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उत्तराखंड: वेटरन्स डे ‘एक शाम सैनिकों के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन, राज्यपाल और सीएम ने की शिरकत

देहरादूनः सशस्त्र बल भूतपूर्व सैनिक दिवस (वेटरन्स डे) के मौके पर ‘एक शाम सैनिकों के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. राजभवन में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह और सीएम धामी ने प्रतिभाग किया. कार्यक्रम में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने वीरता पदक विजेताओं और सराहनीय कार्य करने वाले पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया. साथ ही अर्धसैनिक बल के जवानों और अधिकारियों को राज्यपाल प्रशंसा पत्र भी सौंपा गया. कार्यक्रम में कुमाऊं स्काउट्स, 4वीं बटालियन असम रेजिमेंट और 14वीं राजपूताना राइफल्स को भी उनके सराहनीय योगदान के लिए यूनिट प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया.

वहीं, राज्यपाल ने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों का अनुभव और उनकी नेतृत्व क्षमता राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति उनका जीवन अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है, जो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने भूतपूर्व सैनिकों से आग्रह किया कि वे अपने अनुभवों से समाज और देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहयोग करें. साल 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में वे अपना योगदान दें. भूतपूर्व सैनिक उद्यमिता और स्टार्टअप के क्षेत्र में आगे आएं और समाज और राष्ट्र को प्रेरित करने का काम करें.

राज्यपाल ने कहा कि आज का दिन हमें यह संकल्प लेना है कि हम अपने वीर शहीदों के परिजनों की देखभाल और उनकी हर परिस्थिति में सहयोग करते हुए उनके लिए स्वास्थ्य सेवाओं, ईसीएचएस लाभ और अन्य आवश्यक सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे. उत्तराखंड वीरों की भूमि है, जिसे ‘देवभूमि’ के साथ-साथ ‘वीरभूमि’ भी कहा जाता है. यहां अनेक वीर सपूतों ने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वेच्च बलिदान दिया है. ‘एक शाम सैनिकों के नाम’ कार्यक्रम हमारे सैनिकों और उनके परिवारों को संदेश देता है कि उनका बलिदान न केवल हमारे लिए अमूल्य है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है.

वहीं, सीएम धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड वीरभूमि के रूप में भी जाना जाता है. क्योंकि भारतीय सेना के गौरवमयी इतिहास में उत्तराखंड के हमारे वीर सैनिकों का योगदान अतुलनीय रहा है. इतिहास इस बात का साक्षी है कि हमारे वीर सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी. प्रदेश के वीरों ने अपनी बहादुरी और साहस से हमेशा ये दिखलाया है कि देवभूमि ना केवल विश्व को शांति का मार्ग दिखा सकती है. बल्कि आवश्यकता पड़ने पर शौर्य और वीरता का भी प्रदर्शन कर सकती है. ये हम सभी के लिए गर्व की बात है कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में अब तक करीब 1834 सैनिकों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. ये संख्या हर साल लगातार बढ़ती जा रही है.

इन सेवारत और भूतपूर्व सैनिकों को किया गया सम्मानित

मेजर गोविंद सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल शशि भूषण, कोमोडोर हनिश सिंह कार्की, कर्नल पीयूष भट्ट, कर्नल ऐश्वर्या जोशी, मेजर शिवम गुप्ता, मेजर प्रतीक बिष्ट, कैप्टन अक्षत उपाध्याय, मेजर सौरभ थापा, मेजर मनिक सती, मेजर प्रकाश भट्ट, मेजर रोहित जोशी, नायब सूबेदार राजेंद्र प्रसाद, नायब सूबेदार पंकज सिंह झिंकवाण, हवलदार गोविंद सिंह, नायक ललित मोहन सिंह, नायक दीपक सिंह, नायब सूबेदार पवन सावंत, पूर्व सैनिकों में नायक विनोद कुमार और लांसनायक राजेश सेमवाल के अलावा सैनिक कल्याण विभाग के सूबेदार मेजर मोहन लाल भट्ट व हेमचंद चौबे.

इन अर्धसैनिक बल के जवान और अधिकारी को किया गया सम्मानित

भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के हेड कॉन्स्टेबल कपिल देव और सिपाही (महिला) अहोंगशागबाम नानाओ देवी, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के उपनिरीक्षक नवज्योति मनराल, मुख्य आरक्षी अवनीश कुमार सिंह और आरक्षी राउत योगेंद्र रामचंद्र, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के निरीक्षक बिरेंद्र सिंह और हवलदार (महिला) अनिता राणा.

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Author: nirbhiknazar

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