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आज तक रास नहीं आया बीजेपी को सूबे मे सीएम बदलना, आगे देखिये होता है क्या ? (NN स्पेशल)

मौ0 तारिक अंसारी

(न्यूज़ एडिटर निर्भीक नज़र)

देहरादून: उत्तराखंड का सियासी इतिहास इस बात का गवाह कि अब तक उत्तराखंड मे भाजपा के किसी मुख्यमंत्री ने अपने 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया। और भाजपा के मुख्यमंत्री बदलने के प्रयोग तो आज तक पार्टी को रास ही नहीं आए । भाजपा ने पहले भी मुख्यमंत्रियों को बदला है। लेकिन उसके बाद आए चुनाव परिणाम इस बात की तस्दीक कर रहें हैं कि भाजपा का ये प्रयोग कभी भी सफल नहीं रहा है। और जब जब प्रदेश उत्तराखंड मे बीजेपी ने अपना सीएम बदला है तब तब पार्टी को मुंह की खानी पड़ी है और हार का सामना करना पड़ा है ये बात हम नहीं कह रहे बल्कि उत्तराखंड मे राजनीति इतिहास के आंकड़े कह रहे हैं आप खुद देख लीजिये 20 वर्ष के उत्तराखंड मे जब जब भाजपा आलाकमान ने सीएम बदलने का आदेश सुनाया है तब तब पार्टी को सूबे मे नुकसान हुआ है।

उत्तराखंड मे भाजपा का सीएम बदला जाना और उसका परिणाम

  • उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से पहली अंतरिम सरकार में स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी को 2000 मे मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन भाजपा की गुटबाजी के चलते आम चुनाव से ठीक पहले हटा दिया गया।
  • उसके बाद भगत सिंह कोश्यारी को 2001 मे मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गयी। उसके बाद के चुनाव परिणाम सबके सामने हैं। उत्तराखंड राज्य बनाने का दावा करने वाली भाजपा विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार गई।
  • इसके बाद वर्ष 2007 में भाजपा सत्ता में आई तो मेजर जनरल भुवन चन्द्र खंडूड़ी को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन खंडूड़ी को भी अफवाहों के बीच इसलिए हटा दिया गया कि वे कड़क स्वभाव के नेता हैं।
  • फिर 2009 मे  डॉ. रमेश पोखरियाल ”निशंक” को मुख्यमंत्री बना दिया गया। लेकिन पार्टी के ही कुछ लोग उन्हें भी नहीं पचा पाए। नतीजा यह रहा कि ढाई साल बाद उन्हें भी ठीक विधान सभा चुनाव से पहले हटा दिया गया।
  • इनके बाद भाजपा ने यह कहते हुए कि ”खंडूरी हैं जरुरी” और पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी को एक बार फिर 2011 मे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया और भावी मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करते हुए उनके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव करवाए गए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ उत्तराखंड की जनता ने खनदुरी को नकार दिया।

अब एक बार फिर उत्तराखंड मे मुख्यमंत्री को बदले जाने की खबर चर्चाओं मे है उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ जारी असंतोष की खबरों के बीच राज्य में सत्ता परिवर्तन की चर्चा को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हई है। सूत्रों के मुताबिक अगर सूबे  सीएम  पद मे बदलाव होता है तो  प्रदेश मे अगले मुख्यमंत्री की रेस में मुख्यतया तीन नाम सामने आ रहे हैं। सीएम पद की रेस में केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, सतपाल महाराज और सांसद अनिल बलूनी हैं। माना जा रहा है कि इसी क्रम में पार्टी के संसदीय बोर्ड ने शनिवार को देहरादून में कोर ग्रुप की बैठक बुलाई थी। पार्टी उपाध्यक्ष रमन सिंह को भेजकर स्थिति की जानकारी ली। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है और हालात संभालने के लिए सभी विकल्प खुले हैं। लेकिन अब तक बीजेपी ने जब जब मुख्यमंत्री को बदला है तब तब सूबे मे बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा है। 2022 मे उत्तराखंड मे विधानसभा चुनाव होने हैं और अगर भाजपा के सीएम बदलने के बाद होने वाले नुकसान का इतिहास का मिथक नहीं टूटा तो पूर्व मे हुई सीएम बदलने की उठापटक के नतीजों से ये अंदाज लगाना मुश्किल नहीं होगा की  2022 मे बीजेपी  फिर कड़ी मेहनत करने के बाद कहीं फल से वंचित न रह जाये। 

