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राजधानी देहरादून के रिहाइशी इलाकों मे अब नहीं मिलेगी, नए हॉस्टल और स्कूल खोलने की अनुमति !

देहरादून: दून में शहरीकरण की रफ्तार अनियंत्रित तरीके से बढ़ रही है। बढ़ती आबादी के साथ हर तरह के आवास की मांग भी बढ़ी है। घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्रों में आवास से लेकर तमाम तरह के निर्माण अनियोजित तरीके से खड़े किए जा रहे हैं। वर्ष 2005-2025 का मौजूदा मास्टर प्लान इस सब पर रोक लगा पाने में नाकाम साबित हुआ। अब उम्मीद वर्ष 2041 तक के जीआइएस आधारित डिजिटल मास्टर प्लान से है। इस क्रम में आवासीय क्षेत्रों में बसावट को नियोजित करने के लिए कई कदम भी बढ़ाए गए हैं। कुछ प्रकृति के नए निर्माण प्रतिबंधित किए गए हैं तो कुछ के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई और अधिकतम प्लाट एरिया तय किया गया है। साथ ही किफायती आवास की अवधारणा को बल देने के लिए आवासीय क्षेत्र में अफोर्डेबल हाउसिंग (किफायती आवास) के जोन भी आरक्षित किए गए हैं। डिजिटल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के मुताबिक घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्रों को आर-1 श्रेणी में रखा गया है। यहां नए हास्टल व स्कूल के निर्माण को प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, पहले से निर्मित हास्टल/स्कूल में मरम्मत आदि समेत पूर्व स्वीकृत हास्टल का निर्माण किया जा सकता है। इसके साथ ही यहां निजी कार्यालय का निर्माण अधिकतम 45 वर्गमीटर के क्षेत्रफल में किया जा सकता है। इसके अलावा कई निर्माण में सड़क की चौड़ाई का नियम लागू किया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि भवनों की अधिकतम ऊंचाई ग्राउंड व दो मंजिल होगी।

इस तरह के निर्माण को सीधे अनुमति

निजी घर, सरकारी आवासीय योजना, सरकारी आवास, रीटेल शाप, डेली नीड्स शाप, सेवा संबंधी उद्योग, आंगनबाड़ी केंद्र, पशुओं की डिस्पेंसरी/क्लिनिक, बैंक/एटीएम, पुलिस थाना/बूथ, पब्लिक लाइब्रेरी, शिशु पालन केंद्र, सार्वजनिक शौचालय, धार्मिक प्रतिष्ठान।

इन पर प्रतिबंध के साथ सीधे अनुमति

दुग्ध कलेक्शन सेंटर (न्यूनतम 18 मीटर चौड़ी सड़क जरूरी), क्लिनिक/डिस्पेंसरी (अधिकतम 45 वर्गमीटर प्लाट पर ही निर्माण की अनुमति), सरकारी कार्यालय (18 मीटर चौड़ी सड़क जरूरी), काटेज और घरेलू उद्योग (अधिकतम 200 वर्गमीटर के प्लाट पर ही अनुमति), निजी कार्यालय (45 वर्गमीटर से अधिक के प्लाट पर अनुमति नहीं)

घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इन निर्माण पर एमडीडीए बोर्ड की अनुमति जरूरी

  • हास्पिटल/नर्सिंग होम/डायग्नोस्टिक सेंटर/अन्य चिकित्सा इकाई (अधिकतम 750 वर्गमीटर प्लाट एरिया पर ही अनुमति)
  • सामुदायिक केंद्र (न्यूनतम 18 मीटर चौड़ी सड़क जरूरी)
  • मल्टी स्टोरी पार्किंग (न्यूनतम 18 मीटर चौड़ी सड़क जरूरी)
  • अनाथाश्रम/वृद्धाश्रम/विशेष बच्चों के आवास (न्यूनतम 18 मीटर चौड़ी सड़क जरूरी)
  • स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स/काम्प्लेक्स
  • जिम्नेजियम
  • क्लब हाउस स्वीमिंग पूल के साथ
  • सरकारी रैन बसेरे
  • बस स्टाप
  • टैक्सी/आटो स्टैंड (न्यूनतम 18 मीटर चौड़ी सड़क जरूरी)
  • पार्किंग क्षेत्र
  • इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग बूथ
  • सरकारी/अर्द्ध सरकारी सांस्थानिक गतिविधियां और जनहित की गतिविधि संबंधी प्रतिष्ठान

खुले रिहायशी क्षेत्रों (आर-2) में इन्हें सीधे अनुमति (प्रमुख निर्माण)

प्लाटिंग, ग्रुप हाउसिंग, टाउनशिप (आवासीय), हास्टल (अधिकतम 1000 वर्गमीटर प्लाट एरिया में), स्कूल (न्यूनतम 12 मीटर चौड़ी रोड जरूरी), फायर स्टेशन (न्यूनतम 24 मीटर रोड जरूरी), मनोरंजन सदन (न्यूनतम 18 मीटर चौड़ी रोड जरूरी), स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स (न्यूनतम 24 मीटर चौड़ी रोड जरूरी), खेल का मैदान, जिम्नेजियम, स्वीमिंग पूल।

खुले क्षेत्रों में इनके लिए बोर्ड को अनुमति (सड़क व ग्राउंड कवरेज के प्रतिबंध के साथ)

शापिंग माल, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप, कालेज, स्टेडियम, होटल/लाज, बड़े हास्टल, हास्पिटल/नर्सिंग होम, धर्मशाला, गोल्फ कोर्स/रेस कोर्स आदि

किफायती आवासीय जोन में चार मंजिल की अनुमति

बढ़ती आबादी के साथ आमजन के लिए किफायती आवासीय योजनाएं विकसित करने के लिए पहली बार किफायती आवासीय जोन तय किए गए हैं। प्रमुख रूप से ऐसे जोन हरभजवाला, ईस्टहोप टाउन, पेलियो आदि क्षेत्रों में तय किए गए हैं। यहां अधिकतम चार मंजिल भवन खड़े किए जा सकेंगे। ऐसे क्षेत्र में निजी घर बनाने की सीधे अनुमति नहीं होगी, बल्कि एमडीडीए बोर्ड से अनुमति लेनी पड़ेगी।

उत्तराखंड इंजीनियर्स एंड आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डीएस राणा ने कहा कि आबादी के दबाव से जूझ रहे क्षेत्रों को राहत देने के लिए मास्टर प्लान में बेहतर प्रविधान किए गए थे, लेकिन अधिकारियों को धरातल पर भी गंभीरता के साथ नियमों का पालन कराना होगा।

21 तरह के निर्माण एमडीडीए सीधे करेगा पास, 14 पर बोर्ड लेगा निर्णय

डिजिटल मास्टर प्लान में की गई व्यवस्था के मुताबिक घनी आबादी वाले क्षेत्रों में 21 तरह के निर्माण एमडीडीए सीधे पास कर सकेगा। वहीं, 14 तरह के निर्माण के लिए एमडीडीए बोर्ड से अनुमति लेनी पड़ेगी।

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Author: nirbhiknazar

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