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काजू के खेत में खुदाई करते समय मिला 17वीं शताब्दी का ‘खजाना’, म्यूजियम में रखकर किसान को क्रेडिट देगा पुरातत्व विभाग

पणजी : कभी कभी आपको सड़क किनारे या किसी ऐतिहासिक स्थान पर कुछ ऐसी अद्भुत चीजें मिल जाती हैं, जो बेशकीमती होती हैं। ऐसी ही कुछ उत्तरी गोवा के नानोदा बंबर गांव में देखने को मिला, जहां विष्णु श्रीधर जोशी नाम का एक किसान अपने काजू के बागान में साफ सफाई और खुदाई का काम कर रहा था। उसी दौरान किसान की नजर मिट्टी में दबे एक बर्तन पर पड़ी। किसान का कहना है कि जब उसने और गहराई तक खुदाई की और मिट्टी हटाकर देखा तो उसे एक बर्तन मिला, जिसमें बीते युग के कई सिक्के थे।

17 वीं शताब्दी के बताए जा रहे तांबे के सिक्के

बताया जाता है कि किसान विष्णु श्रीधर जोशी को खुदाई में मिले सिक्कों की संख्या 832 है और ये तांबे के हैं। माना जाता है कि ये सिक्के 16वीं या 17वीं शताब्दी के आसपास गोवा में निर्मित किए गए होंगे, जब गोवा पुर्तगाली शासन के अधीन था। किसान की ओर से की गई इस दुर्लभ खोज को लेकर गोवा के पुरातत्व विभाग की ओर से स्टडी की गई, जिसमें सामने आया कि किसान को मिले सिक्के पुर्तगाली शासन के शुरुआती वर्षों के दौरान व्यापार संबंधों, वाणिज्य और गोवा के आर्थिक इतिहास की जानकारी देते हैं।

किसान ने अधिकारियों को दी सूचना, पुरातत्व टीम ने जब्त किए सिक्के

इसे लेकर किसान का कहना है कि इतनी भारी संख्या में सिक्के मिलने के बाद वह हैरान था कि आखिर इन सिक्कों का क्या किया जाए। कुछ भी समझ नहीं आया, जिसके बाद वह इन सिक्कों को अपने घर ले आया और गांव के पंच से मामले की जानकारी साझा करते हुए सरकारी अधिकारियों को इस घटना की सूचना दी गई। वहीं, बीते बुधवार को गोवा राज्य के पुरातत्व मंत्री सुभाष फाल देसाई और विभाग के अधिकारियों की एक टीम ने गांव का दौरा किया और सभी सिक्कों को अपने कब्जे में ले लिया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि काजू के खेत में मिले इस खजाने पर स्टडी चल रही है। ये खजाना गोवा के मुद्राशास्त्रीय इतिहास के बारे में और भी जरूरी जानकारी दे सकता है।

पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ. नीलेश फाल देसाई ने कहा कि अभी पहली नजर में सिक्कों पर बने अक्षरों और प्रतीकों से ऐसा प्रतीत होता है कि सिक्के 16वीं या 17वीं शताब्दी में पुर्तगाली शासन के शुरुआती वर्षों के दौरान जारी किए गए थे। सामने आए कुछ सिक्कों पर एक तरफ एक क्रॉस और एक वर्णमाला भी देखी जा सकती है, जो उस समय शासन करने वाले किसी राजा के शुरुआती अक्षर के रूप में हो सकती है, जिसके शासन काल के बीच ये सिक्के जारी किए गए होंगे। हालांकि, विशेषज्ञों की ओर से उस समय व्यापारिक व्यापार संबंधों को समझने के लिए इस बात का पता लगाया जा रहा है कि ये सिक्के कब बनाए और प्रसारित किए गए थे।

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Author: nirbhiknazar

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