देहारादून: राज्य सरकार द्वारा पलायन को रोकने में कौशल विकास की अति महत्वपूर्ण भूमिका के दृष्टिगत, प्रशिक्षण कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग को सम्मिलित करते हुए दिसम्बर 2018 में कौशल विकास योजना एवं सेवायोजन विभाग का गठन किया गया। जिसके बाद लगातार कौशल विकास योजना के तहत नए आयाम स्थापित कर रहे हैं और इस योजना के अंतर्गत खुद को प्रशिक्षित कर रहे हैं। आपको बता दें विभाग का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को दीर्घ एवं लघु अवधि कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से उनका कौशल उन्नयन करना, कैरियर कांउसिलिंग प्रदान करना तथा उन्हें रोजगार/स्वरोजगार से जोड़ना ही था। जो अब साकार होता दिख रहा है। और युवा पीड़ी इसका फायदा उठा रही है।

उत्तराखण्ड मे प्रधानमंत्री कौशल विकास मिशन और प्रशिक्षु
उत्तराखण्ड कौशल विकास मिशन द्वारा 2016-17 तक 9805 युवाओं को प्रशिक्षित कर प्रमाणित किया गया जिनमें से 4802 युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये गये। उक्त प्रशिक्षण हेतु कुल रू. 10.20 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की गई जिसके सापेक्ष रू. 7.36 करोड़ की धनराशि व्यय की गई। वित्तीय वर्ष 2017-18 से अब तक विभिन्न लघु अवधि कौशल प्रशिक्षण योजनाओं के अन्तर्गत कुल 47087 युवाओं को प्रशिक्षित कर प्रमाणित किया गया जिनमें में 11032 युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जा चुके है तथा शेष को सेवायोजित किये जाने की कार्यवाही गतिमान है।

कोविड-19 के बाद और गतिमान हुई कौशल विकास योजना
फिलहाल प्रदेश मे कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुई परिस्थिति तथा प्रदेश में पलायन रोकथाम के दृष्टिगत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तृतीय संस्करण के अन्तर्गत स्वरोजगार तथा उद्यमिता विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर काम किया जा रहा है। वर्ष 2020 में प्रत्येक जनपद में जिला कौशल विकास समिति का गठन किया गया है तथा जिला कौशल विकास योजना तैयार की गई है। प्रदेश सरकार द्वारा राज्य पोषित कौशल विकास योजना संचालित की जा रही है जिसका धरातल पर कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है।