रांची ब्यूरो
धनबाद: राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के महामंत्री और राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के राष्ट्रीय सचिव ए के झा ने अपने प्रेस वक्तव्य में कहा है कि आज से 51 वर्ष पूर्व देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश के 14 प्रमुख प्राइवेट बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया यह सभी बैंक देश के पूंजी पतियों का था। पूंजीपतियों के हाथ से बैंक को लेकर देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने देश के मजदूर, किसानों ,आम ,गरीब शोषित- पीड़ित लोगों को बैंक सौंपने का काम किया।लाखों मजदूर कर्मचारी माननीय प्रधानमंत्री के आदेश से सरकारी नौकरी को प्राप्त किया। देश में खुशी का माहौल रहा। देश का बैंक देश के गांव में गया। देश के लोगों का काम आया। 51 वर्ष के बाद आज देश के वर्तमान भाजपा सरकार इतिहास के चक्र को उल्टा घुमा रहा है। देश के तमाम बैंकों का निजीकरण करके मजदूर किसानों आम जनता से बैंक को छीन कर देश के पूंजी पतियों के हवाले कर रही है। लोगों के रोजगार छीनी जा रहे हैं। लोग बेरोजगारी के अग्नि में जल रहे हैं।

झा ने कहा वर्तमान भाजपा सरकार ने नीति आयोग के सलाह पर देश के 12 मंत्रालय को इस बात की हिदायत की है कि वह सूची तैयार करें कि देश के सरकारी कंपनियों को देश के कुछ पूंजीपतियो के हवाले करके इसका प्राइवेटाइजेशन किया जा सके। इंदिरा जी ने जब बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था ना केवल संपूर्ण भारत के लोगों ने बल्कि दुनिया के तमाम मजदूर किसानों ने इंदिरा जी के साहसिक फैसले का स्वागत किया था और कहा था दुनिया में आज की तारीख में गरीबों का इतना मजबूत सशक्त नेता नहीं है।
झा ने कहा कि नीति आयोग की सिफारिश पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार रेलवे को बेच रही है,रेलवे की जमीन को बेच रही है,रेलवे स्टेशन को बेच रही है,हजारों किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग को बेचा जा रहा है। हवाई जहाज में बेचे जा रहे हैं। एयरपोर्ट बेचा जा रहा है।बंदरगाह बेचा जा रहा है। बिजली का निजीकरण हो रहा है ।बीमा का निजीकरण हो रहा है। एलआईसी की शक्तियां घटाई जा रही है। उन्हें कमजोर की जा रही है ।रोड, हाईवे, स्पोर्ट, स्टेडियम, पेट्रोलियम ,शिपिंग कॉरपोरेशन सभी मजदूरों से छीन कर देश के चंद पूंजीपतियों के हवाले भाजपा सरकार कर रही है।
झा ने कहा की इन्हीं सरकारी बैंकों से कर्ज लेकर पूंजीपतियों ने बैंक को अपना कर्जा नहीं लौटाया। अपनी कंपनियों को दिवाला घोषित किया और उसी कंपनी को सस्ते भाव में सरकार पूजीपतियों के हवाले कर रही है जो बैंकों के कर्जदार है। पूंजीपती वर्तमान भाजपा सरकार के बल पर उसकी नीति के कारण तमाम सरकारी संपत्तियों पर वर्चस्व बढ़ा रही है।ज्ञात है अंबानी साहब का पेट्रोल एजेंसी जब पैसे के अभाव में काम नहीं कर पाया था उस समय देश का बीमा जीवन बीमा निगम आगे बढ़कर अंबानी साहब को आर्थिक मदद किया। उनके पेट्रोलियम कंपनी को देश हित में चलाने का काम किया। आज उसी बीमा कंपनी को फिर उन्हीं पूंजीपतियो के हवाले की जा रही है। मजदूर तबाह है।आम लोग भयभीत हैं। बेरोजगारी बढ़ रही है। गरीबी बढ़ रही है। बैंकों का कर्ज इतना बढ़ा दिया गया कि बैंक के पैसे वसूलने सरकारी मशीनरी ने राजनीतिक दबाव पर पूरा ढीलापन किया और पूंजीपतियों ने इसका लाभ लिया। लगभग 12 लाख करोड रुपए सरकारी बैंकों के एनपीए खाते में चला गया। सरकार टुकटुक देखती रही। सरकार की ताकत कमजोर रही इन पूंजी पतियों के सामने।
