ब्यूरो रिपोर्ट
नई दिल्ली: किसान धरना चलते हुए 100 दिनों से अधिक समय हो चुका है लेकिन किसान की बात पर सरकार ने अब तक गौर नहीं किया है। कई बार किसान नेताओं से सरकार अपने प्रतिनिधि भेजकर बात करा चुकी है लेकिन सारी बातें और सारी बैठकें अब तक बेनतीजा ही रहीं हैं । किसानो की मांगों को सरकार ने अब तक नहीं माना है। किसान नेताओं के साथ सरकार की 13 दौर से अधिक बार बातचीत हो चुकी है मगर कोई नतीजा नहीं निकला है। किसान धरना स्थल पर बैठे हुए हैं। उनकी पंचायतें हो रही हैं मगर कोई रिजल्ट नहीं निकल पा रहा है।किसान अब भी तीनों कृषि कानूनों की वापसी को लेकर अड़े हैं। दिल्ली बोर्डर में हो रहा विरोध प्रदर्शन अब कोलकाता तक भी पहुंचने वाला है। आज भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत ने कहा, पूरी सरकार इस वक्त बंगाल चुनाव में लगी है। किसानों का प्रतिनिधिमंडल भी कोलकाता जा रहा है। यह प्रतिनिधिमंडल वहां के किसानों से बात करेगा। 13 मार्च मार्च इसके लिए समय तय किया गया है। किसान आंदोलन से जुड़े नेता अब जगह- जगह किसानों से मिलने की योजना बना रहे हैं। किसान आंदोलन से जुड़े नेता किसानों के बीच जाकर इस बिल की समस्याओं का जिक्र करेंगे। किसानों ने खासकर उन इलाकों को चुना है जहां चुनाव होने है। रविवार को यूपी गेट पर हुई महापंचायत के बाद राकेश टिकैत ने ये बात कही।

किसानों का तर्क है कि चुनाव की जगह पर ही सरकार होगी और हम भी वहीं अपनी बात रखेंगे। राकेश टिकैत ने कहा, 100 दिनों से चल रहे आंदोलन की सरकार ने अनदेखी की है हम भी सरकार को नुकसान पहुंचायेंगे। किसानों ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि जबतक सरकार किसानों की मांग पूरी नहीं करती तबतक यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। कृषि कानून को लेकर किसानों की सहमति के साथ सरकार संसोधन को तैयार है लेकिन किसान इन तीनों कृषि कानून की वापसी पर अड़े हैं।
ये किसान केंद्र सरकार द्वारा लाये गये नये कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार कृषि कानून वापिस नहीं लेगी, वो वापिस नहीं जायेंगे। इस बीच, मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए किसानों ने प्रदर्शनस्थलों पर पंखे, मच्छरदानियाँ, फ़्रिज और अन्य सामान लाने शुरू कर दिये हैं। गुरूवार को टीकरी बॉर्डर पर गर्मी से तैयारियों का नजारा देखने को मिला। यहां पानी की सप्लाई के लिए बोरवैल किया गया है। गर्मी से बचने के लिए फ्रिज लगा दिया गया है। ठंडक के लिए बांस की छोटी झोपड़ियां बनाई जा रही हैं।