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2020 में मुख्यमंत्री ने की गैरसेण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा और 2021 के बजट मे गैरसेण को चमका दिया

ब्यूरो रिपोर्ट

देहरादून: आपको बता दें गैरसेण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बने हुए अभी 1 साल ही गुज़रा है लेकिन गैरसेण को 1 साल मे ही सीएम त्रिवेन्द्र ने गैरसेण को  चमका कर रख दिया। राजधानी बनने के ठीक एक वर्ष बाद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसे कमिश्रनरी और डीआईजी रेंज बनाने की घोषणा की है। इसके साथ ही इस पर्वतीय कस्बे को और कई तोहफे दिये गये हैं। पिछले वर्ष चार मार्च को ही गैरसैंण में आयोजित बजट सत्र 2020 में मुख्यमंत्री ने इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा की थी।

गुरुवार को गैरसैंण विधानसभा में आहूत सत्र में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखंड के वित्तीय वर्ष 2021-22 का बजट पेश किया। बजट पेश करने के दौरान ही सीएम ने पांच महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। सीएम ने कहा कि गैरसैंण को कमिश्नरी बनाया जाएगा। इसमें गढ़वाल क्षेत्र के जनपद चमोली, रुद्रप्रयाग और कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोड़ा और बागेश्वर जनपद को शामिल किया जाएगा। गैरसैंण में कमिश्नर के साथ डीआईजी भी नियुक्त किये जाएंगे। सीएम ने कहा कि ग्रीष्मकालीन राजधानी क्षेत्र के नियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार होगा। एक महीने के अंदर इसका टेंडर हो जाएगा।

इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों को ध्यान में रखते हुए गैरसैंण में खाद्य प्रस्संकरण इकाई की स्थापना की जाएगी। सीएम ने यह भी कहा कि ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में 20 हजार फलदार पेड़ लगाए जागएंगे। इसी तरह नव सृजित छह नगर पंचायतों में बुनियादी ढांचे के विकास को एक-एक करोड़ रुपये देने की घोषणा सीएम ने की। एक साल पहले गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी और आज इसे कमिश्नरी का दर्जा देकर सीएम ने कई सियासी समीकरण साधे हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा इसका लाभ लेने का प्रयास जरूर करेगी। सीएम का मास्टर स्ट्रोक कांग्रेस की रणनीति पर भारी पड़ने वाला है।

त्रिवेन्द्र ने बदला प्रदेश का प्रशासनिक भूगोल

उत्तराखंड में भौगोलिक रूप से दो क्षेत्र हैं, गढ़वाल और कुमाऊं। प्रशासनिक रूप से कामकाज को आसान बनाने के लिए जब कमिश्नरी बनाए गये तो गढ़वाल और कुमाऊं के स्वरूप को नहीं छेड़ा गया। लेकिन सीएम ने गैरसैंण को कमिश्नरी का दर्जा देकर और इसमें गढ़वाल और कुमाऊं के दो-दो जिलों को शामिल कर एक नई प्रशासनिक इकाई बनाई है। इस इकाई के माध्यम से पहली बार गढ़वाल और कुमाऊं के जिलों को संयुक्त किया गया है।

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Author: nirbhiknazar

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