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70 साल का बुज़ुर्ग कर रहा है पुलिस से खोपड़ी मिलने का इंतजार, करना है पोते का अंतिम संस्कार, पढ़िये सिस्टम कितना है लाचार…

चित्तौड़गढ़: कहते हैं कि हर बुजुर्गों की चाह होती है कि उसके बच्चे उसे कंधा दें और श्मशान तक ले जाए लेकिन क्या कहा जाए जब 60 साल का बुजुर्ग इस बात के लिए चक्कर लगा रहा. उसे उसके पोते के शरीर के बाकी अंग मिल जाए, जिससे वह अपने 2016 में गायब हुए पोते की 2018 में मिली खोपड़ी का वह अंतिम संस्कार कर सकें. तस्वीरों में दिखाई दे रहे बुजुर्ग का नाम ओंकार लाल चारण है. यह कलेक्ट्रेट में चक्कर ना तो किसी जमीन के लिए लगा रहा है, ना इसे पेंशन की दरकार है बल्कि यह यहां इसलिए पहुंचा है कि साल 2016 में इस का पोता घर से गायब हो गया था. बाद में एक खेत में उसकी खोपड़ी मिली तब से यह बुजुर्ग सिस्टम के चक्कर लगा रहा है कि उसके पोते के शरीर के बाकी हिस्से बरामद करवा दो ताकि वह अपने पोते की थाने में पड़ी खोपड़ी का विधिवत अंतिम संस्कार कर सके.

इस बुजुर्ग का पोता योगेश चारण साल 2016 में घर से निकला जो वापस नहीं लौटा, लेकिन पुलिस ने ना तो इसकी रिपोर्ट दर्ज की और ना ही इसकी सुनवाई की बाद में 2 साल बाद खेत में काम करने के दौरान एक खोपड़ी बरामद हुई पुराने विवाद के चलते बुजुर्ग ने आशंका जताई. पुलिस और प्रशासन के चक्कर लगाने के बाद 3 महीने बाद सैंपल लिए गए और यह पुष्टि हुई खोपड़ी उसके गायब हुए पोते योगेंद्र की है. उसके बाद शरीर के बाकी हिस्सों की बरामदगी और उसकी हत्या करने वालों को सजा दिलाने के लिए यह बुजुर्ग इंतजार कर रहा है.

सिस्टम से लड़ रहा है थाने से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक यह गुहार लगा चुका है, लेकिन बुजुर्ग ओंकार की सुनवाई नहीं हो रही है बल्कि हालात यह है कि मृतक योगेंद्र की खोपड़ी डीएनए टेस्ट के बाद थाने में जमा है और उसके शरीर के बाकी हिस्से अब तक गायब है. ओंकार की यह पीड़ा सिस्टम के मुंह पर तमाचा है, जहां सुलभ न्याय केवल कागजी साबित हो रहा है. अब एक बार फिर बुजुर्ग ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच करा कर उसे न्याय दिलाने की गुहार की है. अब उसे न्याय कब मिलेगा यह देखने वाली बात है.

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Author: nirbhiknazar

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