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पूर्व IPS लोकेश्वर सिंह की मुश्किलें बढ़ी, मारपीट मामले में दोषी करार, प्राधिकरण ने सुनाया फैसला

देहरादून: पिथौरागढ़ के टकाना में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में अवैध रूप से हिरासत में रखने और नग्न कर पीटने के एक मामले में पूर्व आईपीएस लोकेश्वर सिंह के खिलाफ राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने फैसला सुनाया है. प्राधिकरण ने आईपीएस अधिकारी रहे लोकेश्वर सिंह तत्कालीन पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ को दोषी करार देते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने की संस्तुति उत्तराखंड शासन गृह विभाग को भेजी है. साथ ही पुलिस अधिकारी को सुनवाई का पर्याप्त अवसर प्राप्त करने के भी आदेश जारी किए हैं.

11 कार्यालय के अंदर उस समय के पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह और अन्य छह पुलिस कर्मियों ने पिटाई की. जिसके कारण उन्हें काफी चोटें आई. उनका इलाज चल रहा है. जिसकी मेडिकल रिपोर्ट और एक्स-रे रिपोर्ट में चोटों के निशान हैं.

18 अप्रैल 2023 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह ने शपथ पत्र दिया की लक्ष्मी दत्त जोशी आपराधिक किस्म का व्यक्ति है. इसके खिलाफ कोतवाली पिथौरागढ़ में युवा अधिनियम,चंपावत में सरकारी काम में बाधा डालना और मारपीट गुंडा अधिनियम और कोतवाली पिथौरागढ़ में आपराधिक धमकी देने में मुकदमा दर्ज है. गांव वालों से जमीन संबंधी विवाद में उनके खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की गई है. कोतवाली पिथौरागढ़ क्षेत्र में वाहनों में आग लगाने की घटना के संबंध में लक्ष्मी दत्त जोशी को पूछताछ के लिए बुलाया गया. लक्ष्मी दत्त ने उसे घटना में शामिल होने से इनकार कर दिया. 6 फरवरी 2023 को उनके साथ कोई मारपीट नहीं की गई.

26 में 2023 को पीड़ित ने शपथ पत्र दिया की लोकेश्वर सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग कर और स्थानीय दलों के नेताओं से मिली भगत कर उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए हैं. सभी मुकदमों की सुनवाई कोर्ट में चल रही है. किसी भी मुकदमे में उन्हें दोषी नहीं किया गया है. एक पीड़ित तो पुलिस विभाग में तैनात सफाई कर्मचारी का बेटा है. 6 फरवरी 2023 को झूठे वाहनों को आग लगाने के मामले में उन्हें पुलिस अभिरक्षा में रखकर मारपीट की गई. उनके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया. करीब 3 साल राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण में चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अलग-अलग तारीखों को अपना-अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया.

बुधवार को न्यायमूर्ति एनएस धानिक अध्यक्ष पुलिस शिकायत प्राधिकरण, सदस्य पुस्तक ज्योति,अजय जोशी मोहन चंद्र और दया शंकर पांडे की बेंच ने मुकदमे पर निर्णय सुनाया. बेंच ने विवेचना में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह को इस मामले में पीड़ित को अपने कार्यालय में बुलाकर उसे नग्न कर मारपीट करने और काफी देर तक कार्यालय में बैठने का दोषी पाया. बेंच ने आदेश दिए की पूर्व आईपीएस के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की संस्तुति उत्तराखंड शासन गृह विभाग को भेजी जाए. साथ ही राज्य सरकार को यह भी निर्देशित किया कि उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए उन्हें सुनवाई का पर्याप्त अवसर प्रदान करते हुए विधि के अनुसार कार्रवाई की जाये.बता दें लोकेश्वर सिंह ने 14 अक्टूबर 2025 को पुलिस सेवा से त्यागपत्र दे दिया था. फिलहाल वह संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

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Author: nirbhiknazar

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