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हरीश रावत ने माल्टा पार्टी में जताई ये चिंता, कहा-अभी नहीं सुधारेंगे तो विकट हो सकती है समस्या

देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समय-समय पर स्थानीय उत्पादों और फलों की पार्टी देते रहते हैं. जिसमें कार्यकर्ता से लेकर पक्ष व विपक्ष के नेता तक शिरकत करते दिखाई देते हैं. इस बार हरीश रावत की माल्टा प्रतियोगिता सुर्खियों में बनी हुई है. हरीश रावत ने शनिवार को हरिद्वार बाईपास रोड स्थित एक विवाह स्थल में गैरसैंण माल्टा प्रतियोगिता के साथ-साथ माल्टा पार्टी का आयोजन किया. जिसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत सहित कई कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए.

हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस जनों व कार्यकर्ताओं को गैरसैंण, मेहलचौरी, डीडीहाट,मोहनरी, गंगोलीहाट,राय आगर , भीमताल और तेजम जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से मंगाए गए माल्टा के साथ रुद्रपुर व देहरादून के अमरूदों, हरिद्वार के गुड़ और जौनसार की अदरक की चाय का स्वाद भी चखाया. इस मौके पर उन्होंने माल्टा प्रतियोगिता में दो मिनट में सबसे ज्यादा माल्टा खाने वालों को सम्मानित किया. उनमें तीन माल्टा क्वीन और तीन माल्टा किंग चुने गए. उन्होंने माल्टा प्रतियोगिता आयोजित करने का उद्देश्य बताते हुए कहा कि उत्तराखंड के उच्च हिमालयी मध्य क्षेत्र की आर्थिकी राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो गई है.

यदि हम उन क्षेत्रों की आर्थिक को नहीं सुधारेंगे, तो इससे वहां की सामाजिक व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी और जिसका दुष्प्रभाव पूरे राज्य पर पड़ेगा. उन क्षेत्रों की आर्थिकी को बढ़ाने के लिए वहां के उत्पादों को समुचित मूल्यवर्धन करके ना केवल पर्यावरण बल्कि परिवेश की रक्षा भी कर सकते हैं. इन प्रयासों से वहां के निवासियों की आर्थिकी को सुधारने का काम किया जा सकता है. अंग्रेजों ने इन क्षेत्रों को माल्टा नारंगी उगाकर रूप से पोषित किया था. तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय हमने येलो गोल्ड के नाम से नींबू प्रजाति को बहुत प्रोत्साहित किया था, इसी तरह कीवी, एप्पल,एप्रिकॉट और चुलु जैसे मिशन लॉन्च किए थे, लेकिन दुर्भाग्य से माल्टा मिशन लॉन्च करते समय कांग्रेस सरकार चली गई.

इसलिए माल्टे को अगर प्रमोट किया जाएगा तो यही माल्टा मध्य हिमालय की अर्थव्यवस्था मे बड़ा भारी गुणात्मक परिवर्तन ला सकता है. सरकार ने माल्टा का दस रुपए और नींबू का सात रुपये खरीद मूल्य तय किया है, लेकिन इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में ही तय किया गया मूल्य ढुलाई में ही खत्म हो जाता है. इसलिए आज प्रतियोगिता के माध्यम से हमने सात रुपए किलो नींबू में और दस रुपए किलो माल्टे में कोई दम नहीं, इसलिए बीस रुपये किलो नींबू और पच्चीस रुपये किलो माल्टे से कम नहीं का नारा दिया है. इस नारे को गणेश गोदियाल और अन्य नेताओं ने भी स्वीकार किया है. आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी इसी दृष्टिकोण से काम करेगी. इस फल की क्वालिटी में लगातार गुणात्मक गिरावट आ रही है जिसको रोकना जरूरी है. इस फल को अन्य फलों की तरह बेहतर स्थान दिलाना जरूरी है.

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Author: nirbhiknazar

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