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तो क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की राजनीतिक छवि धूमिल करने के लिए हुआ गैरसैंण मे प्रदर्शन ?

ब्यूरो रिपोर्ट

देहारादून: आपको बता दें उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में सोमवार को घाट-नंदप्रयाग मोटर मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर आंदोलनकारी और पुलिस के बीच जो झड़प हुई थी, उसमें एक नया मोड़ आया है।  इस मामले में डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि आंदोलन में शामिल कुछ लोगों ने पुलिस को उकसाने की भी कोशिश की थी, ताकि ये विवाद और बढ़े, लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने काफी संयम से काम लिया है।  अभी मामले की जांच की जा रही है।  दोषियों की पहचान के लिए वहां आसपास लगे सीसीसीटी और वीडियो कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। आंदोलनकारियों ने एडिशनल एसपी राजेश भट्ट भी वर्दी भी फाड़ दी थी।

इसी घटना से जुड़ा हुआ एक वीडियो सामने आया है, जिसमें आंदोलकारी एडिशनल एसपी राजेश भट्ट की वर्दी फाड़ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो शुरुआती जांच में सामने आया है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की राजनीतिक छवि धूमिल करने के लिए एक पड़यंत्र के तहत गैरसैंण में ऐसा किया गया था। इस मामले में सीएम त्रिवेंद्र ने उसी दिन मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए थे। शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आया है उसके मुताबिक प्रायोजित तरीके से इस पूरी घटना को अंजाम दिया गया था। पूरी योजना के तहत ही वहां पर इस तरह के हालात पैदा किए गए थे जिससे पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच झड़प हो।  ताकि बाद में मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल किया जा सके। सूत्रों के अनुसार इसके लिए कुछ आंदोलनकारियों को शराब और पैसों का भी लालच दिया गया था। इस घटना से जुड़े साक्ष्य को पुलिस जुटाने में लगी हुई है, ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

जबकि सीएम पहले ही दे चुके थे सड़क चौड़ीकरण आदेश

घाट-नंदप्रयाग मोटर मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत पहले ही आदेश दे चुके थे जो मुख्यमंत्री ट्वीट करके बता चुके हैं। सीएम ने ट्वीट करके कहा दिवालीखाल, गैरसैण की घटना के जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। मेरे द्वारा नंदप्रयाग-घाट मार्ग के चौड़ीकरण की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी।एक और विचारणीय बात ये है कि मैंने सल्ट दौरे के दौरान प्रदेश के विकासखंड मुख्यालय तक की सभी सड़कों को १.५ लेन चौड़ीकरण किए जाने की घोषणा की थी। तो अब सवाल ये उठता है की जब आदेश दिये जा चुके थे तो आंदोलन कैसा? क्या ये आंदोलन सीएम की छवि खराब करने के लिए किया गया या फिर सीएम के आदेश पूरा न होने के लिए किया गया या फिर हो सकता है की ग्रामीण सीएम से मिलने के लिए वहाँ पहुंचे हों और सीएम के विरोधियों ने उनमे घुल मिलकर इस घटना को अंजाम दिया और जिसके लपेटे मे बेचारे ग्रामीण आ गए। अब हक़ीक़त क्या है ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल सीएम कह चुके हैं  “संपूर्ण घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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Author: nirbhiknazar

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