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उत्तराखंड: सांख्यिकी संवर्ग में युवाओं को मिलेगा भर्ती का मौका, पहली बार बनी सेवा नियमावली, जानिये क्या है खास

देहरादून: उत्तराखंड गठन के बाद पहली बार प्रदेश में पशुपालन विभाग सांख्यिकीय संवर्ग सेवा नियमावली बनाई गई है. सेवा नियमावली बनने के बाद राज्य में सांख्यिकीय फील्ड से जुड़े युवाओं को सरकारी नौकरी में आने का मौका मिल सकेगा. खास बात ये है कि इसके चलते उन लोगों को भी लाभ मिल सकेगा जो नियमावली न होने के कारण पदोन्नति से महरूम थे.

उत्तराखंड पशुपालन विभाग में सांख्यिकी संवर्ग की सेवा नियमावली जल्द धरातल पर उतर जाएगी. इसके लिए शासन स्तर पर शासनादेश जारी होने जा रहा है. दरअसल इस संवर्ग को लेकर नियमावली ना होने से कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही थी. जिन्हें अब दूर किया जा सकेगा. इसके अंतर्गत न केवल युवाओं को रोजगार का मौका मिलेगा बल्कि विभाग में कार्यरत कर्मियों को भी पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा.

पशुपालन विभाग सांख्यिकीय सेवा नियमावली के धरातल पर उतरते ही विभाग में नई भर्ती की जा सकेगी, जोकि नियमावली ना होने के कारण अबतक नहीं की जा पा रही थी. विभाग के स्तर पर सांख्यिकीय पदों के लिए अधियाचन नहीं भेजे जा पा रहे थे, जबकि विभाग में कुल 56 पद मौजूद हैं, हालांकि कुछ पद इसमें भरे गए हैं, लेकिन कई पद जो खाली हैं. उनपर निर्णय नहीं लिया जा पा रहा था. इतना ही नहीं विभाग में मौजूद कर्मचारी और अधिकारियों को नियमावली ना होने के कारण प्रमोशन का भी सही समय पर लाभ नहीं मिल पा रहा था.

खास बात यह है कि पूर्व में कैबिनेट भी इस नियमावली को मंजूरी दे चुकी है, जबकि अब शासन स्तर से नियमावली को धरातल पर उतारने के लिए शासनादेश का इंतजार है. राज्य स्थापना के 25 साल में भी विभाग स्तर पर यह नियमावली नहीं बनाई जा सकी थी. जिसके कारण कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और दूसरे सेवा संबंधी काम प्रभावित हो रहे थे.

पशुपालन सचिव डॉ बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने इस सेवा नियमावली को अहम बताया है. राज्य में अब तक विभाग के लिए उत्तर प्रदेश की पुरानी सांख्यिकीय सेवा नियमावली 1981 लागू थी. जिसके आधार पर ही तम एम कर्मचारी संबंधी प्रावधान किया जा रहे थे. हालांकि इसके बावजूद शासन ने 2009 और 2012 में सांख्यिकीय संवर्ग के विभिन्न पदों में संशोधन किए थे. जिसके तहत इसके ढांचे में पुनर्गठन का काम हुआ था.

विभाग में संख्यिकी अधिकारी, सहायक सांख्यिकी अधिकारी, वरिष्ठ संख्यिकी सहायक, संख्यिकी सहायक और कनिष्ठ संख्यिकी सहायक पदों पर भी निर्णय लिया गया था. इन विभिन्न संशोधन के बावजूद भी विभाग में कामकाज पुराने नियमों की वजह से मुश्किल हो रहा था. जिन्हें आखिरकार नई सेवा और नियमों वाली बनाकर खत्म करने का प्रयास किया गया है. हालांकि, अभी मंजूर की गई सेवा नियमावली को लेकर शासनादेश का इंतजार है.

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Author: nirbhiknazar

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