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5 दशक के पूर्व का बना है कैमूर व रोहतास जिले को जोड़ने वाली दुर्गावती नदी पुल,पड़ी दरार, अनियमितता की चढ़ गया भेंट

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– प्रतिदिन इस पुल से गुजरते है सैकड़ो छोटे बड़े वाहन
– समय रहते पुल के पथ की मरम्मत नहीं की गई तो बंद हो सकता आवागमन

भभुआ कैमूर(बंटी जायसवाल)। रामपुर प्रखंड के सबार गांव के पास कैमूर को रोहतास से जोड़ने वाली दुर्गावती नदी पर बने पुल के पथ में दरार पड़ गई है। समय रहते पुल के पथ की मरम्मत नहीं की गई तो किसी भी समय आवागमन बंद हो सकता है।बरसात के दिनों में पुल पर पानी के जलजमाव से झील सा नजारा बन जाता है। उभरे दरार में पानी भर जाते है। शायद अंदर भी जाता होगा। पुल के पथ में पड़े दरार पड़ कर धंस गया। पुल का पथ में कई जगहों पर दरारें पड़ी हुई है और का छड़ भी दिख रहा है। जिससे पुल के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

जानकर सूत्रो के अनुसार, यह दुर्गावती नदी पुल सोन उच्चस्तरीय नहर के सिंचाई विभाग ने करोड़ों की लागत से 1966 के अकाल के बाद का बनाया है.इस पुल का उद्घाटन 1971 में बनने के बाद किया गया था. उक्त पुल के नीचे दुर्गावती नदी की धारा बहती है। जो कभी भी सुख नहीं सकती है।बीच में सोन उच्चस्तरीय नहर अपने स्थान से निकल कर गंतव्य स्थान तक जाता है।इसके ऊपर पुल का सड़क है। यह पुल 200 मीटर लंबा है। इस पुल में तीन फाल बनाए गए है।जिससे सोन उच्चस्तरीय नहर सिंचाई विभाग द्वारा दुर्गावती नदी में औसत से ज्यादा पानी होने पर गिराया जाता है। जो नदी से होते हुए पानी रामगढ क्षेत्र में जाता है ताकि वहाँ पर भी सिचाई हो सके।

दुर्गावती नदी पुल से नदी में नहर का गिरता पानी

# पांच दशक पूर्व का बना है पुल
 रामपुर प्रखंड से 12 किमी की दुरी पर सबार के दुर्गावती नदी से रोहतास के चेनारी जाने के लिए इस पुल का निर्माण पांच दशक पूर्व सिंचाई विभाग के द्वारा किया गया था।इस पुल के निर्माण से दो जिलो का मिलान हो गया। वही दूरियां कम हो गई।लोगो को आवागमन में काफी सुविधा मिली।कैमूर से रोहतास जाने के लिए हजारो लोगो इस पुल का प्रतिदिन उपयोग करते है।  

#बड़ी संख्या में आते जाते है छोटे बड़े व भारी वाहन
 जानकार सूत्रों के अनुसार, इस पुल का निर्माण सिंचाई विभाग के वाहनों को आने जाने के लिए किया गया था।लेकिन बाद में इस पर सभी गाड़ियों का परिचालन प्रारंभ हो गया।पुल के निर्माण के होने के बाद कई वर्षो तक भारी वाहन नहीं जाते थे।इस दौरान छोटी गाड़िया ही आया जाया करती थी। अब तो छोटी गाड़ियों के अलावा भारी वाहन भी आने जाने लगे।जो आज भी चलते है।इन भारी वाहनो के लगातार आवाजाही से इस पुल की हालत गंभीर होती दिख रही है।अब इस पुल के पथ पर गड्ढे व दरारें पड़ गई है। 

#दो साल पहले ही पुल के पथ की हुई थी पीसीसी ढलाई
ग्रामीण नन्हू मल्लाह सहित कई लोगों ने बताया कि दो साल पहले जब इस पुल के पथ में दरार पड़ने लगी थी और पथ बुरी तरह से क्षतिग्रस्त होने लगा तो इसकी मरम्मत की गई थी। मरम्मत में इस पुल के पथ की पीसीसी ढलाई लाखों की लागत से नीचे छड़ डाल कर कराई गयी थी। लेकिन पुल के पथ की मरम्मत होने के 6 माह बाद ही दरारें पड़ने लगी। जो दो साल में कई जगहों पर पुल के पथ में दरार पड़ गया और धंस गया है।

इसका कारण पीसीसी ढलाई में अनियमितता की गई। सही तरीके से मेटेरियल संवेदक द्वारा नहीं लगाया गया था। लोगों ने उस समय भी मरम्मत में अनियमितता की शिकायत की गयी थी। लेकिन सिंचाई विभाग के पदाधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। जिसका नतीजा हुआ कि यह पुल के पथ में पीसीसी ढलाई धंस कर छड़ दिखने लगा है। एक जगह ही कई जगहों पर ऐसा देखा जा सकता है।

#बढ़ रहा है पुल के पथ का दरार-  इस पुल से गुजरने वाले कई यात्रियों व राहगीरों ने बताया कि इस पुल पर कुल 8 जगहों के प्वाइंट्स है। जिसमें 5-6 जगहों पर दरार पड़ गई है।जो लगातार भारी वाहन के परिचालन से बढ़ती ही जा रही है। वर्षा होने पर तो इस पुल पर झील सा नजारा बन जाता है।यदि इस पुल की मरम्मत सिंचाई विभाग या पथ निर्माण विभाग द्वारा समय रहते नहीं करायी गई तो इस पुल की हालत बिगड़ सकती है। इसके बाद कभी भी आवागमन बंद होने की संभावना बन सकती है। अब देखना यह होगा कि कब तक सिंचाई विभाग के पदाधिकारी इस पुल की मरम्मत करा पाते है। 

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Author: nirbhiknazar

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