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उत्तराखंड के शासकीय कार्यालयों में सुरक्षा के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया लागू, विशिष्ट व्यक्तियों को भी लेनी होगी अनुमति

देहरादून: राज्य में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक Ajay Nautiyal के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद सरकार ने सभी शासकीय कार्यालयों में नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है। इसका उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना तथा बाहरी दबाव, दुर्व्यवहार और हिंसा जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।

घटना के बाद शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों में रोष देखने को मिला था। विभिन्न संगठनों ने कार्यालयों में सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की थी, जिसके बाद सरकार ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

किन कार्यालयों में लागू होगी नई व्यवस्था

यह व्यवस्था विधानसभा और सचिवालय को छोड़कर राज्य के सभी शासकीय कार्यालयों में लागू होगी। संबंधित विभागों द्वारा पृथक अधिसूचना जारी की जाएगी।
ये नियम आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, उनके समर्थकों, निजी ठेकेदारों तथा सुरक्षा कर्मियों सहित सभी आगंतुकों पर समान रूप से लागू होंगे।

प्रवेश और पहचान के सख्त नियम

  • सभी कर्मचारियों के लिए परिचय पत्र धारण करना अनिवार्य होगा।
  • बिना परिचय पत्र के कार्यालय परिसर में प्रवेश नहीं मिलेगा।
  • आम नागरिकों के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
  • मुख्य द्वार पर धातु जांच यंत्र लगाए जाएंगे।
  • किसी भी विशिष्ट व्यक्ति को बिना पूर्व अनुमति प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
  • सुरक्षा चौकी पर फोटो सहित “प्रवेश निषेध पंजिका” रखी जाएगी, जिसमें दुर्व्यवहार या हिंसा के दोषी व्यक्तियों का विवरण दर्ज होगा।

मुलाकात के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य

  • किसी भी अधिकारी से मिलने के लिए पूर्व समय लेना आवश्यक होगा।
  • बिना अनुमति सीधे अधिकारी कक्ष में प्रवेश नहीं मिलेगा।
  • एक समय में अधिकतम दो व्यक्तियों को ही अधिकारी कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य भीड़भाड़, दबाव और सामूहिक आक्रामकता की स्थिति से बचाव करना है।

प्रतिबंधित वस्तुओं पर पूर्ण रोक

कार्यालय परिसर में ज्वलनशील पदार्थ, स्याही, लाठी-डंडा, हथियार या अन्य आपत्तिजनक वस्तु लाना पूर्णतः वर्जित रहेगा।
वीडियो बनाना या छायांकन करना संबंधित अधिकारी की अनुमति के बिना प्रतिबंधित होगा।

निगरानी और सुरक्षा प्रबंध

  • प्रवेश द्वार, गलियारों और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी कैमरे लगाए जाएंगे।
  • अधिकारियों की मेज या स्वागत कक्ष में गुप्त आपातकालीन चेतावनी व्यवस्था की जाएगी।
  • आपात स्थिति में तुरंत सुरक्षा कर्मियों को सूचना दी जा सकेगी।

घटना के बाद की कार्रवाई

  • किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में घटनास्थल को तुरंत सुरक्षित किया जाएगा।
  • निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखकर जांच अधिकारी को सौंपी जाएगी।
  • निरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा जांच की जाएगी।
  • अधिकतम दो माह के भीतर जांच पूर्ण करने का प्रावधान किया गया है।

अपेक्षित लाभ

नई व्यवस्था से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षित, अनुशासित और भयमुक्त कार्य वातावरण मिलेगा। स्पष्ट नियमों और निगरानी व्यवस्था से बाहरी हस्तक्षेप पर अंकुश लगेगा तथा दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।

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Author: nirbhiknazar

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