ब्यूरो रिपोर्ट
चमोली : सड़क के चौड़ीकरण की मांग को लेकर भराड़ीसैंण (गैरसैंण) विधान सभा भवन का घेराव करने जा रहे प्रदर्शनकारियों व पुलिस में तीखी झड़पे और धक्का-मुक्की हुई। पानी की बौछारों के बाद भी न मानने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया और इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की तरफ से पथराव भी किया गया। लाठीचार्ज व पथराव में 25 से अधिक आंदोलनकारी व पुलिस वाले घायल हुए हैं। सोमवार सुबह लगभग 9:30 बजे घाट व नंदप्रयाग क्षेत्र से बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वाहनों में सवार होकर गैरसैंण के लिए रवाना हुए। उत्तराखंड विधानसभा का घेराव करने के दौरान सोमवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। सीएम रावत ने इस झड़प के जांच के आदेश दिए हैं। बता दें कि चमोली जिले के नंदप्रयाग घाट मोटर मार्ग के चौड़ीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी अपना प्रदर्शन कर रहे थे। सीएम ने एक ट्वीट कर कहा कि गैरसैंण के समीप दीवालीखाल में घाट ब्लॉक के लोगों की ओर से किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों और पुलिस प्रशासन के बीच घटित घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इसको गंभीरता से लिया गया है।

ये है ग्रामीणो के प्रदर्शन करने का कारण
नंदप्रयाग -घाट के ग्रामीण डेढ़ लेन चौड़ी सड़क की मांग को लेकर पिछले 86 दिनों से आंदोलनरत हैं। 51 दिन से इनके क्रमिक अनशन के हो गए हैं। 1970 के दशक में यह सड़क बनी थी, लेकिन तब से चौड़ीकरण नहीं पाया। इस सड़क से 56 ग्राम पंचायतें जुड़ी है। तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने सड़क के चौड़ीकरण की घोषणा की थी, लेकिन नहीं बन पाई। थराली उप चुनाव में जीत के बाद सीएम त्रिवेंद्र रावत जब घाट में धन्यवाद रैली में शामिल हुए थे तो उन्होंने ग्रामीणों की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करने का ऐलान किया था, लेकिन इसके बाद भी सड़क का चौड़ीकरण नहीं हो पाया। इससे क्षेत्र के लोग आक्रोशित हैं। चमोली डीएम के अनुसार आंदोलनकारियों को काफी समझाने की कोशिश की गई और उनसे कानून व्यवस्था हाथ में न लेने की बार-बार गुजारिश की गई। आंदोलनकारियों पर पानी की बौछार भी की गई, इसके बावजूद वे नहीं माने। लगभग 350 आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर अस्थायी जेल भेजा गया, जहां बाद में उन्हें छोड़ दिया गया ।
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
रावत ने कहा, “संपूर्ण घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। ” जानकारी के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण की मांग को लेकर घाट ब्लॉक के प्रदर्शनकारी बजट सत्र के पहले दिन यहां विधानसभा घेराव के लिए निकले। रास्ते में दीवालीखाल में उन्होंने पुलिस की ओर से लगाए गए बैरीकेड हटा दिए जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प हो गयी थी। विधानसभा जाने पर अडे़ प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार की और हल्का लाठीचार्ज भी किया। इसके बाद भी प्रदर्शनकारी जुलूस की शक्ल में विधानसभा की ओर चलते गए जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
दिवालीखाल, गैरसैण की घटना के जांच के आदेश दिए जा चुके हैं।
मेरे द्वारा नंदप्रयाग-घाट मार्ग के चौड़ीकरण की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी।एक और विचारणीय बात ये है कि मैंने सल्ट दौरे के दौरान प्रदेश के विकासखंड मुख्यालय तक की सभी सड़कों को १.५ लेन चौड़ीकरण किए जाने की घोषणा की थी।
— Trivendra Singh Rawat (@tsrawatbjp) March 2, 2021
पुलिस पर बल प्रयोग करने का आरोप
पिछले दो माह से नंदप्रयाग घाट मोटर मार्ग के चौड़ीकरण की मांग कर रहे घाट व्यापार संघ के अध्यक्ष और आंदोलन के नेता चरण सिंह ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। वहीं जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने बताया कि दीवालीखाल से करीब 450 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि घटना की वीडियो के आधार पर उपद्रव करने वालों की पहचान की जा रही है और उसके आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा. उन्होंने कहा कि घटना में एक पुलिस सर्किल अधिकारी और एक महिला कांस्टेबल सहित छह से सात पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं।

सत्ताधारी बीजेपी ने भी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उत्तराखंड बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि यह घटना घटित नहीं होनी चाहिए थी क्योंकि मुख्यमंत्री पहले ही प्रदेश के सभी ब्लॉक मुख्यालयों को मुख्य सड़क से जोड़ने की सैद्धांतिक घोषणा कर चुके थे।
ग्रामीणों पर लाठीचार्ज के खिलाफ कांग्रेस का ऐलान
नंदप्रयाग-घाट सड़क निर्माण को लेकर आंदोलित ग्रामीणों पर पुलिस के लाठीचार्ज से कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मंगलवार को बजट सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेरेगी। कांग्रेस विधायक दल के उपनेता करन माहरा ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और गुस्सा पैदा करने वाली है। करन ने कहा कि ग्रामीण केवल अपनी सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। खुद सरकार उनसे दो बार वादा कर चुकी हैं कि सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा। सरकार को सोचना चाहिए कि दो दो बार वादे करने के बाद भी ग्रामीणों को आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है? आज अगर सीएम या सरकार के प्रतिनिधि ग्रामीणों से मिल लेते तो क्या हो जाता? कांग्रेस इस घटना की कड़ी निंदा करती है। मंगलवार को सदन में इस मुद़दे पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। जब तक ग्रामीणों को इंसाफ नहीं मिलता कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। इस घटना ने साबित कर दिया है कि सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है।