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CM धामी ने बरेली में किया उत्तरायणी मेले का शुभारंभ, कहा-उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर हो रहे हैं संस्कृति और विरासत संरक्षण के काम

बरेली /देहरादून उत्तरायणी मेला बरेली क्लब मैदान पर 9 जनवरी से 11 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेले का उद्घाटन किया. इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति के लिए उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए कलाकारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई. मेले में सौ से अधिक स्टाल लगाए गए थे, जहां पहाड़ की प्रसिद्ध बाल मिठाई, बांस के अचार के साथ खानपान के अन्य सामान उपलब्ध थे. मेले का आरंभ पारंपरिक रंगयात्रा से हुआ था, जो कोतवाली के सामने अंबेडकर पार्क से शुरू हुई थी.

100 साल पुराना है उत्तरायणी मेला
उत्तरायणी मेले का आयोजन उत्तराखंड के बागेश्वर और उत्तर प्रदेश के बरेली में हर साल मकर संक्रांति पर होता है. बरेली में सिर्फ महामारी के वक्त मेले का आयोजन नहीं हो पाया था, लेकिन पिछले साल तीन दिवसीय मेले की शुरुआत हुई. उत्तरायणी मेले का इतिहास लगभग 100 साल पुराना है.

मेला का आरंभ और धार्मिक महत्त्व
उत्तरायणी मेला कुमाऊं क्षेत्र के बागेश्वर जिले में हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है. यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रदर्शित करता है. इस दिन लोग सरयू और गोमती नदी में स्नान करने के लिए एकत्रित होते हैं. मान्यता है कि मकर संक्रांति पर स्नान करने से पापों का नाश होता है. दूर-दूर से लोग इस अवसर पर पवित्र स्नान के लिए आते हैं.

सांस्कृतिक गतिविधियाँ
उत्तरायणी मेला कुमाऊं की पारंपरिक कला, नृत्य और संगीत का प्रमुख केन्द्र बनता है. यहां ‘चोइलिया’ नृतक अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लेते हैं. स्थानीय कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए कुमाऊं की संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं. मेले में बुनकरों और कारीगरों के स्टॉल होते हैं, जहां हस्तनिर्मित शॉल, कंबल, बांस की वस्तुएं, लोहे के बर्तन और मसाले बिकते हैं. ये उत्पाद कुमाऊं की लोक कला और कारीगरी का अद्भुत उदाहरण हैं.

कक्षा तीन तक शिक्षा देने की तैयारी
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मेले का उद्घाटन किया और लोगों से अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़े रहने का आग्रह किया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि कक्षा तीन तक मातृभाषा में शिक्षा देने की कोशिश की जा रही है.

 200 से ज्यादा लगाए गए स्टाल 
इस बार मेले के आयोजन में पूरे देशभर से आए 200 से ज्यादा स्टाल लगाए गए हैं. यह मेला 1993 से बरेली में होता आ रहा है. मेले में पूरे देश से आए 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिसमें उत्तराखंड की संस्कृति और हस्तशिल्प की झलक दिखाई देगी। मेले की शुरुआत रंगयात्रा से हुई, जिसमें लोक कलाकारों ने उत्तराखंड की संस्कृति के रंग बिखेरे.

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Author: nirbhiknazar

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