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हरिद्वार कुंभ मे संत समाज का फैसला फूलों से खेलेंगे होली नहीं देंगे गले मिलकर बधाई

ब्यूरो रिपोर्ट

हरिद्वार: इस बार कोरोना ने संतों को भी रंगों से बचने पर विवश कर दिया है, यही नहीं कोरोना के बढ़ते कहर को देखते हुए इस बार संत होली के पर्व पर गले मिलकर बधाई भी नहीं देंगे। हरिद्वार कुम्भ मे इस बार संत समाज ने होली के पावन पर्व पर सभी से अपील की है कि वे एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं गले मिलकर न दें। कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए संत समाज ने ये फैसला लिया है कि इस बार रंग, अबीर, गुलाल से होली न खेलते हुए केवल फूलों की होली खेली जाएगी। इस दौरान शारीरिक दूरी का भी ध्यान रखा जाएगा।

 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और संतों ने शनिवार को निरंजनी अखाड़े में बैठक की। इस दौरान अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि होली के पावन पर्व पर एक-दूसरे से गले लगा और अबीर गुलाल का टीका लगाकर मुबारकबाद देने की हमारी धार्मिक परंपरा रही है, लेकिन कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस बार संत समाज ने यह निर्णय लिया है कि रंग अबीर गुलाल से होली न खेलते हुए केवल फूलों की होली खेली जाए।

उन्होंने बताया कि इसको लेकर सभी संत-महात्माओं और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से सहमति व्यक्त की है। साथ ही सभी से ऐसा ही करने का आह्वान भी किया है। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही समाज के स्वास्थ्य की रक्षा का परम कर्तव्य निभाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद और उससे जुड़े सभी अखाड़ों के संत महात्मा इसका पालन करेंगे। इस मौके पर उनके साथ निरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी भी मौजूद थे।

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Author: nirbhiknazar

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