ब्यूरो रिपोर्ट
देहारादून: उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे के बाद अब चर्चा है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इसे लेकर सुबह दस बजे भाजपा कार्यालय में विधानमंडल की बैठक होगी। हालांकि ये बैठक औपचारिक होगी। नाम दिल्ली से तय होकर यहां बताया जाना है। इसके बाद ही बैठक में दल के नेता के नाम पर मुहर लगने के बाद नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होगी। इसके बाद फिर शपथ ग्रहण कराई जाएगी। शपथ आज भी ग्रहण कराई जा सकती है। या फिर कल होगी। वहीं, सूत्र बताते हैं कि अभी तक नेता का नाम दिल्ली से बताया नहीं गया है। आज जल्द ही इस संबंध में फरमान आ सकता है। इसके बाद बैठक में सिर्फ औपचारिक तौर पर घोषणा हो सकती है। गौरतलब है कि छह मार्च को केंद्रीय पर्यवेक्षक वरिष्ठ भाजपा नेता व छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह देहरादून आए थे। उन्होंने भाजपा कोर कमेटी की बैठक के बाद फीडबैक लिया था। इसके बाद उत्तराखंड में आगामी चुनावों के मद्देनजर मुख्यमंत्री बदलने का फैसला केंद्रीय नेताओं ने लिया था।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ही नाम तय करेंगे। नाम कल ही तय हो जाना था, लेकिन कल दोनों नेता साथ नहीं बैठ पाए, इसलिए आज सुबह इसकी ओपचारिकता पूरी हो जाएगी। वहीं, बैठक में भाग लेने के लिए पर्यवेक्षक के रूप में वरिष्ठ भाजपा नेता व छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के साथ ही प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम कल ही देहरादून पहुंच गए थे। बैठक में सांसदों के भाग लेने की संभावना कम जताई गई। कारण ये ही कि दिल्ली में चल रहे बजट सत्र के लिए भाजपा ने सारे सांसदों को आज सुबह साढ़े नौ बजे एक बैठक में उपस्थित होने का विहिप जारी किया है। इससे विधानमंडल की बैठक में सांसदों का पहुंचना मुश्किल माना जा रहा था, लेकिन अचानक निशंक दून पहुंच गए। ऐसे में उनकी दावेदारी प्रबल होने की संभावना जताई गई है।
वहीं, अभी तक सीएम पद के लिए कई नाम उछाले जा रहे हैं। साथ ही डिप्टी सीएम भी बनाया जा सकता है। फिलहाल सीएम की दौड़ में जो नाम सामने आ रहे हैं, उनके बारे में यहां विस्तार से बताया जा रहा है। ये नाम अटकलों और कयास पर आधारित हैं। फिलहाल लोकसाक्ष्य ऐसा कोई दावा नहीं करता है। फिलहाल सतपाल महाराज और रमेश पोखरियाल निशंक का नाम का नाम सबसे ऊपर, फिर राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी का नाम है। एक नाम धन सिंह रावत का भी लिया जा रहा है। जो निवर्तमान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की पसंद बताए जा रहे हैं।

सतपाल महाराज
सतपाल महाराज वर्तमान में उत्तराखंड के पर्यटन एवं सिंचाई मंत्री हैं। सतपाल सिंह रावत को सतपाल महाराज के रूप में भी जाना जाता है। सतपाल महाराज का जन्म 21 सितंबर 1951 को कनखल (उत्तराखंड के हरिद्वार का एक कॉलोनी) में हुआ। वह प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु योगीराज परमंत श्री हंस और राजेश्वरी देवी के बेटे हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य हैं। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के लिए भारत की संसद (15वीं लोक सभा) के निचले सदन के सदस्य भी थे। उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और 2014 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। वर्तमान में, वह उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री हैं। 2014 तक, सतपाल महाराज मानव उत्थान सेवा समिति के प्रमुख रहे और “ज्ञान” (नॉलेज) नामक मेडिटेशन तकनीक सिखाने का भी काम किया। इस आंदोलन के तहत दुनिया भर में कई जगहों के छात्रों के साथ ही आश्रम जुड़े, जिसका मुख्य कार्यालय भारत में है। सतपाल महाराज ने उत्तराखंड के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। एक सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने तत्कालीन प्रधान मंत्री एच डी देवेगौड़ा और आई.के. गुजराल और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु पर उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने के लिए दबाव डाला था।

