रांची ब्यूरो
धनबाद: आजकल कौन आदमी ऐसा है जिसे पैसे की जरूरत नहीं, काम की जरूरत नहीं, नौकरी की जरूरत नहीं और ये जरूरत गरीब आदमी मेहनत मजदूरी करके या पढ़ा लिखा व्यक्ति बाहर शहरों मे नौकरी करके पूरी करता है। और अगर अपने शहर मे काम धंधा नहीं होता तो मजदूर अपनी बेबसी के कारण बाहर मजदूरी करने के लिए मजबूर हो जाता है और निकल पड़ता है शहर की तरफ ताकि परिवार की जीविका चला सके। लेकिन झारखंड के इस शख्स का मामला बेहद हैरान करने वाला है। नौकरी की उम्मीद में दिल्ली गए एक बुजुर्ग के साथ ऐसा धोखा हुआ कि अब वे सपने में भी इस वाकये की याद न आने की दुआ मांग रहे हैं। नौकरी की आस लिए साहिबगंज की पहाड़िया जनजाति के बर्जोम बामडा पहाड़िया कुछ माह पूर्व दिल्ली गए थे। बिचौलिए ने नौकरी का झांसा देकर बर्जोम की पाई-पाई छीन ली और उसे सड़क पर छोड़ दिया। बुजुर्म बर्जोम दिल्ली से रेलवे ट्रैक पर पैदल 1182 किलोमीटर का सफर तय करके धनबाद पहुंचे। महुदा में रोटी बैंक के सदस्यों ने जब उनकी दास्तान सुनी तो उन्हें बस पर बैठा कर ससम्मान उनके घर साहिबगंज भेजा।

बर्जोम बामडा साहिबगंज के पतना प्रखंड में तालझरी, आमड़भिठा के रहनेवाले हैं। घर पर उनके साथ उनकी पत्नी रहती हैं। अच्छे जीवनसाथी होने का फर्ज निभाते हुए वे दिल्ली में कामकाज की तलाश में पहुंचे थे। कुछ माह पूर्व घर से दिल्ली जाने के दौरान बर्जोम ने अपनी सारी जमा पूंजी साथ रख ली थी। जो बिचौलिया उन्हें लेकर दिल्ली गया था, पहले तो उसने सब्जबाग दिखा कर उनका सारा पैसा ऐंठ लिया। बाद में वह रफूचक्कर हो गया। दिल्ली में कई दिनों तक वे सड़कों पर भूखे बिलखते रहे। इधर-उधर से मांग कर कभी पेट भरा तो कभी भूखे पेट ही सोना पड़ा। जब बिचौलिये से उनका विश्वास टूटा तो उन्होंने अपने घर पतना लौटने की ठानी। जेब में पैसे नहीं थे सो उन्होंने घर आने के लिए उन्होंने रेल पटरी पकड़ ली। उन्होंने बताया कि एक माह से अधिक समय तक वे रेलवे ट्रैक पर पैदल चले। रास्ते में लोगों से मांग कर वे अपना पेट भरते थे। महुदा में जब रोटी बैंक के सदस्यों को पता चला कि वे कई दिनों से भूखे हैं तो उन्हें सदस्यों ने पहले भरपेट खाना खिलाया। उनके घर भेजने का इंतजाम कराया।
इस घटना को सुनने के बाद हर इंसान की आंखे शर्म से झुक रही हैं, और आँसू निकल रहे हैं, बुजुर्ग की हालत देखकर जुबान से नौकरी देने वाले शख्स के लिए बददुआ निकल रही है की आखिर कोई किसी गरीब को कैसे इस तरह छोड़ सकता है और कुछ देने की बजाए कैसे किसी मजबूर आदमी से उसकी आना पाई छीन सकता है। लेकिन बर्जोम ने बाहर जाने के नाम पर तौबा कर ली है उनका कहना है की वो अपने गाँव मे रहकर की रोज़ी रोटी कमाएंगे।