ब्यूरो रिपोर्ट
देहारादून: कांग्रेस महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भराड़ीसैंण के निकट दिवालीखाल में महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकार व मुख्यमंत्री को चमोली के घाट क्षेत्र जाकर सड़क के चौड़ीकरण का शिलान्यास कर महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन पर दर्ज मुकदमें वापस लेने के साथ ही घायल महिलाओं को आर्थिक सहायता देनी चाहिए। इस मामले की जांच हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज से कराई जानी चाहिए। वह स्वयं भी घाट जाकर आंदोलनकारियों से मुलाकात करेंगे। बुधवार को भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज के मसले पर सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रीष्मकालीन राजधानी में बजट सत्र आयोजित कर रही है। इसकी शुरुआत महिलाओं पर लाठीचार्ज से की जा रही है। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि रास्तेभर में ग्रीष्मकालीन राजधानी के होर्डिंग लगे हुए हैं। सरकार की हिम्मत यहां स्थायी बोर्ड लगाने की नहीं है।

जनता पूछेगी कि ग्रीष्मकालीन राजधानी लिखा है तो फिर सरकार कहां है। जनता सरकार को न खोजने लगे, इसलिए बोर्ड की आड़ में चेहरा छिपाया जा रहा है। यदि सरकार कुछ नया दिखाना चाहती है तो वह डेढ़ महीने तक यहां बैठ कर दिखाए। मुख्यमंत्री यहां बैठें, सचिव बैठें। यहां से सरकार का संचालन कराएं, तब उन्हें इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी कहने का अधिकार है। यदि ऐसा नहीं कर सकते तो वे गैरसैंण व उत्तराखंडियत का अपमान कर रहे हैं।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सत्य से परे था। इसमें दूरदर्शी सोच नहीं थी। सरकार का पिछला बजट भी कमजोर था, इस बार भी बजट में गप ही होंगी। सरकार बताए कि मदवार कितना लक्ष्य रखा था और इसमें कितना राजस्व आया।