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उत्तराखंड में आईएएस और पुलिस अधिकारियों के नाम से मांगे जा रहे पैसे, अब शासन ने लिया ये फैसला 

देहरादून: देशभर में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. पलक झपकते ही यह साइबर अपराधी न केवल फाइनेंशियली चपत लगा रहे हैं. बल्कि, व्यक्तिगत छवि को भी धूमिल करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं. उत्तराखंड जैसे छोटे से राज्य में भी आए दिन साइबर अपराधों की संख्या में इजाफा हो रहा है. हैरानी की बात ये है कि आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े अधिकारियों को निशाना बना रहे हैं.

शासन में बैठकर सरकार की प्रशासनिक कार्यप्रणाली चलाने वाले बड़े-बड़े अधिकारियों से लेकर जिले में बैठे अधिकारी तक इनके निशाने पर हैं. कभी सोशल मीडिया की गलत आईडी बनाकर तो कभी व्हाट्सएप्प नंबर पर अधिकारी की फोटो लगाकर पैसे मांगने की घटनाएं रोजाना आम होती जा रही है. अब उत्तराखंड शासन ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए सख्ती से निपटने का मन बना लिया है.

प्रमुख सचिव के नाम से दूसरी बार हुआ ठगी का प्रयास: ताजा मामला उत्तराखंड शासन में वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम से जुड़ा हुआ है. जहां शातिरों ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नाम से एक व्हाट्सएप आईडी बनाई, फिर उसमें मीनाक्षी सुंदरम की फोटो लगाई. इसके बाद शुरू किया पैसे मांगने का सिलसिला. शातिर ने अन्य जगहों पर भी उनकी फोटो का इस्तेमाल करके पैसे मांगने का प्रयास किया. कई लोगों से पैसे की डिमांड की गई है. अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उनके नाम से पैसे मांगने की यह घटना कोई पहली बार नहीं हुई है. इससे पहले भी उनके नाम से इसी तरह से पैसों की डिमांड हो चुकी है और दोनों ही मामलों में उन्होंने पुलिस को भी जानकारी दी है.

कॉमन है पैसे मांगने का तरीका: इसी तरह की घटना उत्तराखंड के आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन के साथ भी घट चुकी है. हाल ही में उनकी फोटो लगाकर उनके नाम से आईडी बनाई, फिर लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई. उसके बाद एक-एक कर कई लोगों को मैसेज करके पैसे भी मांगे गए. इस मामले में भी पुलिस ने एक मुकदमा दर्ज किया है.

हालांकि, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इसके साथ ही रुद्रपुर के मुख्य उद्यान अधिकारी हरीश तिवारी की भी फेसबुक आईडी बनाकर उनके ही परिचित लोगों से पैसे मांगने की शिकायत सामने आ चुकी है. इस घटना में उनके दुर्घटना होने और कुछ पैसे ट्रांसफर करने की आवाज में मैसेज किए गए. इस मामले में भी साइबर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया हुआ है.

पुलिस के बड़े अधिकारियो के नाम से भी मांगे गए पैसे: अपराधियों ने इस मामले में पुलिस अधिकारियों को भी पीछे नहीं छोड़ा है बीते कुछ साल पहले उत्तराखंड के डीजीपी के रहे अशोक कुमार के नाम से भी फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर पैसे मांगे गए थे इस मामले में भी पुलिस ने अलग-अलग छाती में बनाकर करवाई तो की लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. उसके बाद बॉडी के जिलाधिकारी रहे आशीष चौहान के नाम से भी फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर अपराधियों ने पैसे मांगने की कई तरकीब अपनाई यह मामला भी जब सामने आया तो इस मामले में भी साइबर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था.

एक के बाद एक आईएएस आशीष चौहान के नाम से तीन बार अलग-अलग आईडी बनाकर ठग ने पैसे की डिमांड की. इस घटना से पहले उधम सिंह नगर के एसपी रहे मंजूनाथ टीसी के नाम से फेसबुक आईडी बनाकर लोगों से पहले बातचीत की गई, फिर रिक्वेस्ट भेजने के बाद पैसों की डिमांड भी की. इस घटना के बाद आईपीएस मंजूनाथ टीसी को खुद अपील करनी पड़ी थी.

विदेशी धरती से हो रहा है ये अपराध: उत्तराखंड में लगातार इस तरह के अपराध बढ़ने से न केवल अधिकारी परेशान हैं. बल्कि, साइबर पुलिस भी रोजाना आ रही इस तरह की शिकायतों से हैरान हैं. एसटीएफ एसएसपी नवनीत भुल्लर की मानें तो ऐसे मामलों में सबसे पहले हम संबंधित व्यक्ति की आईडी बंद करवाते हैं. ताकि, उसका और गलत इस्तेमाल न किया जा सके. उनका कहना है कि अमूमन यह अपराध विदेशी धरती से ही हो रहे हैं. इसलिए इनका तरीका और पैसे मांगने का स्टाइल एक जैसा है, शायद यही कारण है कि ऐसे मामलों में जल्दी से किसी की धरपकड़ नहीं हो पाती है, लेकिन हम अपनी तरफ से उस आईडी को पूरी तरह से बंद करवा कर आगे की कार्रवाई करते हैं. ताकि, कोई अन्य ठगी का शिकार न हो.

शासन स्तर पर हो रहा है ये काम: उत्तराखंड में लगातार इस तरह की घटना के बाद शासन भी गंभीर है. वित्तीय और साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए EOU (आर्थिक अपराध इकाई- आर्थिक और साइबर अपराधों से संबंधित मामलों के लिए नोडल एजेंसी) को उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने मजबूत करने के निर्देश दिए हैं.

मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि आज के डिजिटल युग में वित्तीय और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए सभी बैंकर्स एवं इंप्लीमेंटेशन एजेंसी व विभागों के बीच बेहतर तालमेल हो. वित्तीय अपराधों से संबंधित FIR, इन्वेस्टीगेशन, चार्जशीट, कंप्लायंस आदि में तेजी दिखाई जाए. इस प्रकार के वित्तीय फ्रॉड को रोकने के लिए बड़े कारगर संस्थागत प्रयास किए जाए.

इसके साथ ही मुख्य सचिव ने EOU (Economic Offence Wing) जो अभी सीबीसीआईडी के अधीन कार्यरत हैं, इस एजेंसी को इंडिपेंडेंस एजेंसी बनाने के लिए इस्तेमाल में लाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने बताया कि साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर में बैंक प्रतिनिधि की भी अनिवार्य उपस्थिति हो. ताकि, वित्तीय फ्रॉड करने वाले किसी भी संस्थान, फर्म की वेबसाइट, पोर्टल को तत्काल ब्लॉक किया जा सके और लोगों का वित्तीय नुकसान होने से तत्काल बचाया जा सके.

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Author: nirbhiknazar

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