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उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पर मचा घमासान, भड़के असदुद्दीन ओवैसी, हरीश रावत ने भी कसा तंज

देहरादून/लक्सर: उत्तराखंड की धामी सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल विधानसभा में पास कर दिया है. अब इसे जल्द ही प्रदेश में लागू किये जाने की तैयारी है. उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित होने के बाद देशभर में इसकी चर्चा हो रही है. राजनैतिक दलों की ओर से भी उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. असदुद्दीन ओवैसी यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पर भड़के हुए हैं. उन्होंने कहा इस बिल के जरिये हिंदू कोड को मुसलमानों पर भी थोपा जा रहा है.उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने कई सवाल भी खड़े किये हैं.

असदुद्दीन ओवैसी ने उठाये कई सवाल: असदुद्दीन ओवैसी ने कहा उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल सभी के लिए लागू एक हिंदू कोड के अलावा और कुछ नहीं है. उन्होंने कहा सबसे पहले, हिंदू अविभाजित परिवार को छुआ नहीं गया है क्यों? यदि आप उत्तराधिकार और विरासत के लिए एक समान कानून चाहते हैं, तो हिंदुओं को इससे बाहर क्यों रखा गया है? क्या कोई कानून एक समान हो सकता है यदि वह आपके राज्य के अधिकांश हिस्सों पर लागू नहीं होता है?

उन्होंने कहा द्विविवाह, हलाला, लिव-इन रिलेशनशिप चर्चा का विषय बन गए हैं, लेकिन कोई यह नहीं पूछ रहा कि हिंदू अविभाजित परिवार को इससे क्यों बाहर रखा गया है. कोई नहीं पूछ रहा कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी. उन्होंने कहा इस बिल में अन्य संवैधानिक और कानूनी मुद्दे भी हैं. आदिवासियों को बाहर क्यों रखा गया है? यदि एक समुदाय को छूट दे दी जाए तो क्या यह एक समान हो सकता है? अगला सवाल मौलिक अधिकारों का है. मुझे अपने धर्म और संस्कृति का पालन करने का अधिकार है, यह विधेयक मुझे एक अलग धर्म और संस्कृति का पालन करने के लिए मजबूर करता है. हमारे धर्म में, विरासत और विवाह धार्मिक प्रथा का हिस्सा हैं, हमें एक अलग प्रणाली का पालन करने के लिए मजबूर करना अनुच्छेद 25 और 29 का उल्लंघन है.

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा यूसीसी का संवैधानिक मुद्दा है. मोदी सरकार ने SC में कहा कि UCC केवल संसद द्वारा अधिनियमित किया जा सकता है. यह विधेयक शरिया अधिनियम, हिंदू विवाह अधिनियम, एसएमए, आईएसए आदि जैसे केंद्रीय कानूनों का खंडन करता है. राष्ट्रपति की सहमति के बिना यह कानून कैसे काम करेगा? एसएमए, आईएसए, जेजेए, डीवीए आदि के रूप में एक स्वैच्छिक यूसीसी पहले से ही मौजूद है. जब अंबेडकर ने स्वयं इसे अनिवार्य नहीं कहा तो इसे अनिवार्य क्यों बनाया गया?

हरीश रावत ने भी कसा तंज: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस नेता हरीश रावत ने भी यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पर तंज कसा है. हरीश रावत ने कहा ‘ उत्तराखंड कॉमन सिविल कोड बिल पारित हो गया है, इसको आवश्यक संवैधानिक अनुमति भी मिल जाएगी. एक लक्ष्य और एक उपलब्धि साफ है. उन्होंने कहा लोकसभा चुनाव में बीजेपी को एक मुद्दा मिल गया है. लोकसभा में बीजेपी यूसीसी को उपलब्धि के रूप में गिनाएगी. इसे पास कराने के बाद धामी भी एक छत्रप के रूप में स्थापित हो गये हैं. उन्होंने कहा अब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की उम्मीद लगाये लोग अंगूर खट्टे हैं कहकर यूसीसी का प्रचार प्रसार करेंगे.

तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली अतिया साबरी ने समान नागरिकता कानून का स्वागत किया है. उन्होंने कहा सरकार का यह सराहनीय कदम है. इससे पति-पत्नी के जिंदा रहते दूसरी शादी अनिवार्य नहीं होगी. दोनों को समान अधिकार होंगे. उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया है.
आतिया साबरी ने कहा अभी तक मुस्लिम धर्म में शादी के मामलो के शरिया के अनुसार सजा व नियम तय होते हैं. अभी तक हिंदू, मुस्लिम, सिख व ईसाईयों मे शादियों व सिविल मामलों में अलग कानून हैं, लेकिन समान नागरिकता संहिता कानून लागू होने पर सभी को समान अधिकार होंगे.

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Author: nirbhiknazar

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