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शराब से धामी सरकार का इस साल का टारगेट ‘3600’ करोड़ पूरा, अगले साल कमाई होगी 4000 करोड़ ?

देहरादून: CM पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने इस साल शराब से अपने 3600 करोड़ रूपये कमाने का लक्ष्य पूरा कर लिया.आज Cabinet की बैठक में इसको अगले Financial Year (2023-2024) के लिए 400 करोड़ बढ़ा के 4000 करोड़ रूपये तय कर दिया गया.खेलों के विकास के लिए हर बोतल से 3 रूपये बतौर `सेस’ (ये भी एक Tax ही है) लेने और मौजूदा Excise Policy को ही आगे बढ़ाने का फैसला भी मंत्रिमंडल ने लिया.आबकारी सचिव हरिचन्द्र सेमवाल ने दावा किया कि नई आबकारी नीति से UP के मुकाबले Regular Brands महज 20 रूपये के आसपास ही महंगे होंगे.इससे तस्करी पर अंकुश लग जाएगा.अब ये देखा जा रहा है कि मुख्यमंत्री Excise महकमे के उन अफसरों को ले के क्या कदम उठाएंगे, जो DEO की मलाईदार कुर्सी के लिए DC (उपायुक्त) पर Promotion को Forgo (छोड़ देना) कर रहे.कुछ अन्य अफसर भी इस Trend को अपनाने की दिशा में हैं.इनमें दागी चेहरे भी हैं.

Excise Secretary हरिचन्द्र ने कहा,`अभी तक 3300 करोड़ रूपये का राजस्व मौजूदा वित्तीय वर्ष में आ चुका है.अभी 8-10 दिन बचे हुए हैं.बचे हुए 300 करोड़ रूपये भी आने तय हैं.लक्ष्य हासिल करने में सफलता को देख के ही सरकार ने तकरीबन 13 फ़ीसदी का इजाफा नए Target में किया है.नई पालिसी से Regular Brands (Blenders Pride-Signature-Royal Stag-Royal Challange-8 PM और अन्य इसी किस्म के ब्रांड्स की कीमत पहले के मुकाबले कम होंगे. खास तौर पर UP के मुकाबले इन ब्रांड्स की कीमत अब 20 रूपये के आसपास ही अधिक होगी.पहले ये अंतर 150 रूपये तक रहता था.इससे UP से शराब की Smuggling को बढ़ावा मिलता था.

ये बात दीगर है कि हरियाणा और दिल्ली-पंजाब के मुकाबले उत्तराखंड में शराब बहुत महँगी बनी रहेगी.इससे खतरा अधिक नहीं रहेगा.असली चुनौती तस्करी के जरिये UP से ही मिलती रही है.ये भी फैसला Cabinet में हुआ कि जो दुकानदार चाहते हैं कि दुकान उनके पास बनी रहे, उनको देसी में 15 और English Brands में 10 फ़ीसदी अधिभार पिछली बार के मुकाबले अधिक देना होगा.पुष्कर की शराब Policy को काफी व्यावहारिक और शराब माफिया पर काफी हद तक लगाम लगाने वाला माना जा रहा है.

पुष्कर के सामने एक और चुनौती अब Excise महकमे के अफसरों को कसने की और चल रहे तगड़े खेल को बंद करने की है.कोई भी अफसर और कर्मचारी प्रोन्नति के लिए जान लगा देते हैं.आन्दोलन तक करते हैं.Excise महकमे में उल्टी नदी बह रही.यहाँ DEO की मलाईदार कुर्सी को छोड़ने के लिए AC (सहायक आयुक्त) तैयार ही नहीं हैं. वे DC (उपायुक्त) की Class-1 के ओहदे को भी छोड़ रहे हैं.चम्पावत में तपन पांडे दो बार DC पद पर प्रोन्नति को Forgo कर चुके हैं.हरिद्वार में DEO बने प्रभाशंकर मिश्र DC है. वह फिर भी निचले पद का लोभ किए हुए है.माना जाता है कि DEO की कुर्सी वैसी ही होती है जैसे IAS में DM और IPS में SSP की.ये खेल करोड़ों का होता है.ऐसा समझा जाता है.

इसके चलते ही या तो Excise महकमे के अफसर DEO के बजाए DC बन के राजी नहीं. या फिर सेटिंग के बूते DC हो के भी AC की DEO वाली कुर्सी पर बैठे हुए हैं. वे प्रोन्नति Forgo करने से चूक या हिचक नहीं रहे.नियम ये कहता है कि Forgo वालों को Field Posting नहीं दी जानी चाहिए.उनको अपने बैच में Seniority के मामले में भी नीचे रखना होता है.अभी 2 और पद DC के खाली हो रहे.उनके लिए DPC AC से होनी है.अंदरखाने शोर है कि DPC की लाइन वाले फिर Forgo करने के लिए तैयार हैं.इससे उन अफसरों के हक़ मारे जाएंगे, जो AC हैं और सिर्फ वही DEO बनने के अधिकारी हैं.CM पुष्कर इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं, देखने वाली बात होगी.वह महकमे में सफाई में जुटे हुए हैं.शराब माफिया तंत्र को काफी चोट और झटके दे रहे.

शराब की हर बोतल से खेलों के विकास और खिलाड़ियों की मदद के लिए 3 रूपये लिए जाएँगे.राज्य में 38वें National Games होने हैं.ये एक किस्म से National Olympics सरीखे होते हैं.इसमें भारत सरकार से वित्तीय मदद मिलने के बावजूद खर्च का बहुत बड़ा हिस्सा उत्तराखंड सरकार को अपनी जेब से देना है.इसके लिए मुख्यमंत्री ने सरकारी खजाने को मजबूती देने की खातिर सेस को बढ़ाने का फैसला किया.

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Author: nirbhiknazar

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