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उत्तराखंड में छठ पूजा से जुड़ने लगे हैं स्थानीय लोग कई गढ़वाल और कुमाऊं के लोग अब घाटों पर जाकर करने लगे हैं छठ पूजा -बिहारी महासभा

देहरादून: बिहारी महासभा की ओर से सहस्त्रधारा रोड पर खरना  प्रसाद की व्यवस्था की गई है सभा के सभी सदस्य  खरना प्रसाद वहीं पर ग्रहण करेंगे छठ पूजा का आज दूसरा महत्वपूर्ण दिन है पहले दिन नहाए खाए के साथ व्रत की शुरुआत हो गई और अब आज खरना महाप्रसाद का दिन है कहा जाता है कि पुत्र प्राप्ति के लिए लोक खरना  का व्रत करते हैं और इसके प्रसाद को बहुत आस्था के साथ ग्रहण करते हैं । बिहारी  महासभा के छठ पूजा कार्यक्रम का यह दूसरा दिन है आज भी सभी कार्यकर्ता घाटों पर सात सज्जा एवं सफाई लाइट की व्यवस्था के लिए लगे हुए हैं

बिहारी महासभा के अधिकारियों ने की एसएसपी एवं जिलाधिकारी से मुलाकात

आज बिहारी महासभा के अध्यक्ष सचिव कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों ने जिलाधिकारी देहरादून को एक पत्र सौंपकर टपकेश्वर महादेव मंदिर चंद्रमणि मंदिर और विशेष रूप से प्रेम नगर पुल के नीचे छठ के कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था एंबुलेंस की व्यवस्था डॉक्टरों की व्यवस्था की मांग की है समिति के पदाधिकारियों ने एसएसपी देहरादून से भी मुलाकात कर प्रशासनिक सहयोग की अपेक्षा की है अधिकारियों से मुलाकात के बाद बिहारी महासभा के पदाधिकारियों ने पत्र के माध्यम से छठ घाट पर व्रतियों के सुविधा हेतु एवं गाड़ी के आवागमन हेतु सुरक्षा के लिए जिलाधिकारी और एसएसपी दोनों से अनुरोध किया है।

लाइटों से जगमग रहा है छठ पूजा का घाट

बिहारी महासभा द्वारा आयोजित छठ महोत्सव में मुख्य रूप से चंद्रमणि/ टपकेश्वर महादेव मंदिर/ ब्रम्हपुरी  खाला / प्रेम नगर और सहस्त्रधारा में मनाया जा रहा है इसके सभी घाटों में लाइट की पूरी व्यवस्था कर दी गई है तरह-तरह के लाइटों की रोशनी से पूरा घाट  जगमगा रहा है लाइटिंग की व्यवस्था और वहां पर चल रहे कार्यक्रम की तैयारी को देखने के लिए उत्तराखंड के स्थानीय लोग भी आ रहे हैं ।।

अधिकारियों का मिल रहा है पूरा सहयोग

बिहारी महासभा के सचिव  चंदन कुमार झा  ने बताया के छठ पूजा के कार्यक्रम में अधिकारियों का पूरा सहयोग मिल रहा है मुख्य रूप से देहरादून की जिलाधिकारी सोनिका एसएसपी देहरादून दिलीप सिंह कुँवर जल विभाग के अधिकारी पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और विशेष रूप से सुलभ स्वच्छता के लोगों ने बिहारी महासभा के इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और सभा को मदद की  ।।

टपकेश्वर घाट पर आएंगे कई वीआईपी

महासभा के सचिव ने बताया कि टपकेश्वर घाट पर उत्तराखंड सरकार के कई कैबिनेट मंत्री और पूर्वांचल मूल के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे जो छठ माता को  अर्द्ध प्रदान करेंगे एवं धार्मिक भावना से छठ पूजा में शिरकत करेंगे इसके अलावा कई विभागीय अधिकारी जो स्थानीय उत्तराखंड के रहने वाले हैं इस बार वह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे ।।

छठ पूजा से जुड़ रहे हैं कई स्थानीय लोग

छठ पूजा में पूरे देश भर में लोगों की आस्था देखने को मिल रही है उत्तराखंड में अब स्थानीय स्तर पर गढ़वाल एवं कुमाऊं जौनसार बाबर से भी लोग इस पूजा में जुड़ने लगे हैं मन्नत मांगने के बाद जिसके घर में पुत्र की प्राप्ति हुई है या जिनकी मनोकामना छठ माता ने पूरी की है उस परिवार के लोग अब धीरे-धीरे छठ कार्यक्रम से जुड़ने लगे छठ के महत्व को देखते हुए गढ़वाल कुमाऊं जौनसार बावर हर जगह के लोग छठ महाव्रत से जुड़ने लगे है । छठ पूजा का आज दूसरा दिन है और इसे खरना के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रती घर पर ही खास प्रसाद तैयार करते हैं और पूरे दिन निराहार रहकर छठ मैया की पूजा करते हैं और व्रत के सफलता पूर्वक पूरा होने की प्रार्थना करते हैं …

