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गुलाम नबी आजाद ने अपनी नई पार्टी का किया ऐलान, डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी रखा नाम

नई दिल्ली : कांग्रेस से किनारा कर चुके गुलाम नबी आजाद ने अपनी नई पार्टी ऐलान कर दिया है. उनकी नई पार्टी का नाम डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी (Democratic Azad Party) है. अपनी नई पार्टी को लेकर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि लगभग 1,500 नाम हमें उर्दू, संस्कृत में भेजे गए थे. हिन्दी और उर्दू का मिश्रण ‘हिन्दुस्तानी’ है. हम चाहते थे कि नाम लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और स्वतंत्र हो. इसलिए पार्टी का ये नाम तय हुआ. जम्मू में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि हमारी राजनीति जाति या धर्म पर आधारित नहीं होगी. हम सभी धर्मों और राजनीतिक दलों का सम्मान करेंगे. मैंने कभी किसी पार्टी या नेताओं पर निजी हमले नहीं किए. मैं नीतियों की आलोचना करता हूं. हमें राजनीतिक नेताओं के खिलाफ व्यक्तिगत हमले करने से बचना चाहिए.

बता दें कि गुलाम नबी आजाद तीन दिवसीय जम्मू-कश्मीर दौरे पर हैं. कांग्रेस छोड़ने के बाद भी गुलाम नबी आजाद ने प्रदेश का दौरा किया था. इस दौरान गुलाम नबी आजाद ने नई पार्टी के लिए समर्थकों के साथ चर्चा की थी और दिल्ली में पार्टी के नाम को लेकर मंथन किया था. उन्होंने बताया था कि नई पार्टी की विचारधार उनके नाम की तरह होगी और इसमें सभी धर्मनिरपेक्ष लोग ही शामिल हो सकते हैं.

26 अगस्त को कांग्रेस से दिया था इस्तीफा

73 साल के गुलाम नबी आजाद ने 26 अगस्त को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था. आजाद ने इस्तीफा देने के साथ ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी जमकर हमला बोला था. आजाद के इस्तीफे के बाद एक पूर्व उपमुख्यमंत्री, 8 पूर्व मंत्री, एक पूर्व सांसद, 9 विधायकों के अलावा बड़ी संख्या में पंचायती राज संस्थान के सदस्यों, जम्मू-कश्मीर के नगर निगम पार्षद और जमीनी स्तर के कई कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था.

फारूक अब्दुल्ला ने भी दिया ऑफर

गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस आलाकमान पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा कि मुझे बेहद अफसोस है कि गुलाम नबी आजाद को कांग्रेस पार्टी छोड़नी पड़ी, जो यूनिवर्सिटी से लेकर आज तक आपके साथ खड़े रहे. इस देश को बनाने के लिए खड़े रहे. उन्हें आज पार्टी छोड़नी पड़ी. ये (गुलाम नबी आजाद) सिर्फ कांग्रेस के नेता ही नहीं थे, बल्कि गांधी परिवार के एक हिस्सा थे. इंदिरा गांधी से लेकर आज तक जैसे राहुल गांधी हैं, वैसे ही गुलाम नबी आजाद सोनिया गांधी के करीबी रहे हैं. फारूक ने कहा कि कुछ ना कुछ तो हुआ है, जिसकी वजह से आजाद को गांधी खानदान को छोड़ना पड़ा.

वहीं, बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि था एक कश्मीरी भाजपा में कैसे शामिल हो सकता है? मुझे ऐसे कयासों से घृणा है. कांग्रेस को लेकर उन्होंने कहा था, ”मैं अपने कॉलेज के दिनों से इस पार्टी का हिस्सा रहा हूं. मैं कभी बीजेपी में शामिल नहीं होऊंगा. मैं कश्मीर चुनाव के लिए अपनी पार्टी बनाऊंगा.”

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Author: nirbhiknazar

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