झा ने कहा प्राइवेट बैंक अगर इस देश का रास्ता होता।देश के हित में होता तो आईसीआईसीआई बैंक एक्सिस बैंक लक्ष्मी बैंक सभी लोगो से इसके भ्रष्टाचार को इसके आर्थिक लूट को इसकी पूरी कहानी को देश जान रहा है। इसलिए देश कभी भी प्राइवेट बैंकों के हाथ में ना विकास कर सकता है न सुरक्षित रह सकता है। बैंक का रोजगार लगभग बंद कर दिया गया है। जिन बैंकों के कर्मचारी और अधिकारियों ने नोटबंदी के दरमियान 24 घंटा काम किया। प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से उसके कार्य की सराहना की और कहा कि देश हित में बैंक का कर्मचारी सेना की तरह काम कर रहा है लेकिन उसी सेना को आज बेरोजगारी की अग्नि में सरकार की नीति के कारण जलना पड़ रहा है।
झा ने कहा डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल तक लगभग 70 हजार नौकरियां बैंकों में प्रतिवर्ष मिलते थे। देश के 70 हजार लोगों की रोजी रोटी मिलती थी जो पूरी तरह से बंद हो जाएगा।बैंक का मुनाफा एनपीए के द्वारा सरकारी संरक्षण में रखा गया है। डेढ़ लाख कामगार की रोजी-रोटी पर आज सवाल खड़ा हो गया है। बैंक के लोग त्राहिमाम कर रहे हैं।उनकी आवाज को कोई सुन नहीं रहा है। सरकार में कोई संवेदना नहीं है। ऐसे हालात में बैंक को एक सोच के तहत नुकसान कराया गया। उसका एनपीए बढ़ाया गया।देश के 130 करोड़ जनता के सामने या संसद में भी कर्ज लेने वाले पूंजीपतियों के कर्ज नहीं लौटाने वाले पूजी पतियों के नामों की सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई। देश आज अंधकार में है।देश को इस बात की जानकारी भाजपा सरकार को देना चाहिए कि बैंक के एनपीए के लिए कौन लोग जिम्मेवार है। किन-किन पूंजीपतियों ने बैंक से लोन लेकर पैसा नहीं लौटाया और अपने को दिवालिया घोषित करके सरकारी संरक्षण में अपने एनपीए अमाउंट को राइट ऑफ कराने का प्रयास किया। वर्तमान भाजपा सरकार अपने 6 साल में किसी भी भगोड़े पूंजीपति को विदेश से देश लाने में कामयाब नहीं हो सका। एक तरफ नोटबंदी ने काला धन को सफेद धन मे बदलने का काम किया। नोटबंदी के दरमियान कारपोरेट लोगों ने ऐसा काफी लाभ लिया। 200 गरीब बैंकों के पंक्ति में मर गए लेकिन हमने एक पैसे का मुआवजा उस परिवार को नहीं दिया। हमने संवेदना के एक शब्द भी पार्लियामेंट में नहीं कहा। लगभग 300 किसान सरकार के गलत कानून के चलते मौत के शिकार हुए।हमने उनकी संवेदना में भी सहानुभूति के दो शब्द नहीं कहे ।2 मिनट का मौन धारण नहीं किया। इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा। हमने उस परिवार के लोगों को एक पैसे मुआवजा नहीं दिया। किसानों के आंदोलन में सेना के पिता अभिभावक मौत के शिकार हुए जिसका हम नारा लगाते हैं जिस पर हमारा देश सुरक्षित है लेकिन भाजपा सरकार ने जिसे अन्नदाता कहा उसे मौत के मुंह में जाने के लिए विवश होना पड़ा। आज सैकड़ों पेंशन धारी महाराष्ट्र बैंक के घपले के कारण मौत के शिकार हुए। हमने एक पैसे मुआवजे के रूप में नहीं दिया। वह परिवार त्राहिमाम कर रहा है। हमारी सोच को क्या हुआ? हमारी समझदारी पर देश सवाल उठा रहा है। कारपोरेट की पूंजी कोरोना महासंग्राम में 300 गुना अधिक बढ़ा दूसरी ओर मजदूरों को 70 लाख ईपीएफ का अकाउंट बंद करना पड़ा ।उस से पैसे निकालना पड़ा और वह पैसे कार्य में नहीं सिर्फ परिवार का भोजन चलाने में लगा। सरकार सब कुछ जानती है लेकिन सरकार ने छोटे उद्योगों के लिए कुछ नही सोचा। उद्योग में काम करने वाले मजदूरों के बारे में नही सोचा। कोरोना महा संक्रमण में देश के लगभग 15 लाख स्कूल बंद हो गया है। 