ब्यूरो रिपोर्ट
देहारादून: उत्तर प्रदेश के डासना इलाके में मंदिर के आगे लगा एक बोर्ड चर्चा का विषय बना था। इस बोर्ड पर गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित बताया गया था। यह कदम गाजियाबाद के डासना स्थित डासना देवी मंदिर में मुस्लिम समुदाय के एक किशोर को पानी पीने के लिए प्रताड़ित किए जाने के बाद सामने आया था। इस मंदिर में बोर्ड लगा था जिस पर लिखा था कि अंदर मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है। यह बोर्ड मंदिर के मुख्य पुजारी महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के निर्देश पर लगाया गया था। हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश महासचिव जीतू रंधावा से जब बैनरों के बारे में पूछा गया तब उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम यति नरसिंहानंद सरस्वती का समर्थन करने के लिए उठाया गया था। हालांकि, किशोर पर हमले का मामला सामने आने के बाद धौलाना से बसपा विधायक असलम चौधरी ने दावा किया कि मंदिर उनके पुरखों की विरासत है। उन्होंने कहा कि वे मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने वाला पोस्टर हटा देंगे।

वहीं अब उत्तराखंड के कई मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित के बोर्ड लगा दिए गए हैं। ये बैनगर हिंदू युवा वाहिनी की ओर से लगाए गए हैं। बैनर में इस बात का जिक्र किया गया है कि मंदिर हिंदुओं का तीर्थस्थल है, इसमें गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। उत्तराखंड मे ये ये बैनर दक्षिणपंथी समूह हिंदू युवा वाहिनी द्वारा लगाए गए जिसके सदस्यों का दावा था कि वे उत्तराखंड के सभी मंदिरों में ऐसे बैनर लगाएंगे। ये बैनर देहरादून के चकराता रोड, सुद्धोवाला और प्रेम नगर इलाकों में लगाए गए थे। उत्तराखंड के देहरादून के 150 से अधिक मंदिरों में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश प्रतिबंधित करने वाला बैनर लगा दिया गया था टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ये बैनर दक्षिणपंथी समूह हिंदू युवा वाहिनी द्वारा लगाए गए जिसके सदस्यों का दावा है कि वे उत्तराखंड के सभी मंदिरों में ऐसे बैनर लगाएंगे। वहीं पुजारियों ने बैनर लगाए जाने की जानकारी न होने की बात कही। पुलिस ने बैनर पर लिखे मोबाइल नंबर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश महासचिव जीतू रंधावा पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का केस दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस ने इस मामल में कहा है कि बीजेपी और RSS द्वारा धार्मिक ध्रुवीकरण करने की साजिश कर रही है। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड सभी की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है। सामान्यतः न कोई मुस्लिम मंदिर जाता है और न ही कोई हिंदू मस्जिद जाता है। फिर भी इस तरह का बैनर लगाना गलत है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए ऐसा कर रही है।