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धामी ने दी थी चेतावनी, फिर भी ब्यूरोक्रेट्स की नहीं रुक रही मनमानी, पिछली सरकार मे भी अधिकारियों ने कई मंत्रियों की नहीं मानी…

देहरादून: उत्तराखंड 13 जिलों का छोटा सा राज्य है लेकिन इस छोटे से राज्य मे मंत्रियों विधायकों और ब्यूरोक्रेट्स के बीच अक्सर तनातनी देखने को मिलती है उत्तराखंड के गठन होने बाद से ही यहाँ बेलगाम नौकरशाही मंत्रियों विधायकों पर हावी रही है । उत्तराखंड मे मंत्रियों विधायकों के अधिकारों पर अतिक्रमण अधिकारी करते दिखे हैं। कई बार ऐसा हुआ है की उच्च लेवल के अधिकायों ब्यूरोक्रेस्ट्स ने मंत्रियों विधायकों की बात नहीं सुनी और उन्हे अनदेखा किया हैं फिलहाल राज्य मे भाजपा की धामी सरकार है आपको बता दें की सीएम बनते ही पुष्कर सिंह धामी ने ये साफ कर दिया था की ब्यूरोक्रेट्स / अधिकारियों को अनुशासन मे रहना होगा । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पद संभालते ही प्रदेश के अफसरों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी कि जरा भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. लेकिन प्रदेश में अफसरशाही इस कदर हावी है अधिकारी मंत्रियों की बात नहीं सुनते कोई आदेश जारी करते वक़्त उनसे चर्चा नहीं करते यही कारण है की मंत्री और अधिकारियों मे ठन जाती है फिलहाल तो मामला खाद्य आपूर्ति मंत्री रेखा आर्य का है।

आपको बता दें की खाद्य सचिव व आयुक्त सचिन कुर्वे ने 22 जून को देहरादून, हरिद्वार सहित तमाम जिलों में जिला पूर्ति अधिकारियों के तबादले कर दिए. ट्रांसफर लिस्ट बाहर आने के बाद मंत्री रेखा आर्य ने तत्काल प्रभाव से सचिन कुर्वे को पत्र लिखकर तुरंत स्थानांतरण रोकने की बात कही. लेकिन सचिन कुर्वे ने मंत्री के पत्र का संज्ञान ही नहीं लिया और उसी दिन देर शाम देहरादून जिले के डीएसओ के ट्रांसफर आर्डर जारी कर दिए. इसके बाद रेखा आर्य और सचिव मे तनातनी होने लगी और बात बिगड़ गईं मंत्री ने इसकी शिकायत सीएम से लेकर मुख्य सचिव तक कर डाली। अब सीएम खाद्य सचिव व आयुक्त सचिन कुर्वे पर क्या एक्शन लेते हैं ये देखने वाली बात है। लेकिन ये पहली बार नहीं जब नौकरशाही लोकशाही पर हावी हुई हो। इससे पहले भी पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने अपने विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए उन्हे खूब लताड़ा था और बात सुनने की चेतावनी दी थी। वहीं कांग्रेस का भी बिलकुल साफ तौर पर कहना है की ब्यूरोक्रेट्स को सरकार के मंत्रियों विधायकों की बात सुननि चाहिए अगर अधिकारी नहीं सुनते तो ये सरकार का अपमान है।

पिछली सरकार मे मंत्री ब्यूरोकेट्स के साथ तनातनी

पिछली सरकार मे कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी यतीश्वरानंद ने हरिद्वार जिलाधिकारी को कानूनगो को सस्पेंड करने का आदेश दिये थे, लेकिन अफसरों ने उनके आदेश को दरकिनार कर कानूनगो को मुख्यालय से अटैच कर दिया था . और ये आदेश इसलिए दिये गए थे की बीजेपी के पूर्व जिला मंत्री राकेश शर्मा हरिद्वार तहसील के कानूनगो अनिल कंबोज के पास शस्त्र लाइसेंस के काम से गए थे. इस दौरान कानूनगो दफ्तर में फरियादियों की बेंच पर लेटकर आराम फरमा रहे थे। इसके अलावा पिछली सरकार मे ही बागेश्वर जनपद भ्रमण पर पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज के कार्यक्रम से जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक नदारद रहे थे । इससे नाराज कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने फोन के माध्यम से इसकी शिकायत मुख्य सचिव से की। मुख्य सचिव ने मामले का संज्ञान लेते हुए दोनों को नोटिस भेज मामले में स्पष्टीकरण मांगा था। इससे पहले बीजेपी की पिछली सरकार में मंत्री रेखा आर्य ने एसएसपी/डीआईजी देहरादून को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनके विभाग के एक आईएएस अधिकारी ‘लापता’ थे और यहां तक कि उनके ‘अपहरण’ की संभावना का भी जिक्र किया था। जब मामला बढ़ा, तो एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की ओर से जांच की गई और रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंप दी गई। इस तरह के एक अन्य मामले में बीजेपी के किच्छा से विधायक राजेश शुक्ला और एक IAS अधिकारी के बीच काफी गर्मा-गर्मी हुई थी, जिसके बाद विधायक शुक्ला ने विशेषाधिकार हनन का मामला विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत किया था। इसी तरह, पिछली सरकार मे विधायक, बिशन सिंह चुफाल ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी और अधिकारियों को बीजेपी सांसदों की बात नहीं सुनने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी।

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Author: nirbhiknazar

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