ब्यूरो रिपोर्ट
देहारादून: कोई सरकार अपने राज्य के लिए कितना ही अच्छा कर दे लेकिन विपक्ष हमेशा से ही सरकारों पर सवाल उठाता आया है। सरकार के काम मे कमियाँ निकालता आया है। आपको बता दें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कल 4 मार्च को उत्तराखंड मे अपने कार्यकाल का अंतिम बाजट पेश किया। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वित्तीय वर्ष 2021-22 का 57400.32 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। बीजेपी के मुताबिक त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा पेश बजट में आम आदमी का ध्यान रखा गया है और इस लिहाज से इसे आम आदमी का बजट कहा जा सकता है। यह बजट आम आदमी , महिला , किसान , मध्यम वर्ग सहित सबके हित में है। बजट में ग्रामीण अर्थ व्यस्था के लिए रोजगार गारंटी योजना, पलायन रोकने, महिला सुरक्षा व क़ृषि तथा युवाओ के रोजगार की योजनाओं पर फोकस किया गया है।तो वहीं विपक्ष इस बजट पर सवाल उठा रहा है इस बजट को झूठ का पिटारा बता रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में प्रस्तुत बजट को आम राज्य निर्माण के बाद का सबसे खोखला बजट बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार की महंगाई कम करने को जहां पेट्रोलियम पदार्थों पर राज्य के वैट का हिस्सा कम करना चाहिए था वो नहीं किया गया है। जो जनता के प्रति सरकार की संवेदशीलता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यों को अपना कार्य बता कर वाहवाही लूटने व जुमलेबाजी करने के अलावा इस सरकार ने एक भी कार्य नहीं किया है। यह सरकार हर कदम पर फेल रही है। वहीं गैरसैंण को कमिश्नरी घोषित करने को सरकार की विभिन्न जिलों की मांग को पीछे धकेलने का प्रयास बताया। वहीं उन्होंने बजट में डोबराचांटी और जानकी सेतु निर्माण को उपलब्धि बताने पर कहा कि दोनों पुलों का निर्माण पूर्ववर्ती सरकार की ओर से किया जा चुका था। ऐसे में उन्होंने सरकार पर पिछली सरकार के कार्यों को उपलब्धि के रूप में बताने का आरोप लगाया है। उन्होंने दीवालीखाल लाठीचार्ज को सरकार के इंटेलीजेंस और प्रशासन की असफलता बताया है।
चुनावी वर्ष में पेश किए गए बजट को कांग्रेस ने झूठ का पिटारा करार दिया। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि सरकार ने जो बजट पेश किया है। उसमें महंगाई और बेरोजगारी का कोई जिक्र नहीं है। बजट में न तो जनहित के मुद्दे और न ही कर्मचारियों के मुद्दे हैं। बढ़ती महंगाई से आम लोग परेशान है।
प्रीतम सिंह, विधायक व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक सरकार किसानों को दोगुनी आय के सपने दिखा रही है। आय कैसे बढ़ेगी बजट में इसका कोई पता नहीं है। किसान, बेरोजगार और आम आदमी के लिए बजट में कुछ नहीं है। पुरानी योजनाओं का जिक्र कर बजट में आंकड़ों की बाजीगरी की गई है। प्रदेश की जनता महंगाई की मार झेल रही है। बजट में इसका कोई उल्लेख नहीं है।उपनल कर्मचारी, भोजन माताएं नियमितीकरण, वेतन के लिए आंदोलनरत है। सरकार अपने ही एजेंडे पर काम रही है। आम लोगों के हितों की सरकार कोई फिक्र नहीं है। सरकारी संस्थाओं व उद्योगों से कर्मचारियों को कोविड महामारी के दौरान नौकरी से हटाया गया। रोडवेज व तदर्थ कर्मचारियों को कई माह से वेतन नहीं मिला है।
किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस ने बजट को लेकर कहा कोरोना काल में राज्य की ध्वस्त आर्थिक व्यवस्था को इस समय बूस्टर देने की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने इस बजट में किसानों, व्यवसायियों, पर्यटन, उद्योग और सरकारी कर्मचारियों की बजट में उपेक्षा की गई है। बजट में वित्तीय प्रबंधन का अभाव है। सरकार कर्ज के ब्याज की अदायगी कैसे करेगी। विकास की बात तो दूर की कौड़ी है। युवा वर्ग की भी उपेक्षा की गई है। बजट में राहत व समाधान दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रही है।
AAP पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य आंदोलनकारी रवींद्र जुगरान ने कहा राज्य में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल पहले से ही वजूद में हैं। नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल मंडल मुख्यालय बनाए गए हैं। लेकिन, इन दोनों मंडलों के मंडल आयुक्त समेत तमाम अधिकारी मुख्यालयों के बजाय देहरादून और हल्द्वानी में डेरा जमाए रहते हैं। ऐसे में मंडलायुक्त के स्तर से समस्याओं के निराकरण में आमजन को तमाम समस्याएं आती हैं। जब पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल जैसी जगहों पर अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते तो भला इन दोनों शहरों से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित गैरसैंण में अधिकारी कहां रुकेंगे। सरकार को पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि मंडलायुक्त समेत तमाम अधिकारी मंडल मुख्यालयों में बैठें और आमजन की समस्याओं का समाधान करें।