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बुलेट ट्रेन से, धरती से चाँद तक पहुंचाएगा जापान, पढ़िए पूरी खबर और देखिये VIDEO

न्यूज़ डेस्क : अक्सर हमसे कहा जाता है कि जिंदगी में कुछ बड़ा सोचो, कुछ बड़ा सोचो! जापान (Japan) ने इस बार सच में बहुत बड़ा सोचा है. जापान की इस सोच के आगे एलन मस्क की सोच भी काफी पीछे दिख रही है. इधर, भारत समेत कई देश अपने स्पेस अभियानों (Space Programme) में लगे हैं और उधर जापान ने लोगों को बुलेट ट्रेन से ही धरती से चांद पर पहुंचाने की ठान ली है. जापान की योजना है कि वह धरती से एक बुलेट ट्रेन चलाएगा, जो लोगों को चांद तक ले जाएगी. इस प्लान में सफलता मिलने के बाद जापान बुलेट ट्रेन से ही लोगों को मंगल ग्रह पर भी भेजेगा. धरती से चांद तक बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर जापान ने प्लान करना शुरू कर दिया है. जापान के इस मेगा प्रोजेक्ट में मंगल ग्रह पर ग्लास हैबिटेट बनाने की भी योजना है. यानी धरती से जो लोग बुलेट ट्रेन के माध्यम से वहां भेजे जाएंगे, वे वहां एक आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट में रहेंगे. इस रहेगा, जिसका आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट सेंटर का माहौल धरती जैसा बनाया जाएगा.

चांद और मंगल पर रहने लगेंगे लोग!

इंडियन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी और काजिमा कंस्ट्रक्शन ने मिलकर यह योजना बनाई है. वैज्ञानिकों की टीम ने पिछले दिनों प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बारे में जानकारी दी. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि 21वीं सदी की आधी अवधि बीतने के बाद यानी इसके दूसरे हिस्से में (After 2050) इंसान चांद और मंगल पर रहने लगेगा.

चांद और मंगल पर धरती जैसा माहौल

आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट के बारे में वैज्ञानिकों ने बताया है कि वहां भी इतनी ग्रैविटी (गुरुत्वाकर्षण) होगा, जो धरती जैसा ही असर करेगा. वहां भी ऐसा वायुमंडल तैयार किया जाएगा, जो इंसानों को धरती की तरह महसूस कराए. ऐसा इसलिए भी कि कम ग्रैविटी वाली जगहों पर इंसानों की हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. एक तरफ जहां भारत कई स्पेस अभियानों में लगा है, अमेरिका फिर से चांद पर जा रहा है, चीन मंगल ग्रह पर खोज में लगा हुआ है, रूस भी चीन संग चंद्रमा के लिए जॉइंट मिशन प्लान कर रहा है, वहीं भारत के इस करीबी मित्र देश (जापान) ने बुलेट ट्रेन और आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट का मेगा प्रोजेक्ट तैयार किया है. कहा जा रहा है कि जापान अपने इस मेगा प्रोजेक्ट में लग गया है. हालांकि इसमें अभी समय लगेगा, लेकिन आने वाले दशकों में इंसानों का चांद, मंगल और अन्य ग्रहों पर भी रहना आसान होगा.

चांद और मंगल पर कैसी होगी कॉलोनी?

इंसानों के रहने के लिए चांद और मंगल ग्रह पर कॉलोनी बनाई जाएगी. यह ग्लास कॉलोनी ऐसी होगी, जहां इंसान आराम से रह सकेंगे. कॉलोनी के अंदर सबकुछ सामान्य रहेगा और हो सकता है अंदर रहने के लिए आपको कुछ खास कष्ट न करना पड़े लेकिन बाहर जाने के लिए आपको स्पेससूट पहनना होगा. हालांकि बाहर स्पेस में रहने पर मांसपेशियों और हड्डियों पर प्रभाव पड़ता है, वे कमजोर पड़ सकती हैं, इसलिए कॉलोनी के अंदर रहना आरामदायक रहेगा.

ग्लास कॉलोनी में होंगी सुविधाएं

चांद पर बननेवाली कॉलोनी का नाम लूनाग्लास (Lunaglass) होगा.

मंगल पर बननेवाली कॉलोनी का नाम मार्सग्लास (Marsglass) होगा.

कॉलोनी एक कोन की तरह होगी, जिसमें आर्टिफिशियल ग्रैविटी होगी.

कॉलोनी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की भी सुविधा होगी.

इसके अंदर हरे-भरे पेड़ होंगे, नदियां होंगी, पानी वगैरह सबकुछ होगा.

इमारत 1300 फीट लंबी होगी. 2050 तक प्रोटोटाइप तैयार होगा.

फाइनली इसे तैयार होने में 100 साल भी लग सकते हैं.

धरती पर बनेगा टेरा स्टेशन

स्पेस एक्सप्रेस कैप्सूल रेडियल सेंट्रल एक्सिस पर चलेंगे. चांद से मंगल ग्रह पर आने-जाने के लिए 1G की ग्रैविटी मेंटेन की जाएगी. इसके लिए धरती पर एक ट्रैक स्टेशन बनाया जाएगा, जिसका नाम होगा- टेरा स्टेशन. 6 कोच वाली स्पेस एक्सप्रेस के पहली और आखिरी कोच में रॉकेट बूस्टर्स लगे होंगे जो पूरी ट्रेन को आगे और पीछे की ओर ले जाने में मदद करेंगे. धरती और चांद के गुरुत्वाकर्षण शक्ति के हिसाब से इसे एडजस्ट किया जा सकेगा.

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक पर चलेगी बुलेट ट्रेन

क्योटो यूनिवर्सिटी और काजिमा कंस्ट्रक्शन मिलकर इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत स्पेस एक्सप्रेस (Space Express) नाम की बुलेट ट्रेन बनाने जा रहे हैं. यह ट्रेन धरती से चांद और मंगल के लिए रवाना होगी. इस इंटरप्लैनेटरी ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम को हेक्साट्रैक नाम दिया गया है. इस ट्रैक पर हेक्साकैप्सूल चलेंगे, जो 15 मीटर लंबे होंगे. 30 मीटर लंबे कैप्सूल भी होंगे, जो धरती से चांद होते हुए मंगल ग्रह पर जाएंगे. ये कैप्सूल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक पर चलेंगे, जैसे वर्तमान में चीन और जर्मनी में मैगलेव ट्रेनें चला करती हैं.

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Author: nirbhiknazar

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