खरना से शुरू होता है 36 घंटे का निर्जला उपवास

खरना में छठ मैया के लिए विशेष प्रसाद तैयार किया जाता है। इससे पहले कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय के साथ ही छठ महापर्व की विधिवत शुरुआत 28 अक्टूबर को हो गई है। खरना के दिन का छठ पर्व में बड़ा महत्व है। खरना के समय व्रती नया वस्त्र धारण कर गुड़ और चावल से बनी खीर का सेवन करते हैं, जिसके साथ ही निर्जला उपवास शुरू होता है, जो करीब 36 घंटे का होता है। इसके प्रसाद का विशेष महत्व है, जिसका सेवन करना हर किसी के लिए अनिवार्य होता है। शनिवार को खरना के बाद रविवार को डूबते सूर्य को और सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

कद्दू की सब्जी खाने की है परंपरा

व्रतियों ने दिन में कद्दू की सब्जी और चावल खाकर पूजा की शुरुआत की जिसका समापन सोमवार, अर्थात षष्ठी तिथि के दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य के साथ होगा। नहाय-खाय के दिन व्रती के साथ ही घर के बाकी सदस्य भी कद्दू की सब्जी खाते हैं। गांवों में कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जिनके यहां छठ पर्व नहीं होता है। ऐसे लोगों के यहां जिनके यहां छठ होता है, उनके यहां से कद्दू की सब्जी देने की प्रथा है। कई जगहों पर कद्दू के साथ चना दाल खाने की भी परंपरा है।

ऐसे करते हैं छठ मैया के लिए प्रसाद की तैयारी

नहाय-खाय वाले दिन से ही छठ का प्रसाद बनाने की तैयारी शुरू की जाती है। प्रसाद के लिए गेहूं और चावल की सफाई तो हालांकि पहले ही कर ली जाती है। लेकिन, उसे धोकर सुखाने, पीसने और उसके बाद उससे प्रसाद बनाने की तैयारी आज ही के दिन से शुरू होती है। व्रती के साथ घर के सदस्य मिलकर इसकी तैयारी करते हैं। छठ का प्रसाद बनाने के लिए चूल्हा और बर्तन बिल्कुल अलग होता है। इतना ही नहीं, प्रसाद बनाने में जो कोई भी साथ देता है उसके लिए भी लहसुन, प्याज इत्यादि खाना वर्जित होता है। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो नहाय-खाय के दिन ही छठ के निमित्त बाजार से खरीदने वाले सामान जैसे कि टोकरी, फल, सब्जियां खरीदते हैं।

खरना के लिए ऐसे किया जाता है प्रसाद तैयार

छठ पर्व के दूसरे दिन को खरना या लोहंडा के नाम से जाना जाता है। कार्तिक महीने के पंचमी पर व्रती पूरे दिन व्रत रखते हैं। सूर्यास्त से पहले पानी की एक बूंद तक नहीं ग्रहण करते हैं। यह प्रसाद व्रती के द्वारा ही बनाया जाता है जो विशेष रूप से नए चूल्हे पर ही बनाया जाता है। नहाय-खाय के दूसरे दिन होने वाले खरना के दिन भी व्रती पूरे दिन व्रत रखते हैं और केवल एक बार शाम को भोजन करते हैं। शाम को व्रती भगवान सूर्य का पूजन कर प्रसाद अर्पित करते हैं। शाम को चावल, गुड़ और गन्ने के रस बने रसियाव-खीर को खाया जाता है। खाने में नमक और चीनी का उपयोग नहीं किया जाता है। खास ध्यान यह भी रखना होता है कि एकांत में रहकर भोजन ग्रहण किया जाए। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती अपने सभी परिजनों को ‘रसियाव रोटी’ का प्रसाद देते हैं। चावल का पिठ्ठा और घी लगी रोटी भी प्रसाद में दी जाती है। इसके बाद अगले 36 घंटों के लिए व्रती निर्जला व्रत रखते हैं। मध्य रात्रि को व्रती छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद ठेकुआ बनाती हैं।

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Author: nirbhiknazar

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