देहरादून: आजाद हिन्द फौज के नायक और स्वतंत्र सेनानी सुभाष चन्द्र बोस की जिंदगी और उनकी मृत्यु से ले के कई रहस्य कायम हैं। रहस्यों के बारे में जानकारी दुनिया के सामने लाने के लिए शोध को बेहतर उपाय मानते हुए Graphic Era Hill विवि के भीमताल Campus में इस पर आधारित शोध प्रतियोगिता शुरू की गई है। सुभाष चंद्र बोस को समर्पित सुभाष स्वराज सरकार शोध प्रतियोगिता का उद्देश्य नेता जी के जीवन के अनछुहे ऐतिहासिक पहलुओं को शोध के माध्यम से जमाने के सामने पेश करना है। देश भर के विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं, शोधार्थी इसमें प्रतिभाग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में Graphic Era Group of Institutions के Chairman प्रोफेसर डॉ कमल घनशाला, दून विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ सुरेखा डंगवाल, भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर व उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ ओपीएस नेगी ने इस शोध प्रतियोगिता के पोस्टर को जारी किया। मुख्य वक्ता कानिटकर ने इस अवसर पर सुभाष बोस के जीवन पर प्रकाश डाला।
उन्होंने नेताजी के रंगून में युद्ध बंदियों के समक्ष दिए भाषण का चित्रण करते हुए कहा कि अगर उस दिन वह खुद वहां होते तो देश के लिए किस प्रकार का चिंतन करते। उन्होंने बताया कि उस समय देश के लिए मरना आवश्यक था परंतु वर्तमान युग में राष्ट्र के लिए जीना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए युवाओं को आगे आना पड़ेगा। शोध ही सर्वश्रेष्ठ साधन है। शोध ही आत्मनिर्भर भारत का महत्वपूर्ण आधार होगा।
प्रो(डॉ) कमल घनशाला ने नेताजी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सुलझाने के लिए शोध ही सबसे बड़ा माध्यम हो सकता है। डॉ सुरेखा डंगवाल ने कहा कि आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों की नीव हिला कर रख दी थी।

उन्होंने कहा कि उस विषम परिस्थिति में भी फौज के गठन तथा प्रबंधन जैसे उत्कृष्ट कार्य पर शोध के लिए युवाओं को बढ़-चढ़कर शोध प्रतियोगिता में भाग लेना चाहिए। डॉ नेगी ने युवाओं से शोध पत्र लेखन का कार्य नियमित रूप से करने पर बल दिया। विमोचन समारोह में विश्वविद्यालय के भीमताल परिसर के निदेशक प्रो मनोज लोहानी, भारतीय युवा आयाम के सह प्रमुख अनिल रावत, प्रो महेश मनचंदा एव अक्षुन गायकवाड़ के साथ शिक्षक और छात्र छात्राएं उपस्थित रहे । संचालन प्रो सन्दीप विजय ने किया।