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उत्तराखंड में लागू होगा ‘देवभूमि परिवार आईडी’ सिस्टम: 15 साल से रह रहे परिवारों को मिलेगी डिजिटल पहचान

देहरादून : उत्तराखंड में अब हर परिवार को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में चल रहे विधानसभा बजट सत्र के दौरान उत्तराखंड देवभूमि परिवार विधेयक 2026” पेश किया है। यह विधेयक कानून बनने के बाद प्रदेश में पिछले 15 वर्षों से रह रहे परिवारों को एक विशेष देवभूमि परिवार आईडी प्रदान करेगा।

सरकार का कहना है कि यह केवल एक पहचान संख्या नहीं होगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी और सरल बनाने की दिशा में बड़ा सुधार साबित होगी। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म करने और योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

क्या है देवभूमि परिवार आईडी

देवभूमि परिवार आईडी एक आठ अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या होगी, जिसके माध्यम से राज्य के प्रत्येक परिवार का एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने के बाद राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी विभागों का डेटा एक ही प्लेटफॉर्म से जुड़ जाएगा। इससे सभी विभागों के पास नागरिकों का एक ही सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

महिला को बनाया जाएगा परिवार का मुखिया

सरकार ने इस योजना में महिला सशक्तिकरण को भी प्राथमिकता दी है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार 18 वर्ष से अधिक आयु की महिला को परिवार का मुखिया माना जाएगा। यदि परिवार में कोई वयस्क महिला सदस्य नहीं होगी, तभी परिवार के सबसे बड़े पुरुष को मुखिया बनाया जाएगा।

हरियाणा मॉडल पर आधारित व्यवस्था

उत्तराखंड की यह व्यवस्था हरियाणा के परिवार पहचान पत्र (PPP) मॉडल से प्रेरित है। हरियाणा में इस प्रणाली के माध्यम से सरकारी योजनाओं की डिलीवरी को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया गया है। उसी तर्ज पर उत्तराखंड में भी एकीकृत डिजिटल प्रणाली विकसित की जा रही है।

बिना आवेदन के मिल सकेगी कई सेवाएं

इस प्रणाली का उद्देश्य नागरिकों को स्वचालित सेवा वितरण (प्रोएक्टिव सर्विस डिलीवरी) उपलब्ध कराना है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति की आयु 60 वर्ष पूरी होती है तो सिस्टम स्वतः उसकी वृद्धावस्था पेंशन की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

भ्रष्टाचार और फर्जी लाभार्थियों पर रोक

सरकार का मानना है कि देवभूमि परिवार आईडी लागू होने के बाद फर्जी लाभार्थियों की पहचान करना आसान होगा और सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों को ही मिल सकेगा। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो पाएगा और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा।

कौन होगा पात्र

सरकार ने इस आईडी के लिए स्पष्ट पात्रता निर्धारित की है।

  • केवल वही परिवार पात्र होंगे जो पिछले 15 वर्षों से उत्तराखंड में रह रहे हैं
  • राज्य के मूल निवासी सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार, जो वर्तमान में बाहर तैनात हैं, वे भी इसके पात्र होंगे।
  • प्रत्येक जिले में देवभूमि परिवार अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो डेटा का सत्यापन और भौतिक जांच करेंगे।

दस्तावेजों की झंझट से मिलेगी राहत

देवभूमि परिवार आईडी लागू होने के बाद नागरिकों को अलग-अलग विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। एक ही आईडी के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी और समय व धन दोनों की बचत होगी।

डेटा सुरक्षा पर विशेष जोर

डिजिटल प्रणाली में नागरिकों की जानकारी सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने कड़े प्रावधान किए हैं। यह पूरी व्यवस्था डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 के मानकों के अनुसार संचालित की जाएगी। साथ ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में देवभूमि परिवार प्राधिकरण गठित किया जाएगा, जो डेटा की सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगा।

सरकार का कहना है कि नागरिकों की अनुमति के बिना उनकी व्यक्तिगत जानकारी किसी भी निजी संस्था या बाहरी एजेंसी के साथ साझा नहीं की जाएगी और डेटा पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।

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Author: nirbhiknazar

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