ब्यूरो रिपोर्ट
देहारादून: उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार का किला अभेद्य है जिसे भेद पाना आसान नहीं दिख रहा है 24 घंटे के नाटकीय घटनाक्रम का तब पटाक्षेप हो गया जब बैठक से बाहर निकलकर प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत और राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने मीडिया को नेतृत्व परिवर्तन के लिए साफ इंकार कर दिया दरअसल इस तरह की घटनाएं आम है एक दशक से केंद्र सरकार और संगठन में भारतीय जनता पार्टी कि सरकार है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की सरकार में इस प्रकार से चुनाव के अंतिम वर्ष में नेतृत्व परिवर्तन करना किसी को पच नहीं रहा है सत्ता के गलियारे में लगातार उत्तराखंड में इस तरह की चर्चाएं आम है चाहे सरकार कांग्रेस की हो या भाजपा की हो सरकार को अस्थिर करने के लिए सरकार के साथ के लोग ही इस तरह की रणनीति बनाते रहते हैं। और कयासों का दौर चलते रहता है खबर बताते चलें कि उत्तराखंड में बीजेपी के कई विधायकों ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के कामकाज के तरीके से आपत्ति जताई है। आनन-फानन में केंद्र की ओर से राज्य में स्थिति संभालने के लिए पर्यवेक्षकों को देहरादून भेजा गया था। नए सीएम की चर्चा तेज थी लेकिन बीजेपी ने कोर ग्रुप की बैठक के बाद इस चर्चा पर विराम लगा दिया। उत्तराखंड में सियासी भूचाल के बीजेपी ने केंद्र से भेजी थी पर्यवेक्षकों की टीम, हालात का लिया जायजा शनिवार को देहरादून में कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई, मीटिंग में गैरसैंण से सीएम समेत विधायक पहुंचे चर्चा है कि गैरसैंण को तीसरा प्रसाशनिक मंडल घोषित करने से पहले कई मंत्रियों से सलाह नहीं ली गई थी।

उत्तराखंड में गैरसैंण में जारी बजट सत्र के बीच सियासी बवंडर मचा हुआ है। आनन-फानन में स्थिति संभालने के लिए बीजेपी ने पर्यवेक्षकों को देहरादून भेजा था। इसी के साथ सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुर्सी जाने की अटकलें तेज हो गईं। उत्तराखंड के सियासी गलियारों में अगले सीएम की चर्चा भी शुरू हो गई हैं, हालांकि कोर कमिटी के बाद बीजेपी ‘ऑल इज वेल’ कह रही है।
दरअसल उत्तराखंड के कई विधायकों ने सीएम की वर्किंग स्टाइल से नाराजगी जताई है। ऐसा कहा जा रहा है कि गैरसैंण को तीसरा प्रसाशनिक मंडल घोषित करने से पहले कई मंत्रियों से सलाह नहीं ली गई। इससे कई नेता अंसतुष्ट हैं। उत्तराखंड में बीजेपी के कई विधायकों ने कुछ महीने पहले दिल्ली आकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। उन्होंने यह डर भी जाहिर किया कि अगर मौजूदा स्थिति में चुनाव हुए तो बीजेपी की मुश्किल बढ़ सकती है।

देहरादून में हुई कोर ग्रुप की बैठक
ऐसे में केंद्र की तरफ से पर्यवेक्षकों को उत्तराखंड में स्थिति का जायजा लेने भेजा गया था। इसी क्रम में पार्टी के संसदीय बोर्ड ने शनिवार को देहरादून में कोर ग्रुप की बैठक बुलाई थी। इसमें पार्टी उपाध्यक्ष रमन सिंह और दुष्यंत गौतम ने राज्य में आए राजनीतिक भूचाल की स्थिति की जानकारी ली। मीटिंग में गैरसैंण से देहरादून की फ्लाइट लेकर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत भी पहुंचे थे।
दो दर्जन विधायक गैरसैंण से देहरादून पहुंचे थे
शुक्रवार रात से ही उत्तराखंड में सियासी हड़कंप मचा हुआ था। इसके बाध शनिवार को कोर कमिटी की बैठक के लिए दो दर्जन विधायकों को दो-तीन हेलिकॉप्टर के जरिए गैरसैंण से देहरादून एयरलिफ्ट कराया गया। वहीं गैरसैंण में विधानसभा सत्र जल्दबाजी में बजट पास कराया गया।
सीएम चेहरे के लिए नामों की चर्चा
कोर कमिटी की बैठक से पहले ही उत्तराखंड में सीएम पद की रेस के लिए नाम भी सामने लगे- रमेश पोखरियाल निशंक, सतपाल महाराज और सांसद अनिल बलूनी, संसद अजय भट्ट और अंतिम नाम भट्ट का है। ऐसा कहा गया कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखंड में बगावत होने की आशंका है।