लेकिन सच तो ये है की मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में पार्टी अब तक कोई चुनाव नहीं हारी। जितना काम वर्तमान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया शायद ही आज तक सूबे मे भाजपा के किसी मुख्यमंत्री ने किया हो। यहाँ तक की दशकों से चले आ रहे गैरसेण राजधानी वाले मुद्दे को सीएम त्रिवेन्द्र ने बहुत ही बखूबी से सुलझाया और उत्तराखंड मे लोगों के दिलों मे अलग जगह बनाई। हालांकि मंत्रियों और विधायकों की अहम शिकायत सरकार के अहम फैसलों में उन्हें विश्वास में नहीं लेने को लेकर भी रही है। खासकर हाल ही में गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने और उसमें अल्मोड़ा जिले को शामिल करने का विरोध हो रहा है। कुछ भाजपा नेताओं की आपत्ति इसे लेकर भी बताई जा रही है।  लेकिन शायद बीजेपी के अन्य पदाधिकारी इस बात से अंजान हैं की सीएम ने गैरसेण को लेकर जो भी कदम उठाया वो अपने लिए नहीं बल्कि राज्य के लिए उठाया। इस बार गैरसेण मे बजट सत्र के दौरान जो लाठीचार्ज हुआ वो ठीक नहीं लेकिन, हो सकता है की लाठीचार्ज करने की परिस्थिति पैदा कराना भी कोई राजनीतिक स्टंट हो लेकिन इतने हंगामे के बाद भी सीएम ने बिना जांच के अब तक किसी पर आंच नहीं आने दी। उत्तराखंड मे त्रिवेन्द्र सिंह रावत वाकई एक काबिल मुखिया के रूप मे कार्य कर रहे हैं।

हालांकि शनिवार को ही कोर कमेटी की बैठक खत्म होने के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत ने चेहरा बदलने की अटकलों पर विराम लगाया था । 13 विधायकों की नाराजगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी का एक विधायक भी नाराज नहीं है। ये सारी बातें मनगढ़ंत हैं। उनके मुताबिक, केंद्रीय पर्यवेक्षक 18 मार्च को सरकार के चार साल पूरे होने की तैयारियों का जायजा लेने आए थे। उन्होंने कहा कि ये सारी चर्चाएं मीडिया की उपज है।

पढ़िये अब तक उत्तराखंड मे कौन सीएम कितने वक़्त के लिए रहा 

मुख्यमंत्रियों का नाम कार्यकाल दल का नाम
नित्यानंद स्वामी 9-नवंबर-00 से 29-अक्टूबर-01 BJP
भगत सिंह कोशीरी 30-अक्तूबर-01 से 1-मार्च-02 BJP
एन डी तिवारी 2-Mar-02 से 7-Mar-07 INC
बी.सी. खंडूरी 8-मार्च-07 से 23-जून-0 9 BJP
रमेश पोखरियाल निशंक 24-जून-09 से 10-सितंबर-11 BJP
बी.सी. खंडूरी 11-सितंबर-11 से 13-मार्च-12 BJP
विजय बहुगुणा 13-मार्च-12 से 31-जनवरी-14 INC
हरीश रावत 1-फरवरी-14 से 27-मार्च-16 INC
(राष्ट्रपति शासन) 27-मार्च-16 से 21-अप्रैल-16 N/A
हरीश रावत 21-अप्रैल-16 से 22-अप्रैल-16 INC
(राष्ट्रपति शासन) 22-अप्रैल-16 से 11-मई-16 N/A
हरीश रावत 11-मई-16 से 18-मार्च-17 INC
त्रिवेन्द्र सिंह रावत 18-Mar-17 से पदाधिकारी BJP
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