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कौन हैं छठी मइया? जानिए उनकी उत्‍पत्ति से जुड़ी रोचक कहानी, और क्यों की जाती है …छठ पूजा

न्यूज़ डेस्क : छठ बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्‍तर प्रदेश का बड़ा पर्व है. छठ पूजा महापर्व का आज तीसरा दिन है. इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्‍य दिया जाता है. आज व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं. छठ पर्व प्रकृति से जुड़ाव का पर्व है. इसमें सूर्य देव को अर्घ्‍य दिया जाता है और छठी महया की पूजा की जाती है. मान्‍यता है कि पूरी शुद्धता, पवित्रता और सच्‍चे मन से छठ व्रत पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.  छठ मइया की उत्‍पत्ति की कहानी के बारे में कम लोग जानते हैं. आइए जानते हैं कि छठी मइया कौन हैं और इनकी उत्‍पत्ति की कहानी क्‍या है?

कौन है छठी मैया?

छठ के इस महापर्व में छठी मैया और भगवान सूर्य की पूजा-उपासना की जाती है. पौराणिक कथा के अनुसार छठी मैया ब्रह्मदेव की मानस पुत्री और भगवान सूर्य की बहन हैं. छठी मैया को संतान प्राप्ति की देवी कहा जाता है, वहीं सूर्य देव को शरीर का देवता कहा गया है. पुराणों में यह मान्यता है कि जब ब्रह्मा जी जब सृष्टि की रचना कर रहे थे तब उन्होंने स्‍वयं को दो भाग में बांट दिया था. इसमें एक भाग को पुरुष और दूसरे भाग को प्रकृति के रूप में बांटा. इसके बाद प्रकृति ने भी अपने आप को 6 भाग में बांट दिया था, जिसमें से एक मातृ देवी हैं. छठी मइया मातृ देवी की छठवी अंश है. छठी मइया को प्रकृति की देवी और संतान देन वाली देवी के रूप में जाना जाता है.

भगवान कार्तिकेय हैं पति 

पुराणों के अनुसार छठी मइया के पति भगवान कार्तिकेय है. भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के पहले पुत्र एवं गणेश और अशोक सुंदरी के बड़े भाई हैं. श्रीमद् भागवत महापुराण के अनुसार संसार या प्रकृति के छठे अंश से प्रकट हुईं छठी मइया अन्‍य अंशों में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और लोकप्रिय है.

इसलिए की जाती है छठ पूजा

छठ पूजा व्रत को बहुत हिंदू धर्म का सबसे कठिन व्रत माना गया है क्‍योंकि इसमें 36 घंटे तक निर्जला रहना होता है. साथ ही छठी मइया की उपासना को कठिन के साथ-साथ बहुत फलदायी मानी गई है. छठ व्रत करने से संतान को लंबी उम्र और सेहत मिलती है. साथ ही छठी मइया और सूर्य देव पूरे परिवार की रक्षा करते हैं. महाभारत काल में जब अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में में पल रहे बच्चे का वध कर दिया था, तब भगवान श्रीकृष्‍ण ने उत्‍तरा को छठी माता का व्रत रखने की सलाह दी थी.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. हम इसकी पुष्टि नहीं करते है) 

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Author: nirbhiknazar

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