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उत्तराखंड के इस IAS अफसर के इस्तीफे पर सस्पेंस बरकरार, शासन में तीन महीने से लटका मामला

देहरादून: उत्तराखंड के IAS अफसर बीवीआरसी पुरुषोत्तम की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन पर सस्पेंस बरकरार है. बीवीआरसी पुरुषोत्तम को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (voluntary retirement suspense) का आवेदन किए हुए तीन महीने से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक इस पर शासन स्तर से ही सस्पेंस बरकरार है.

आईएएस बीवीआरसी पुरुषोत्तम के पास अभी भी 12 साल के अधिक की नौकरी की अवधि है. उनका 2037 में रिटायरमेंट होना है, लेकिन उन्हें 12 साल पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया. आईएएस बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने इसी साल मई में ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन कर दिया था, लेकिन अभी तक उनका स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर कोई फैसला नहीं लिया.

बड़ी बात यह है कि अभी इस अधिकारी की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से जुड़ी औपचारिकताओं को ही पूरा नहीं किया जा सका है, जबकि ऑल इंडिया सर्विस को लेकर एक नियम यह भी है कि शैक्षिक सेवानिवृत्ति में तीन महीने तक अनुमति नहीं मिलने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मान ली जाती है, लेकिन इस प्रकरण में स्थितियां थोड़ा अलग है. क्योंकि शासन स्तर पर इसको लेकर अभी कोई फाइल ही तैयार नहीं होने की जानकारी मिल रही है.

आईएएस बीवीआरसी पुरुषोत्तम साल 2004 बैच के आईएएस अधिकारी है. आईएएस बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने अपनी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का कारण पारिवारिक बताया था. आईएएस बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने तब ईटीवी भारत से बात भी की थी. इस दौरान उन्होंने कहा था कि वह पारिवारिक कारणों के चलते फिलहाल छुट्टी पर हैं और पारिवारिक वजहों के चलते ही उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है.

आईपीएस रचिता जुलाय का इस्तीफा मंजूर: एक तरफ जहां 2004 बैच के आईएएस अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम के वीआरएस पर सस्पेंस बना हुआ है तो वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2015 बैच की आईपीएस अधिकारी रचिता जुलाय का इस्तीफा मंजूर कर लिया है. रचिता जुलाय ने भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की इच्छा जाहिर की थी. इस मामले में अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनके इस आवेदन को मानते हुए त्यागपत्र स्वीकार कर लिया है. करीब 3 महीने पहले जून में रचिता ने VRS का आवेदन किया था. फिलहाल IPS रचिता जुयाल SP विजिलेंस की जिम्मेदारी संभाल रही है.

खास बात यह भी है कि IPS रचिता जुयाल के ही सुपरविजन में हरिद्वार नगर निगम जमीन घोटाले की जांच भी चल रही है और इस जमीन घोटाले में मनी ट्रेल को भी विजिलेंस ट्रेस कर रही है. उधर अब रचिता के इस्तीफे के बाद CO विजिलेंस हर्षवर्धनी सुमन के सुपरविजन में इस जांच को किया जाएगा. हालांकि पहले से ही हर्षवर्धनी इस जांच को संभाल रही थी, लेकिन अब अब पूरी जांच की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होगी.

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Author: nirbhiknazar

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