नोएडा: हर किसी को अपनी जिंदगी में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. कुछ लोग इसके आगे घुटने टेक देते हैं. लेकिन कई ऐसे होते हैं जो हर मुश्किलों का डटकर सामना करते हैं. जाहिर है मेहनत का फल भी हमेशा मीठा होता है. नोएडा की एक मां की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन इस महिला ने हिम्मत नहीं हारी. आज वो घर चलाने के लिए अपने बच्चे को गोद में बांध कर ई-रिक्शा चलाती है. ये कहानी है उत्तर प्रदेश की चंचल शर्मा की. नोएडा (जिला गौतमबुद्धनगर) की सड़कों पर वो अपने एक साल के बच्चे को लेकर ई-रिक्शा चलाती हैं. वो पति से अलग अपनी मां के साथ खोड़ा कालोनी में रहती हैं. लेकिन जब उनकी मां सब्जी बेचने जाती हैं तो बच्चे की देखभाल करने वाला कोई नहीं होता. यही कारण है कि जब वो रिक्शा चलाती हैं तो अपने बेटे को साथ ले जाती हैं.

आसान नहीं है सफर
चंचल के मुताबिक ये चुनौती आसान नहीं है. लेकिन घर चलाने के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ता है. उन्होंने ये भी कहा कि बच्चे को पहले वो अपनी मां या फिर बहन के पास छोड़ देती थीं. लेकिन हमेशा ये संभव नहीं होता. अब महीने में 2-3 दिन ही वो बच्चे को छोड़ती हैं. उन्होंने गर्मी के दौरान नोएडा की सड़कों पर ड्राइविंग को भी याद किया, लेकिन उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं था. उन्होंने कहा, ‘गर्मी ने उस (बच्चे) पर भारी असर डाला. जैसे ही मैं गाड़ी चलाती वह रोता रहता था.’

दूध की बोतल रखती हैं साथ
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत करते हुए चंचल ने कहा कि वो रोजाना 600-700 रुपये के बीच कमा लेती हैं. इस कमाई का लगभग आधा हिस्सा ई-रिक्शा खरीदने के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने में खर्च हो जाता है. उन्होंने बताया कि बच्चे के लिए दूध की बोतल वो हमेशा साथ रखती हैं. चंचल सेक्टर 62 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल और सेक्टर 59 में लेबर चौक के बीच अपना ई-रिक्शा चलाती हैं.