रमेश पोखरियाल निशंक
रमेश पोखरियाल “निशंक” भारतीय जनता पार्टी से संबंधित एक भारतीय राजनेता हैं। वे 2009 से 2011 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे। वे वर्तमान में 16 वीं लोक सभा में संसद सदस्य हैं। वे लोकसभा में उत्तराखंड के हरिद्वार संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। डॉ. रमेश पोखरियाल का जन्म 15 अगस्त, 1959 को पिनानी ग्राम, तहसील चौबट़टाखाल, जिला पौड़ी गढ़वाल तत्कालीन उत्तर प्रदेश (अब उत्तराखंड) में हुआ था। उनके पिता परमानन्द पोखरियाल और माता विश्वम्भरी देवी हैं। इनकी पत्नी का नाम कुसुमकान्ता पोखरियाल है।
डॉ. रमेश पोखरियाल 1991 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए कर्णप्रयाग निर्वाचन-क्षेत्र से चुने गए थे। इसके बाद 1993 और 1996 में पुनः उसी निर्वाचन-क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। 1997 में वे उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के उत्तरांचल विकास मंत्री बनें। सन् 2002 में उन्होंने उत्तरांचल विधान सभा के लिए थालिसियाँ निर्वाचन-क्षेत्र से चुनाव लड़ा पर वे हार गए। फिर 2007 में वे उसी निर्वाचन-क्षेत्र से उत्तराखण्ड विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।

अनिल बलूनी
अनिल बलूनी का जन्म 2 सिंतबर 1972 में उत्तराखंड के नकोट गांव (जिला पौड़ी) पट्टी- कंडवालस्यूं में हुआ। बलूनी युवावस्था से राजनीति में सक्रिय रहे। भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री, निशंक सरकार में वन्यजीव बोर्ड में उपाध्यक्ष, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और फिर राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख बने। वह 26 साल की उम्र में सक्रिय चुनावी राजनीतिक में उतर आए और राज्य के पहले विधानसभा चुनाव 2002 में कोटद्वार सीट से पर्चा भर, लेकिन उनका नामांकन पत्र निरस्त हो गया। इसके खिलाफ वे कोर्ट गए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में कोटद्वार से उपचुनाव लड़ा, लेकिन हार गए थे। इसके बाद भी वे सक्रिय रहे। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान वह छात्र राजनीति में सक्रिय थे और दिल्ली में संघ परिवार के दफ्तरों के आसपास घूमते-रहते थे। संघ के जाने-माने नेता सुंदर सिंह भंडारी से उनकी नजदीकियां बढ़ीं। जब सुंदर सिंह भंडारी को बिहार का राज्यपाल बनाया गया तो वह बलूनी को अपना ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) बनाकर अपने साथ पटना ले गए। इसी के बाद सुंदर सिंह भंडारी जब गुजरात के राज्यपाल बन कर गए तो बलूनी उनके ओएसडी थे। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे।
अनिल बलूनी ने नरेंद्र मोदी के साथ मेलजोल बढ़ाना शुरू कर दिया। अगले कुछ सालों के भीतर वह मोदी के पसंदीदा लोगों में शामिल हो चुके थे। शाह के 2014 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अनिल बलूनी को पार्टी प्रवक्ता और मीडिया प्रकोष्ठ का प्रमुख बनाया गया। एक तरह से वो अमित शाह के भी सबसे भरोसेमंद लोगों में शामिल हो गए।वह मीडिया संबंधी कार्यों को देखते हैं।

धनसिंह रावत
धन सिंह रावत का जन्म 7 अक्टूबर 1972 धन सिंह रावत का जन्म पौड़ी गढ़वाल के एक गाँव में हुआ था और गाँव के स्कूल में उनकी शिक्षा हुई थी। उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से मास्टर और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य हैं। उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा के सदस्य के रूप में श्रीनगर गढ़वाल के निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। एक राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया है।वह 2012 में श्रीनगर गढ़वाल के निर्वाचन क्षेत्र में राज्य विधानमंडल के लिए चुनाव जीतने में विफल रहे। उन्होंने 2017 में विधायिका में प्रवेश किया और तब से राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया है; (स्वतंत्र प्रभार) उच्च शिक्षा के लिए जिम्मेदारी के साथ, सहकारी समितियाँ, डेयरी विकास और प्रोटोकॉल।