Nirbhik Nazar

शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एवं रिसर्च झाझरा बना आयुर्वेदिक चिंतन का केंद्र, विशेषज्ञों ने रखे विचार

देहरादून : राजधानी Dehradun स्थित Shivalik Institute of Ayurveda and Research में आयुर्वेद विषय पर आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की वैश्विक महत्ता और बढ़ती स्वीकार्यता पर चर्चा की।

कार्यक्रम में National Commission for Indian System of Medicine के सदस्य प्रो. Atul Varshney ने कहा कि हाल ही में आयोजित आयुर्वेद के वैश्विक सेमिनार में 38 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है और Uttarakhand को देवभूमि होने के कारण इस क्षेत्र में विशेष पहचान प्राप्त है। उन्होंने सेमिनार के सफल आयोजन के लिए संस्थान को बधाई भी दी।

कार्यक्रम में पूर्व डीजी आयुष Pooja Bhardwaj ने अपने संबोधन में कहा कि चिकित्सा प्रणाली में अनुशस्त्र चिकित्सा एक प्राचीन और प्रभावी पद्धति है। इसके माध्यम से रोगों का सफल उपचार संभव है और बीमारी के दोबारा होने की संभावना भी कम रहती है। उन्होंने कहा कि आज आयुष विभाग के प्रयासों से आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है।

वहीं, मुख्य अतिथि प्रोफेसर Arun Tripathi ने कहा कि आने वाले समय में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति विश्व स्तर पर और अधिक प्रसिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और देश में आयुर्वेद से जुड़े शोध और चिकित्सा प्रणाली में लगातार सफलता मिल रही है।

यह सेमिनार Uttarakhand Ayurved University और Uttarakhand State Council for Science and Technology के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के डीन प्रो. Pankaj Sharma, डॉ. शिशिर, प्राचार्या डॉ. सिमरन, डॉ. राजीव शर्मा और डॉ. सतेंद्र कुमार सहित विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी भाग लिया।

सेमिनार में अनुशस्त्र और पंचकर्म चिकित्सा पद्धति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए और आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध व नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

nirbhiknazar
Author: nirbhiknazar

Live Cricket Score
Astro
000000

Live News