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विजिलेंस की जांच से संतुष्ट नहीं, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल !

देहरादून : उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में जो गड़बड़ी सामने आई, उन पर पुलिस त्वरित कार्रवाई करती और आयोग को इससे अवगत कराती तो परीक्षा भर्ती माफिया बहुत पहले जेल में होते। आयोग (UKSSSC) के शिकायती पत्रों पर पुलिस सो गई। वर्ष 2018 में वन आरक्षी भर्ती परीक्षा में ब्लूटूथ से नकल के मामले सामने आने के बाद चयन आयोग ने पकड़े गए संदिग्धों पर कड़ी कार्रवाई करने की शिफारिश की थी, लेकिन हाई कोर्ट में पुलिस की ओर से चार्टशीट दर्ज होने से पहले ही आरोपितों व शिकायतकर्ता के बीच समझौता हो गया। जिसके बाद ब्लूटूथ से नकल करने के मामले के छह आरोपित आयोग पर दबाव बना रहे हैं कि उनका वन आरक्षी का परिणाम घोषित किया जाए।

आयोग (UKSSSC) ने सरकार से मांगी है राय

यूकेएसएसएससी (UKSSSC) ने 16 फरवरी 2018 को वन आरक्षी के 1218 पदों के लिए प्रदेशभर के 112 केंद्रों पर परीक्षा कराई थी। इस परीक्षा में 98 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद हरिद्वार के सात केंद्रों में ब्लूटूथ से नकल के मामले सामने आए। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने जांच के लिए एसआइटी गठित की। एसआइटी (SIT) ने छह शिकायतों के आधार पर प्रदेशभर से 12 से अधिक आरोपितों को गिरफ्तार किया था। एसआइटी ने इस बारे में आयोग के निवर्तमान अध्यक्ष एस. राजू से वन आरक्षी परीक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए पत्र लिखा था। एसआइटी (SIT) ने जांच शुरू की तो कुछ समय बाद आरोपित और शिकायतकर्ताओं में समझौता हो गया, जिसकी जानकारी पुलिस ने हाई कोर्ट में दी।

न्यायालय ने पुलिस की सिफारिश को स्वीकार कर लिया। इसके बाद जिन छह संदिग्ध आरोपितों का आयोग ने परीक्षा परिणाम रोका था, वह आयोग पर परीक्षा परिणाम जारी करने के लिए दबाव बनाने लगे। इन छह आरोपितों ने आयोग के सचिव पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कर दिया। आयोग के सचिव संतोष बडोनी ने पुष्टि करते हुए बताया कि जिन छह युवाओं का वन आरक्षी का परीक्षा परिणाम रोका गया था, उनके बारे में सरकार से राय मांगी गई है, लेकिन अभी तक इस बारे में सरकार की ओर से कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।


विजिलेंस ने साझा नहीं की जानकारी : एस. राजू

आयोग ने निवर्तमान अध्यक्ष एस. राजू (IAS S Raju) ने कहा कि पूर्व में भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी के मामलों में विजिलेंस ने उनसे संपर्क किया व परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों में उनके पास आई शिकायतों के आधार पर प्राप्त जानकारी साझा करने को कहा। जिस पर उन्होंने विजिलेंस को छह बार जानकारी दी, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई की, इस संबंध में जानकारी साझा नहीं की। परीक्षा आयोजित करने वाले सबसे अहम एजेंसी को भी कार्रवाई की जानकारी नियमित मिलनी चाहिए थी। अभ्यर्थियों के साथ-साथ आयोग भी तो प्रभावित है।

साक्ष्य मिले तो नेता से करेंगे पूछताछ

स्नातक स्तर की वीडीओ व वीपीडीओ परीक्षा में एक जनप्रतिनिधि का नाम सुर्खियों में आने के बाद खुफिया विभाग भी सक्रिय हो गया है। जनप्रतिनिधि की पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है, क्योंकि जनप्रतिनिधि का नाम पूर्व में हुई वन आरक्षी भर्ती में कुछ अभ्यर्थियों को नकल करवाने में भी सामने आया था। हालांकि, वर्तमान प्रकरण में जनप्रतिनिधि का नाम तो वही है, लेकिन आगे सरनेम दूसरा लिखा है।

उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (Special Task Force) के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि जनप्रतिनिधि के खिलाफ इंटरनेट मीडिया पर काफी पोस्ट वायरल हो रही हैं। जनप्रतिनिधि के विरुद्ध यदि कहीं से शिकायत मिलती है और उनके खिलाफ कुछ साक्ष्य मिलते हैं तो उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। यदि उनकी संलिप्तता पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मामला संवेदनशील है, ऐसे में जांच के बाद ही कार्रवाई संभव है।

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Author: nirbhiknazar

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