देहरादून: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी Gairsain में मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने एक लाख 11 हजार 703 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। धामी सरकार के इस बजट को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
Ganesh Godiyal ने वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तुत बजट को दिशाहीन, विकास विरोधी और महंगाई व बेरोजगारी बढ़ाने वाला चुनावी बजट करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल चुनावी वर्ष में घोषणाओं का पुलिंदा बनकर रह गया है और इसमें जनता की मूल समस्याओं के समाधान की कोई स्पष्ट झलक नहीं दिखाई देती।
गोदियाल ने कहा कि राज्य में बढ़ती बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन बजट में युवाओं को स्थायी रोजगार देने के लिए कोई ठोस और प्रभावी योजना नहीं दिखाई दी। साथ ही प्रदेश से लगातार हो रहे पलायन को रोकने के लिए भी बजट में कोई प्रभावी रणनीति नजर नहीं आती।
उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पहले से ही चिंताजनक है। पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों और आवश्यक संसाधनों की कमी है, इसके बावजूद बजट में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, सरकारी विद्यालयों को सुदृढ़ करने और शिक्षकों की कमी दूर करने को लेकर भी बजट में ठोस कदमों का अभाव बताया गया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भी कोई बड़ी योजना सामने नहीं आई है। महंगाई से जूझ रही आम जनता को राहत देने के लिए भी बजट में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
गोदियाल का कहना है कि बजट का आकार बड़ा दिखाना आसान है, लेकिन सवाल यह है कि आम आदमी की जेब में क्या गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों की तरह इस बार भी सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए हैं, लेकिन जमीन पर परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भर्ती परीक्षाएं लगातार घोटालों में फंस रही हैं। बजट में रोजगार सृजन की कोई ठोस योजना नजर नहीं आती। किसानों को महंगे बीज, खाद और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि आधारित उद्योगों को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में राज्य पर कर्ज 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। सरकार विकास के नाम पर कर्ज तो ले रही है, लेकिन उसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच रहा है।