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कुम्भ समायावधि और व्यवस्थाओं से नाराज़ चल रहे संतों की सीएम से मिलने के बाद नाराजगी हुई दूर ?

हरिद्वार: महाकुंभ 2021 मे व्यवस्थाओं को लेकर एक तरफ जहां कई संत संतुष्ट हैं वहीं कुछ संत पिछले कई दिनों से बयानबाजी कर विरोध जाता रहे हैं । आपको बता दें भारतीय आखाडा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने उत्तराखंड सरकार से कुंभ के मेले में भंडारे, कथा और प्रवचन के पंडाल लगाने की अनुमति देने की मांग की थी । उन्होंने कहा था कि कोरोना से डरने की कोई जरूरत नहीं है। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा था कि प्रयागराज में करीब सवा महीने का माघ मेला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें न तो कोरोना का कोई प्रकोप बढ़ा और ना ही केरोना से कोई घटना घटी, जबकि लाखों की संख्या में श्रद्धालु माघ मेले में पहुंचे थे। उन्होंने सरकार से करोना से न डरने का आग्रह करते हुए हरिद्वार कुंभ में सभी तरह की व्यवस्थाएं दिए जाने मांग की थी । इसी क्रम मे आज उत्तराखंड के मुखिया त्रिवेन्द्र सिंह रावत संतों से मिलने पहुंचे।

बैरागी संतों की नाराजगी को दूर करने और उनकी मांगों पर उनके साथ चर्चा करने को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बुधवार को बैरागी कैंप पहुंचे थे। उन्हें यहां लाने में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने महति भूमिका निभाई थी जबकि वो खुद पहले कुम्भ व्यवस्थाओं से नाराज़ चल रहे थे । और बैरागी अणियों व उनके संतों की सरकार के प्रति नाराजगी को दूर कराया।  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बैरागी कैंप स्थित श्रीपंच निर्मोही अणि, अखाड़ा पहुंचकर बैरागी अखाड़ों के श्रीमहंतों से उनकी मांगों पर चर्चा की। उन्हें जल्द सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।

बैरागी कैंप में निर्मोही अणि अखाड़ा पहुंचने पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सबसे पहले हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की और संतों का आशीर्वाद लिया। तीनों वैष्णव अखाड़े के संतों ने फूलमाला पहनाकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का स्वागत कर उन्हें आशीर्वाद दिया। इस दौरान संतों की ओर से मुख्यमंत्री को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन दिया गया। पंच वैष्णव तीनों अणि अखाड़ों के संत महापुरुषों ने बैरागी कैंप में मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने की अपनी मांग को दोहराया। अब देखने वाली बात ये है की संतों से मिलकर और उनकी मांग जानकार सीएम किस तरह संतों की मांग को पूरा करते हैं  और कैसे नाराज़ संत सीएम से खुश होते हैं।

सीएम के लिए शांति पूर्वक कुम्भ सम्पन्न कराना इतना आसान नहीं है । 

आपको बता दें दो दिन पूर्व मातृसदन के अध्यक्ष शिवानंद सरस्वती ने अपने प्राणों के बलिदान की चेतावनी दी है। शिवानंद का कहना है कि इस बार उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वह कुंभ में ही अपने प्राणों का बलिदान दे देंगे। उधर मांगों को लेकर मातृसदन के संत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का अनशन जारी है। बीते 23 फरवरी से आत्मबोधानंद अनशन पर बैठे हैं। शिवानंद सरस्वती ने कहा कि सरकार को उनका बलिदान ही चाहिए है तो वह अवश्य दे देंगे। कहा कि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। कहा कि हाईकोर्ट की ओर से रायवाला से भोगपुर तक गंगा और उसकी सहायक नदियों में पूरी तरह से खनन पर रोक लगाई गई है।

बावजूद सरकार इसके खनन के पट्टे सरकार की ओर से खोले जा रहे हैं।  गंगा और उसकी सहायक नदियों के पांच किलोमीटर के दायरे में स्टोन क्रशरों का संचालन भी नहीं किया जा सकता है। लेकिन हरिद्वार में इसका पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने हरिद्वार जिलाधिकारी और एसएसपी को हटाने की भी मांग  की है। उन्होंने उनकी सुरक्षा को लेकर भेजी जा रही रिपोर्ट में धोखाधड़ी का अंदेशा जताया है। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा रिपोर्ट बनाने में पूरी खेल किया जा रहा है। शिवानंद ने आरोप लगाया है कि बड़े साहब का खास होने के कारण एसएसपी अपने मन की कर रहे हैं। कहा कि साठगांठ कर उनकी सुरक्षा हटाई गई है। उन्होंने पुलिस अधिकारी के एक पुराने मामले को उजागर करते हुए अपील करने की बात कही।

निर्भीक नज़र के लिए (न्यूज़ एडिटर) मौ0 तारिक अंसारी की रिपोर्ट 

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Author: nirbhiknazar

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