरंत कमल को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।जहां चिकित्सकों ने चेकअप के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।यह सुनकर गोदावरी के पैरों तले जमीन खिसक गई और वो अपने आप को कोसने लगी।

डाक्टर बोले- श्वास नली में फंसा दूध, चली गई जान

जिला अस्पताल के ईएमओ डा.नितिन कुमार सिंह का कहना है कि स्वजन बच्चे को लेकर आए थे।उसकी नाक से दूधनुमा झाग रहा था।स्वजन से बात करने पर पता चला कि बालक को लिटाकर दूध पिलाया गया।इससे उसकी सांस की नली बंद हो गई और उसकी मौत हो गई।जिसके बाद से धर्मेंद्र के घर पर कोहराम मचा हुआ है।

कहीं आप भी तो नहीं करते ऐसी लापरवाही ?

चिकित्सकों के अनुसार बच्चों को दूध या पानी पिलाते वक्त बहुत सर्तक रहना चाहिए।कोशिश ये करनी चाहिए कि बच्चे आपकी निगरानी में ही दूध या पानी पीयें। ताकि ऐसे होने वाले हादसों को टाला सा सकें और मासूम की जान बचाई जा सके।इन बातों का रखें ख्याल। बोतल से दूध पिलाते वक्त बच्चे की लेटने और बैठने की स्थिति का खास ख्याल रखे।उन्हें दूध आदि धीरे धीरे पिलाना चाहिए।दूध या पानी के फंसने गले में फंसने पर सिर, गर्दन और पीठ पर हाथ फेरने के दौरान पीठ पर हल्के हाथ से थपकी देनी चाहिए।इसके अलावा हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल योग्य चिकित्सक को दिखाना चाहिए।

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Author: nirbhiknazar

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