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पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा बोले – बैक डोर से भर्ती अवैध, तो भर्तियां करने वाला मंत्री कैसे निर्दोष ?

ऋषिकेश: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कहते हैं कि विधानसभा में बैक डोर की भर्तियों को निरस्त कर दिया गया है तो भर्तियां करने वाला मंत्री कैसे निर्दोष हो सकता है। आखिर क्यों वह अब तक धामी सरकार की कैबिनेट का हिस्सा बना हुआ है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।

प्रेमचंद अग्रवाल की बर्खास्तगी को लेकर आंदोलन को समर्थन

युवा न्याय संघर्ष समिति की ओर से रिसार्ट की महिला कर्मचारी की हत्या और विधानसभा भर्ती घोटाले के आरोप में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष व काबीना मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की बर्खास्तगी को लेकर आंदोलन को पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रदीप टमटा ने अपना समर्थन दिया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भर्ती घोटाले के मामले में भी सरकार सिर्फ वाहवाही लूटने का काम कर रही है। जब मुख्यमंत्री इन भर्तियों को अवैध ठहरा चुके हैं और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात कर रहे हैं, तो बैक डोर से यह भर्तियां करने वाले तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष कैसे निर्दोष हो सकते हैं। आखिर क्यों आज भी वह धामी सरकार के मंत्रिमंडल का हिस्सा बने हुए है।

साक्ष्य मिटाने वालों के खिलाफ मुकदमा क्‍यों नहीं

वनन्तरा रिसार्ट की महिला कर्मचारी की हत्या के मामले में भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता प्रदीप टमटा ने कहा कि घटनास्थल पर जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाने का काम किया उनके खिलाफ क्यों नहीं अब तक मुकदमा दर्ज किया गया। अब तक सरकार और एसआइटी यह तक नहीं बता पा रही है कि किस वीआइपी को स्पेशल सर्विस देने के लिए महिला कर्मचारी को उत्पीड़ित किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि एसआइटी की जांच से हम संतुष्ट नहीं है, इस मामले में सीबीआइ जांच होनी चाहिए।

काशीपुर में महिला की हत्या के दोषियों को मिले सजा

पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में माफिया राज चल रहा है। काशीपुर के कुंडा थाना क्षेत्र के भरतपुर गांव में उत्तर प्रदेश पुलिस की फायरिंग में जसपुर के ज्येष्ठ ब्लाक प्रमुख गुरताज भुल्लर की पत्नी गुरप्रीत की मौत सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। जब भी एक राज्य से दूसरे राज्य में पुलिस जाती है तो उसकी एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। उत्तराखंड सरकार बताए कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने स्थानीय पुलिस को विश्वास में क्यों नहीं लिया। एक निर्दोष महिला की मौत के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को तो सजा मिलनी ही चाहिए।

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Author: nirbhiknazar

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