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चारधाम यात्रा के बीच फिर धधके उत्तराखंड के जंगल…!

देहरादून: आसमान से बरस रही आफत उत्तराखंड के जंगलों में कहर बनकर टूट रही है. मौसम विभाग के लाख आकलन के बाद भी प्रदेश में अभी तक उस तरह से बारिश नहीं हुई है, जो प्रदेश के जंगलों की आग को बुझा दे. आलम यह है कि 96 घंटे में 32 आग की घटनाएं रिकॉर्ड की जा चुकी हैं. प्रदेश में अभी भी जंगल कई जगह धधक रहे हैं.

उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाएं बढ़ीं: उत्तराखंड में साल 2023 नवंबर के बाद से प्रदेश के जंगल जलने शुरू हुए थे. इस साल अप्रैल के अंत में इनकी संख्या में काफी इजाफा हुआ था. मई आते-आते प्रदेश में जंगल इस कदर जले कि केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट को इसका संज्ञान लेना पड़ा. राज्य सरकार ने अपनी तरफ से लाख कोशिश की, लेकिन लगता नहीं है कि अभी भी वह कोशिश पूरी हो पाई है. सरकार चारधाम में व्यस्त है और इधर जंगल धू धू कर जल रहे हैं. 20 तारीख को 23 जगह पर आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं. इनमें प्रमुख रूप से रानीखेत के रिहायसी इलाकों से होते हुए आग कई ऐसी जगह पर पहुंच गई थी, जहां पर बुझाने के लिए वन विभाग को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा. ऐसा नहीं है कि आग उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में ही लगी थी, बल्कि गढ़वाल के भी बड़े हिस्से में इसने अपना प्रकोप दिखाया था. उत्तराखंड में वनाग्नि से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है.

यहां लगी आग: 20 मई को उत्तराखंड के सिविल क्षेत्र में ही 8 वनाग्नि की घटनाएं रिकॉर्ड की गई थीं. जबकि आरक्षित वन क्षेत्र में 15 घटनाएं रिकॉर्ड हुई थीं. वन विभाग ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रखी है, लेकिन वनाग्नि की की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. यही कारण है कि 21 मई को भी 9 जगहों पर आग ने अपना विकराल रूप दिखाया. इसमें रानीखेत, अल्मोड़ा, गढ़वाल के नरेंद्र नगर, मसूरी और पौड़ी गढ़वाल के लैंसडाउन वन प्रभाग शामिल थे.

चारधाम यात्रा के दौरान वनाग्नि बनी मुसीबत: उत्तराखंड सरकार इस वक्त चारधाम यात्रा की व्यवस्था में पूरी तरह से व्यस्त है. कोशिश यही है कि किसी भी तरह से श्रद्धालुओं को कोई भी दिक्कत ना आए. इसके बावजूद सरकार द्वारा वनाग्नि को शांत करने की कोशिशों के बाद भी वनों की आग नहीं बुझ पा रही है. वनाग्नि की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है. हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले तीन दिनों में उत्तराखंड में गर्मी का प्रकोप कम होगा और वह वनाग्नि की घटनाएं भी काम हो सकती हैं.

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Author: nirbhiknazar

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