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शक था की पड़ोसी से चल रहा है पत्नी का चक्कर, पति ने, सेना की फायरिंग रेंज से चुराया बम, फटने से अपने ही बेटे का निकल गया दम…पढ़ें पूरा मामला

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर के महू के बेरछा में आर्मी का एक रिजेक्टेड हैंड ग्रेनेड फटने से 12 साल के बच्चे की मौत हो गई. आरोपी महू की बेरछा फायरिंग रेंज से कुछ समय पहले एक डेड हैंड ग्रेनेड चुरा कर लाया था. जो कि आपसी विवाद में पटकने पर फट गया. हैंड ग्रेनेड फटने से वहां मौजूद सभी लोगों में अफरा-तफरी मच गई. घटना में 12 साल के एक बच्चे की मौत हो गई जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए. इंदौर ग्रामीण क्षेत्र के एसपी भगवंत सिंह ने एक समाचार चैनल जानकारी दी कि सुनील नाम के एक शख्स का पड़ोस में रहने वाले दीपक से पुराना विवाद था. सुनील की पत्नी कुछ समय पहले नाराज होकर मायके चली गई थी, जिसके बाद से सुनील को आशंका थी कि दीपक के साथ उसके अनैतिक संबंध है और उसी के बहकाने पर उसकी पत्नी मायके चली गई है. रविवार को भी दीपक के साथ इसी बात पर उसका विवाद शुरू हुआ. विवाद इतना बढ़ा कि मारपीट शुरू हो गई, इस दौरान सुनील का बेटा भी वहां मौजूद था.

भांजे से मंगवाया ग्रेनेड और जमीन पर पटक दिया

झगड़ा सुलझाने के लिए दीपक का भाई, पड़ोस में रहने वाले जालम सिंह समेत और भी अड़ोस पड़ोस के लोग वहां इकट्ठा हो गए. इसी दौरान सुनील ने अपने भांजे विशाल से ग्रेनेड लाने को कहा, और उसे जमीन पर पटक दिया. ग्रेनेड पटकते ही जोर का विस्फोट हुआ, जिसमें सुनील के 12 साल के बेटे वैभव की मौत हो गई जबकि एक दर्जन लोग घायल हो गए. जालम सिंह की शिकायत पर पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है. 3 आरोपी खुद भी गंभीर हालत में अस्पताल में ही भर्ती हैं. चौथे आरोपी पप्पू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

पैसों के लालच में चुरा लाते हैं रिजेक्टेड सामान

पुलिस के मुताबिक घटना दुखद है, कई बार समझाने के बावजूद गांव के लोग फायरिंग रेंज में चले जाते हैं और वहां से आर्मी का वेस्ट उठाकर ले आते हैं. यह ग्रेनेड भी ऐसा ही था क्योंकि आर्मी की प्रैक्टिस में रिजेक्ट हुआ मटेरियल वहीं छूट जाता है. कई बार पैसों के लालच में आसपास के गांव वाले इसे चुरा कर ले जाते हैं जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है. आर्मी के फायरिंग रेंज के नियम के मुताबिक प्रेक्टिस से कुछ वक्त पहले आसपास के गांवों में मुनादी करवाई जाती है कि प्रैक्टिस शुरू होने वाली है और फायरिंग रेंज से गांव के लोग दूर रहें. लेकिन इस प्रैक्टिस में इस्तेमाल होने वाले धातु को चुराने के लिए गांव के लोग फायरिंग रेंज में चले ही जाते हैं और उसे बीन कर ले आते हैं. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि गांव वालों को फायरिंग रेंज में जाने से रोकना पुलिस और आर्मी दोनों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है.

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Author: nirbhiknazar

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