ब्यूरो रिपोर्ट
हरिद्वार: केंद्र सरकार के बाद राज्य सरकार भी हरिद्वार कुंभ के लिए एसओपी जारी कर चुकी है लेकिन ये SOP साधू संतों के गले भी नहीं उतर रही है। एसओपी में जहां तमाम भंडारों और सत्संग जैसे आयोजनों पर रोक लगाने की बात की गई है वहीं कुंभ के स्वरूप को भी छोटा करने का प्रयास किया गया है, जिससे सरकार पर विपक्ष तो हावी है ही इसके अलावा हरिद्वार मे साधू संतों ने भी मोर्चा खोल दिया है। सरकार ने कुम्भ समयावधि इसलिए घटाई है जिससे कोरोना महामारी ज्यादा न फैले, ऐसे में बैरागी अखाड़ा एक बार फिर एसओपी के विरोध में आ गया है।

बता दें कि, केंद्र सरकार की एसओपी के आधार पर राज्य सरकार ने अपनी अलग से कुंभ मेले के लिए एसओपी जारी की है। संतों ने एसओपी का विरोध किया है। संतों का सवाल है कि, जब देश के कई राज्यों में चुनाव हो रहे हैं और भीड़ लगाकर चुनाव प्रचार किया जा रहा है तमाम राजनीतिक पार्टियां रैली कर रही हैं तब कोरोना नहीं फैल रहा। साधुओं का ये भी कहना है की भारी संख्या में किसान भी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, पूरे देश मे कृषि क़ानूनों के खिलाफ हजारों की तादाद मे किसान प्रदर्शन कर रहे है जब वहां कोरोना वायरस का खतरा नहीं है, तो हरिद्वार कुंभ मेले में कोरोना कैसे फैल सकता है। उन्होंने कहा कि खतरे का बहाना बनाकर मेले को छोटा करने का प्रयास किया गया है। जिसे वे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। हरिद्वार के जगन्नाथ धाम में जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें पहुंचे बड़ी संख्या में संतों ने जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य को श्रद्धांजलि दी और एसओपी पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

आपको बता दें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने भी उत्तराखंड सरकार से कुंभ के मेले में भंडारे, कथा और प्रवचन के पंडाल लगाने की अनुमति देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि कोरोना से डरने की कोई जरूरत नहीं है। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा था कि प्रयागराज में करीब सवा महीने का माघ मेला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें न तो कोरोना का कोई प्रकोप बढ़ा और ना ही केरोना से कोई घटना घटी, जबकि लाखों की संख्या में श्रद्धालु माघ मेले में पहुंचे थे। उन्होंने सरकार से करोना से न डरने का आग्रह करते हुए हरिद्वार कुंभ में सभी तरह की व्यवस्थाएं दिए जाने की मांग की थी।