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देहरादून: जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय मे मनाया गया 19 वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस

देहरादून: 19वें राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय, विकास भवन, देहरादून में पद्म विभूषण सांख्यिकीविद् प्रशान्त चन्द्र महालनोबिस के 132वें जन्म दिवस पर राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, शशि कान्त गिरि द्वारा महालनोबिस की फोटो पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलित किया गया, तत्पश्चात् कार्यालय के समस्त अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा श्रद्धा सुमन के पुष्प अर्पित किये गये।

सर्वप्रथम जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, शशि कान्त गिरि द्वारा महालनोबिस के सांख्यिकी के क्षेत्र में किये गये कार्यों पर गहनता से प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि महालनोबिस द्वारा वर्ष 1931 में भारतीय सांख्यिकीय संस्थान की स्थापना कलकत्ता में की गयी। आजादी के पश्चात इन्हें नवगठित मंत्रीमण्डल में सांख्यिकीय सलाहकार नियुक्त किया गया। महालनोबिस का सबसे बड़ा योगदान उनके द्वारा शुरू किया गया सैम्पल सर्वे की संकल्पना है। अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित महालनोबिस वर्ष 1945 में रॉयल सोसाईटी लंदन के फेलो चुने गये तथा वर्ष 1957 में अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान का सम्मानित अध्यक्ष बनाया गया। भारत सरकार ने भी इन्हें वर्ष 1968 में प‌द्मविभूषण से सम्मानित किया।

19वें राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर इस वर्ष की थीम “75 Years of National Sample Survey” पर प्रकाश डालते हुए गिरि द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की स्थापना अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र के योगदान को आंकलित करने के लिये किया गया है। स्थापना से लेकर अबतक के 75 वर्षों में असंगठित क्षेत्र के विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के आर्थिक योगदान का आंकलन करने हेतु 79 सर्वेक्षण कार्यक्रम संचालित किये जा चुके हैं तथा वर्तमान में 80 वां सर्वेक्षण गतिमान है जिसमें सामाजिक उपभोग पर सर्वेक्षण एवं स्वास्थ्य पर आंकड़े एकत्र किये जाने हैं। इनसे प्राप्त आंकड़ों का उपयोग सकल घरेलू उत्पाद के विभिन्न आयामों, अर्थव्यवस्था की विकास दर तथा प्रति व्यक्ति आय की गणना करने में किया जाता है।

इसी क्रम में अर्थ एवं सांख्यिकीय सेवा संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष धीरज गुप्ता ने रेखांकित किया कि महालनोबिस द्वारा कृषि क्षेत्र में उत्पादन का आंकलन करने के लिये नमूना परीक्षण की अवधारणा को प्रतिपादित किया गया, साथ ही राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण को भारत में स्पष्ट रूप से लागू कराया गया। वरिष्ठ अपर सांख्यिकीय अधिकारी प्रताप सिंह भण्डारी ने बताया कि महालनोबिस द्वारा 1950 में सांख्यिकीय सर्वेक्षणों के अध्ययन हेतु राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना की गयी। इसी वर्ष भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय सांख्यिकी सर्वेक्षण संस्थान की स्थापना की गयी। अपर सांख्यिकीय अधिकारी श्रीमती शालू भटनागर ने बताया कि भारत की दूसरी पंचवर्षीय योजना महालनोबिस के दिशा-निर्देश में ही तैयार हुयी थी। इस विषय को और विस्तारित करते हुए अपर सांख्यिकीय अधिकारी नवीन कुमार द्वारा बताया कि द्वि-क्षेत्रीय मॉडल के अन्तर्गत सार्वजनिक क्षेत्र का विकास एवं औद्योगिकीकरण मुख्य अवधारणा थी जिसके आधार पर द्वितीय पंचवर्षीय योजना का निर्माण किया गया। इस वर्ष की थीम “75 Years of National Sample Survey” पर अपर सांख्यिकीय अधिकारी डॉ० बृजपाल सिंह ने बत्ताया कि 1950 के दशक में भारत को अपना पहला डिजिटल सांख्यिकीय कम्प्यूटर लाने के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उनके द्वारा प्रस्तुत पायलेट सर्वेक्षण की अवधारणा में नमूनाकरण विधियों की उपयोगिता की वकालत की गयी जो आज के सन्दर्भमें भी प्रासंगिक हैं। इसका उपयोग हम निजी, सार्वजनिक तथा शासकीय कार्यों में करते हैं।

इस अवसर पर जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय के अब्बल सिंह नेगी, सरबीन भण्डारी, सतेन्द्र नेगी, मोहित भण्डारी, हिमांशु बिष्ट, कु० संगीता नेगी, विनोद कुमार, अमित कुमार, राजेन्द्र सिंह, दीवान सिंह चौहान आदि उपस्थित थे। अन्त में जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी द्वारा उपस्थित सभी कार्मिकों को सांख्यिकी के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने हेतु प्रेरित किया गया एवं सभी को शुभकामनाएं दी गयी।

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Author: nirbhiknazar

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