ब्यूरो रिपोर्ट
हरिद्वार: नागा सन्यासियों के प्रमुख अखाड़ों में से एक महानिर्वाणी अखाड़े ने हरिद्वार के कुम्भ मेले में बड़ी मिसाल पेश करते हुए उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा इस मेले के लिए दी जाने वाली एक करोड़ रूपये की कुम्भ सहायता राशि को लेने से इनकार कर दिया है। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा अपने संसाधनों से ही पेशवाई से लेकर शाही स्नान समेत तमाम धार्मिक कार्यक्रम सम्पन्न कराए जा रहे हैं। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रवीन्द्र पुरी महाराज ने इस संबंध में कहा कि उत्तराखंड सरकार को समय समय पर अखाडा मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से सहायता राशि देता रहता है और ऐसे में राज्य सरकार के इस दान को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

आठ मार्च को नागा साधुओं के बड़े अखाड़ों में एक महानिर्वाणी अखाड़ा ने आगामी कुंभ मेले से जुड़े खर्च के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा दी गयी एक करोड़ रूपये की सहायता लेने से मना कर दिया है। सरकार की ओर से सभी 13 अखाड़ों को एक-एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई है। पहले किश्त अखाड़ों को दी भी जा चुकी है। राज्य सरकार ने आगामी मेले से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिए हरिद्वार में साधु-संतों के सभी 13 अखाड़ों को एक-एक करोड़ रूपये की कुंभ सहायता दी है। हालांकि, महानिर्वाणी अखाड़ा ने अपने ही संसाधनों से खर्च की राशि जुटाने का फैसला किया है, जबकि कई अखाड़ों ने राज्य सरकार द्वारा दी गई सहायता राशि में वृद्धि करने की मांग की है। इस अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी ने कहा कि उनका अखाड़ा यह अनुदान राशि नहीं ले सकता है क्योंकि उनका अखाड़ा स्वयं ही समय-समय पर मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान देता रहा है।