2 वर्ष से बच्चे प्रभावित हैं उन्हें अपना ट्यूशन फी देना पड़ रहा है सरकार ने उन बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई रास्ता नहीं निकाला। उनके पैसों को अदा करने का काम नहीं किया।हमने शिक्षा को भी मंहगा कर दिया है। जिन नौजवानों ने प्रधानमंत्री योजना के तहत बैंकों से लोन लिया पढ़ाई के लिए आज रोजगार न मिलने के कारण वह पैसा लौटाने के लिए मजबूर है सरकार को इस पर फैसला लेना चाहिए। पूरे देश के एक करोड़ 27 लाख असंगठित क्षेत्र के मजदूरों ने सिर्फ कोरोना महासंक्रमण काल में परिवार को बचाने के लिए सरकार के सहायता न मिलने के कारण ईपीएफ से अपना पैसा पूरी तरह निकाल लिया। लगभग 90 लाख सरकारी कार्यालयों में रिक्तियां हैं चाहे वह केंद्र में हो चाहे वह राज्य में हो। सारी बहालिया बंद हो गई है। हमने रोजगार के सारे दरवाजे बंद कर दिए। इस देश की सबसे बड़ी समस्या विकास की नहीं, सड़क और पानी की नहीं, सबसे बड़ी समस्या भूख और पापी पेट के सवाल का है? सरकार इन दो महत्वपूर्ण सवालों पर ना तो कुछ बोल रही है ना कुछ कर रही है। ना सरकार के पास कुछ दृष्टि है। देश की जनता को ,देश के नौजवानों को ,सार्वजनिक प्रतिष्ठान के कर्मचारियों को, देश के सरकारी कर्मचारियों को, देश के किसानों को आम लोगों को छोटे व्यापारियों को देश हित में चिंतन करना चाहिए और सरकार के सामने ऐसी स्थिति पैदा करना चाहिए जिससे सरकार जनविरोधी फैसला लेने से अपने को रोक सके।
झा ने कहा बैंकों को बेचना भारत के वित्तीय आर्थिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करना है। जिन प्रमुख पब्लिक सेक्टर को अभी तक बेचा गया है उससे लगभग 35 लाख कर्मचारी बेरोजगार हो चुके हैं। ऐसी हालात में देश के मजदूर और किसान प्रदेश के नौजवान संयुक्त रूप से भारतीय जनता पार्टी सरकार को पूंजीवादी फैसले लेने से रोक सकती है। समय इस बात का आ चुका है देश की गरीबी बेरोजगारी भुखमरी की समस्या पर हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्श और सिद्धांतों पर चलकर सरकार को मजबूर करें कि वह जनविरोधी फैसला ना ले सके और सरकार को इस बात का एहसास करा सके कि देश के असली ताकत देश का मजदूर किसान नौजवान है देश के चंद पूंजीपति नहीं। देश के चंद पूंजीपतियों के बल पर भारत जैसे देश को नहीं चलाया जा सकता है।भारतीय जनता पार्टी सरकार को अटल बिहारी वाजपेई की सरकार का अनुकरण करना चाहिए ।जिस अटल बिहारी वाजपेई सरकार ने विनिवेश किया ।विनिवेश को प्रारंभ किया लेकिन सरकारी नियंत्रण को समाप्त नहीं होने दिया।पूजीपतियों के हवाले देश के मजदूर और किसानों को पेट के सवाल पर विवश होने की स्थिति पैदा नहीं होने दी। उन्होंने भी 17 पब्लिक सेक्टर का निर्माण किया। इस भाजपा सरकार ने वाजपेई जी के द्वारा बनाए गए भारत संचार निगम लिमिटेड को पहली बार पहले कदम के रूप में अंबानी के हाथों बेच दिया। आज भी डेढ़ लाख कर्मचारी जो बीएसएनल के भीआरस दे चुके थे जो सरकार के दबाव में वीआरएस दिए उन्हें ना तो अंबानी पैसा दे रहा है ना तो सरकार उसका भुगतान कर रही है। मजदूर का पूरा त्राहिमाम कर रहा है।
। झा ने कहा इंटक पूरी ताकत से बैंक के कर्मचारियों बीमा के कर्मचारियों सहित सभी सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों के साथ है। देश के किसानों के साथ है। देश के मजदूरों के साथ है और असंगठित मजदूर भी हमारे सदस्य और हम सभी श्रमिक संगठनों को एक ताकत से एक आवाज से वर्तमान सरकार की मजदूर विरोधी ,किसान विरोधी जन विरोधी, नौजवान विरोधी, छोटे उद्योग विरोधी नीति का विरोध मजबूती से करना चाहिए तभी हम देश में गांधी जी के सपनों का भारत ,इंदिरा जी के अरमानों का भारत बना सकते हैं और देश खुशहाल हो सकता है।