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उत्तराखंड में दो अफसरों में टशन, केंद्रीय अधिकारी ने की डीएम की शिकायत, जानें पूरा मामला

देहरादून: अपने कड़े फैसलों को लेकर हमेशा चर्चाओं में रहने वाले देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल एक नए मामले को लेकर चर्चाओं में हैं. इस बार चर्चा उनके किसी फैसले को लेकर नहीं, बल्कि शिकायत को लेकर हो रही है. दरअसल, डीएम सविन बंसल और देहरादून के कैंटोनमेंट बोर्ड क्लेमेंट टाउन की सीईओ अंकिता सिंह के बीच विवाद का मामला सामने आया है. खास बात है कि दोनों के कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं.

मामला, देहरादून जिलाधिकारी की बुलाई एक बैठक से जुड़ा है. जिसमें कैंटोनमेंट बोर्ड क्लेमेंट टाउन की सीईओ अंकिता सिंह हाजिर नहीं हुईं. इससे खफा डीएम बंसल ने सीईओ के सरकारी वाहन (रक्षा मंत्रालय की संपत्ति) को जब्त करने के लिए आरटीओ की टीम उनके घर भेज दी. जिसे सीईओ ने मानसिक उत्पीड़न और अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण बताते हुए मुख्यमंत्री धामी को पत्र लिखा और डीएम सविन बंसल की शिकायत की.

देहरादून कैंटोनमेंट बोर्ड क्लेमेंट टाउन की सीईओ अंकिता सिंह ने मुख्यमंत्री को दी शिकायती पत्र में लिखा,

किस तरह से एक प्रशासनिक अधिकारी हिटलरशाही पर उतर आया है कि एक महिला अधिकारी के घर पुलिस और आरटीओ की टीम भेज दी. यह सेंट्रल गवर्नमेंट के एक महिला कर्मचारी के साथ उत्पीड़न का मामला है. अभी ना तो देश और ना प्रदेश में आपातकाल लगा है, जो जिलाधिकारी ने इमरजेंसी पावर (मोटर व्हीकल एक्ट 1947) का इस्तेमाल करते हुए मेरे सरकारी वाहन को अधिग्रहित करने के आदेश दे दिए. जहां तक बात जनगणना की बैठक में भाग लेने की है, तो मेरे द्वारा अपना प्रतिनिधि भेजा गया था.

उन्होंने पत्र में आगे लिखा किवह अपनी सेवाएं कैंटोनमेंट बोर्ड क्लेमेंट टाउन को दे रही हैं, जो कि केंद्रीय रक्षा मंत्रालय की एक स्वायत्त संस्था है और इसका कार्यक्षेत्र जिलाधिकारी के कार्यक्षेत्र से बिल्कुल अलग है. वहीं जिलाधिकारी को रक्षा मंत्रालय के वाहन को जब्त करने का अधिकार नहीं है, जो की कार्यक्षेत्र अधिकार का भी उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि, यह कार्यक्षेत्र में जेंडर डिस्क्रिमिनेशन भी है कि एक महिला अधिकारी को अपमानित करने और नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है.

इस पूरे मामले पर डीएम देहरादून से भी पक्ष लेने के लिए दिन मीडिया कर्मी कोशिश करते रहे. लेकिन डीएम देहरादून ने किसी को कोई जवाब नहीं दिया और ना ही उन्होंने किसी का फोन उठाया. हालांकि, देर शाम उनके ऑफिस से एक स्पष्टीकरण नोट जरूर जारी किया गया.

डीएम ऑफिस से जारी स्पष्टीकरण में कहा कि,

भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा जनगणना प्रक्रिया के अग्रिम चरण में प्रवेश करने के दृष्टिगत जिलाधिकारी को प्रमुख जनगणना अधिकारी नामित किया गया है. गृह मंत्रालय द्वारा अपेक्षा की जा रही है कि जनगणना चार्ज अधिकारियों की नियुक्ति, उनके साथ नियमित बैठकें आयोजित कर क्षेत्र निर्धारण, अंतर्विभागीय समन्वय, कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करना और अधीनस्थ कर्मचारियों की नियुक्ति की कार्रवाई समयबद्ध रूप से पूर्ण कर त्वरित रूप से मंत्रालय को अवगत कराया जाए.

इसी क्रम में निदेशक जनगणना (गृह मंत्रालय, भारत सरकार) एवं जिला प्रशासन देहरादून की संयुक्त बैठक 28 जनवरी 2026 को आहूत की गई. बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कैंट बोर्ड गढ़ी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, छावनी परिषद क्लेमेंट टाउन को विधिवत लिखित सूचना और दूरभाष (फोन) के माध्यम से अवगत कराए जाने के बावजूद उनके द्वारा बैठक में प्रतिभाग नहीं किया गया. इस पर निदेशक जनगणना द्वारा कड़ा रोष व्यक्त किया गया.

इसके बाद 31 जनवरी 2026 को पुनः बैठक आयोजित की गई, जिसकी सूचना 28 जनवरी 2026 को ही दी कर दी गई थी. साथ ही अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा बैठक के महत्व को स्पष्ट करते हुए दोनों छावनी परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से दूरभाष (फोन) पर संपर्क कर बैठक में प्रतिभाग करने का अनुरोध भी किया गया. इसके बावजूद दोनों अधिकारी पुनः बैठक में अनुपस्थित रहे.

अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण संबंधित छावनी क्षेत्रों का क्षेत्र निर्धारण नहीं हो सका और जनगणना से संबंधित प्रारंभिक कार्रवाई भी प्रारंभ नहीं हो पाई. इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए निदेशक जनगणना (गृह मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा जिला प्रशासन देहरादून को संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध Census Act, 1948 (सेंसस एक्ट) के अंतर्गत कार्रवाई की संस्तुति की गई है. जिला प्रशासन देहरादून और निदेशक जनगणना द्वारा संयुक्त रूप से Census Act, 1948 की धारा 6, 7 और 11, जिसमें एक माह तक के कारावास का प्रावधान है के अंतर्गत अग्रिम विधिक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है.

उधर, खास बात है कि, आने वाले कुछ दिनों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का उत्तराखंड दौरा है. उस दौरान भी यह मामला उनके संज्ञान लाया जा सकता है और शिकायत उन तक भी पहुंचाई जा सकती है.

पहले भी रहे चर्चाओं में: देहरादून डीएम का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के दौरे के समय डीएम देहरादून पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया था, क्योंकि डीएम ने लोकसभा स्पीकर स्टाफ का फोन नहीं उठाया था और लोकसभा स्पीकर को प्रोटोकॉल नहीं मिल पाया था. इसके अलावा, देहरादून में आपदा के दौरान मंत्री गणेश जोशी का फोन न उठाने का मामला भी काफी चर्चाओं में रहा था.

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Author: nirbhiknazar

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